सिलटू मा पिस्यूं 24 बनीक नूण (नमक) स्वाद बान दूर दूर तकन अंदन, विदेशू मा बडी मॉग

सिलटू मा पिस्यूं नूण या चटणी त पहाड़ू मा खूब खये जांद, नीबूं कचमोळी ह्वाव या रूट्टी अर चाय दगड़ खाणा कुणी नूण घऽर मा पिस्यूं मिली जांद। लेकिन अगर यू सिलटू मनन पिस्यूं नूण रोजगार साधन बण जाव त सुणी कन थुड़ा अटपटू लगलू, लेकिन या बात सच्च च कि आज सिलटू मा पिस्यूं 24 बनीक लूण देश अर दुन्या मा खूब मॉग हूण। आज पहाड़ मा अपणू हूनर कु अच्छू उपयोग करी कन यख क्षेत्रीय उत्पाद न नूण बणै कन देश ही ना बलकण विदेशू मा भी काकडीघाट का सिलटू मा पिस्यूं नूण बौत लोगू हत्था हत्थी मगणा छन। काकड़ीघाट क पर्यटक सूचना केन्द्र क भवन तै किराण पर लेकन साल 2012 बटी येकी शुरूवात कन ह्वाळी दीपा खनायत रैवासी नौंगांव (अल्मोड़ा) बतांद कि शुरूवात वीं तै बौत खैरी खाणी पड़ीन। द्वी साल तकन पहाड़ी पिस्यूं नूण बणाण खातिर मसल अर होर समान गौं मा जैकन खरीदण पड़दन। येक बाद नूण तै पीसण दगड़ी होर दिक्कत भी ऐनी पर हमन हिम्मत नी हारी अर अपण काम पर लग्यां रवां।

ये पिस्यूं नूण की च बौत मॉग

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सिलटू मा पिसी कन नूण बणाण काम खातिर यख 06 जनानियूं तै रोजगार मिल्यूं। पिस्यूं नूण की बढद मॉग कारण अब यख 24 बनकी स्वाद नूण जनानि तैयार कना छन। ये नूण तै खरीदणा खातिर क्षेत्रीय लोगू अलावा पर्यटकू भी जत्था लग्यूं रै करदू। रूड़यूं बगत भैर राज्य बटी आण ह्वाळ सलाणी सड़क किनर रूकीकन पिस्यूं नूण लेकन जै करदन। पिस्यूं नूण बणाण कुणी काळी मर्च, जीरू, आदू, ल्यासण, हींग, तिल, भंगीरा, हर धणिया, भूनी मर्च, काळू जीरा, अलसी, दैण, मिलयां मसल तै बारी बारी करीकन नूण मा पिसीकन पॉच किलो नूण सिलटू मा तैयार करीकन वैक छ्वटू छ्वटू पैकेट मा बणै कन यू भरीकन येकी पैकिंग करे जांद। सिलटू मा पिस्यूं यू नूण, दिल्ली, चण्डीगढ, देहरादून, पिथौरागढ समेत होर शहरू मा भिजण दगड़ी अब येक मॉग विदेशू मा भी बढण लगी गे। सैलानी लोग एक ही बार मा अ़़द्धा या एक किलो पिस्यू नूण दगड़ी लेकन जै करदन। दीपा खनायत बतै कि पिस्यूं नूण बढदी मॉग से चलद गौं लोग अब ज्यादा मसाले की खेती कन लगी गेन।

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