कांध मा हळ जू, ऐथर पर बळदू जोड़ी, बांझ पुगड़यू तै आबाद कनी 42 साल या वीरांगना नारी

      एक तरफ लॉकडाउन बाद जब प्रवासी रैवासी अजकाल घर अयां छन, अर यीं बात से परेशान छन कि नौकरी स्थिति डांवाडोल ही छ, अब अगर रोजगार या नौकरी मिलली भी त उथगा सेलरी नी मिलली जथगा पैल मिलदी छेयी, जबकि शहरौं मा रहन सहन कुणी खत्ता पोळ कन ही पड़दू। तब उ सुचणा छन कि घर मा ही कुछ रोजगार मिल जाव त हम यखी पर कुछ कर लिवां, लेकिन बांंझ पंण्या पुंगड़ी देखी कन हिम्मत नी कैरी सकणा छन, अगर द्वी चार क्वी हिम्मत कना भी छ त वै तै लोग डराणा छन कि यूं पुगड़यूं पर कुछ हत्थ नी लगण ह्वाळ, जानवर नुकसान कना छन। अब अगर क्वी अपर घरवळी तै घर छोड़ीकन जांद त वैक घर मा हळ फाळ लगाण ह्वाळ भी क्वी नी मिलणू। हमर पहाड़ मा पैल जनानि हळ लगाण नखरू मन्यांद छ्यायी लेकिन कखी कखी जब मजबूरी मा जनानियूं तै भी हळ अपर हत्थ पर थमणी पड़ी।

      आज ये लेख मा हम इनी एक जनानि ज्वा यन साबित कना कि यदि धरती मा बीज बुये जाव अर ईमानदारी से मेहनत करे जाव त वा मेहनत कभी जाया नीं जांदी। उत्तराखण्ड राज्य पहाड़ी क्षेत्र मा उपजाऊ कृषि भूमि छोड़ीकन पलायन करद लोगू कारण खाली गौं मा अगर क्वी जनानी हळ लगांद दिखे जाव त पैल यकीन नी हूंद लेकिन या बात क्वी काल्पनिक कहानी कथा नी छ बल्कण हकीकत छ। कौशल्या देवी नौं की या जनानि ज्वा कत्ती गौं बांझ पुंगड़यौं पर अकेला दम पर अपर बळदू जोड़ी अर हळ लगैं कन उसर बणाणा छ।

       कांध मा गर्रू हळ अर जू धरीकन, हत्थ पर नाड़ू लेकन, अर ऐथर पर बळदू जोड़ी हंकाद हंकाद जांद अर पुंगड़ी मा पौछी कन पैल निसड़ू साजी कन हळ जुतद कवर फोटो मा दिख्याणी ह्वाळी जनानि कौशल्या देवी आज मिसाल छ। मजबूत हौसला ह्वाळी कौशल्या देवी जब 11 साल पैल वींक आदमी (पति) स्वर्ग सिधार गीन तब चार बच्चों जिम्मा भी उंक कधों पर ऐ ग्यायी। यन बगत मा धोती मुख ढकी रूण बजाय वींन धोती किनर पट्टा बणै कन मकम्बर बॉधी अर हिम्मत जुटै कन अफु तै अफीक सार देकन चार बाळ नौन्याळूं परवरिश बाबत कंधा मा हळ उठै कन अपर परिवार पळण जिम्मेदरी उठायी अर आज वा कत्ती गौं बंजर पुगड़ मा हळ लगै कन उंते उपजाऊ बणाणा छ। समाज उठण ह्वाळ उंगळी अर सवाल उंक समणी चुनौती छेयी लेकिन उन बिना क्वी परवाह कर्या अपर काम पर धेय लगै कन कनी रायी।

   पौड़ी ब्लॉक कठूड़ गॉव रैवासी 42 साल कौशल्या देवी रतब्याणी 04 बजे बगतसिंरां उठीकन घर काम निपटै अर वैक बाद हळ लेकन उजळ हूण से पैल पुंगड़ी मा चली जांद अर दिन भर काम निपटैं कन रात 09 बजे अपर नौन्याळौं मुक्खम आंद।

    नियमपंसद कौशल्या ईमानदारी जूननू अर मेहनत देखी कन आस पडौस गॉव रैवासी भी अपर पुगंड़ हळयाण बाबत वींतै ही बुलै करदन, लेकिन वींक चाण बाद भी सब जगह नी जै सकदी। अपर बळदू कांध पर हळ धरी कन हळ लगांद लगांद कौशल्या देवी इशर भी बळद खूब बिंगी जै करदन। जब पुंगड़ मा हळ नी लगांद तब वा गॉव मा मजदूरी काम करद। पुरणू उजड़न्या कूड़ मा रै कन मेहनतदार कौशल्या देवी हर क्वी तारीफ अर सराहना करदू।

          खास बात या भी छ कि कौशल्या देवी काम से लोग इथगा खुश छन कि उ अपर बांझ पुंगड़यूं पर मशीन लगाण बजाय कौशल्या देवी बिटी हळ लगै कन ही उंते बाण चाणा छन। द्वी चार हजार कमाणा बाबत अपर गौं मुल्क, माटू, सुकून साफ हव्वा पाणी अर अपर पुरखू जमीन छोड़ीकन नप्प नप्प करी कन मैदान अर शहरौं मा केवल रोजगार नाम पर जाणा ह्वाळी नै पढवळी खातिर 15 से 20 हजार रूप्या घर मा ही कमाण ह्वाळी या हळया नाम से जणी मणी जनानि कौशल्या देवी एक बौ बड़ू उदाहरण छ, ज्वा अपर घर मा रैकन अपर दगड़ मा होर मौं की बांझ पड़ी पुगड़यूं तै ना केवल बाणा छ, बल्कण उं तै हर भर करी कन उदाहरण बणी छ।

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