कख द्याख, (गढ़वळि गजल)

दोस्ती करण वल़ुंन्,कैकी औकात कख द्याख। दिल जब मिल ही गैन,फिर जात कख द्याख।। बरबाद हूणsक छन बहाना लाख ईंं

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तुम भुना त ठीकी ह्वालु ( गढवळी कविता)

तुम भुना त ठीकी ह्वालु….. “””””””””””””””””””””””””””””””””” मिता सारै रौ कि कैन त आण च क्वी त द्वार मोर ख्वाललू. ……..

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