पहाड़ी क्षेत्र काश्तकारौं खेती तै जंगळी सुंगर से लेकन गूणी बांदर, अर बरखा बथौं से भारी नुकसान, आखिर क्या छ उंक सारू

   यमकेश्वरः घनेन्द्र असवाल न अपर पुंगड़यूं मा लगभग द्वी क्वींटल पिंडळू लगयूं, ऐथर पैथर अग्यर पर मुंगरी ब्वेन, फिर कुदड़ा पर मेहनत करी कन हळ लगायी, अजकली भदवाड़ बाणा तैयरी कना। घनेन्द्र असवाळ दगड़या सब्बी घर छोड़ी कन नौकरी कना बाबत भैर जयां छन, लेकिन घनेन्द्र असवाल घर मा रैकन खेती पाती करी कन गुजर बसर कना छ। बखर भी पळंया छन, एक जोड़ी बळद अर द्वी चार गौड़ छन, अजों अपर पुंगड़ा पर हळ पात वी कना छन, उंक दगड़ा मा उंक घरवळी सहयोग करदी।

       हम यूं बात तै पढीकन बड़ौ खुश ह्वे करदों कि क्या बढिया काम कनू छ, बुल्दन बल दूर बजण सब्यूं तै भल लगदन। लेकिन घनेन्द्र असवाळ कनमा यीं खेती पाती तै संभळणा वी जणदू या वै जणी जू ये काम तै कनू वी जाणल। यमकेश्वर गुजराड़ी गॉव मा घनेन्द्र सिंह असवाल जू काश्तकार छन, उंक पुंगड़ी मा अदरक हल्दी पिंडळू, अदकर, मर्च, फिलहाल त्याड़ पुगंड़ू पर लगयूं छ्यायी। मुंगरी पर भी बलड़ अर थ्वाथा ऐ गे छ्यायी लेकिन परसी बथौं न मुगरयट पर लमडिसाण लगी ग्यायी, या त छेयी कुदरत मार। वै से पैल उंक दिन दुफरा मा एक बखरू तै गौरू चरांद बगत बाघ मुख ऐथर बिटी उठै ली ग्यायी, अर घ्याळ लगांद रै गीन, लेकिन बखरू हत्थ नी लगी। यी तरास तै जन कन करी कन सै भी छ, वैक बाद फिर रात मा जंगळी सुंगर न उंक पुंगड़ू पर लगयूं अरबी तै सरा खोदी कन चली ग्यायी। घनेन्द्र असवाल न बतै कि म्यार लगभग डेढ़ क्वेंटल अरबी नुकसान ह्वे ग्यायी।

   
या  खैरी  अकेला घनेन्द्र असवाळ नी छ बल्कण उत्तराखण्ड हर वै पहाड़ी काश्तकार कहानी छू जू पहाड़ मा ये संघर्ष बीच अपर खेती तै बचाणा खातिर दिन रात मुसीबत उठाणा छन, वाकयी मा अगर पहाड़ सच्चू हितैषी छन त यी काश्तकार जू ब्वाण से लेकन मंडण तकन फसल तै अपर जी जान लगै कन बचै करदन। बुज्जी लगलू तै गूणी बांदर खाणा छन, पुंगड़यू पर नाज तै जंगळी जानवर, गोर बखर तै बाघ, अर मुर्गा मुर्गी तै स्याळ कुरस्यळ नुकसान पौछाणा छन, अब यन मा कनक्वे कन ये काश्तकार अपरी मेहनत फसल तै बचाणं

     ये बाबत स्थानीय काश्तकार बुलण छ कि सरकार सबसे पैल चकबंदी करवाव, अर खेती तै बढावा दीण अर पलायन रूकण त ये बाबत धरातल पर काम कन ह्वाळ किसानौं दगड़ी बैठीकन येक समाधान करे जाव, निथर पुंगड़ बांझ पड़ल, लालटेना झाडी ह्वेली बाघ कुणी उ ड्यार बण जंाद, तब गोरू बखर पळण भी मुश्किल ह्वे जांद। अजकली लाॅकडाउन बाद प्रवासी घर अयां छन, उ कुछ काम कन सुचद भी छन त यी हाल देखीकन उ भी निरशे जंदीन, अब इन मा कनक्वें कन उत्तराखण्ड पहाड़ी क्षेत्र काश्तकार खेती कना बाबत संघर्ष करल, जब कब्बी प्रकृति, कब्बी जंगळी जानवर, कबरी विपदा यूंक पैथर पड़ी रैंद।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *