उत्तराखंड सरकार के इस बड़े फ़ैसले के बाद लौटने लगी चारधाम यात्रा की रौनक

अब तक 46 हजार से अधिक तीर्थ यात्री कर चुके हैं चारधाम के दर्शन

देवस्थानम बोर्ड द्वारा आज 2 अक्टूबर शायं तक किये 4401 ई -पास जारी
चारधाम यात्रा हेतु कोरोना निगेटिव जांच रिपोर्ट की बाध्यता समाप्त होने के बाद आज ई -पास की संख्या बढ़ी

तीन माह में कुल 85785 ई- पास जारी हुए, लोगों में चारधाम यात्रा के प्रति उत्साह

अभी तक 46 हजार से अधिक तीर्थयात्री चारधाम के दर्शन कर चुके हैं।

देहरादून। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा पर्यटन-धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज के दिशा-निर्देश में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड द्वारा प्रदेश के लोगों के लिए चार धाम यात्रा का 1 जुलाई से शुभारंभ हुआ जबकि 25 जुलाई से कुछ प्रावधानों के साथ चार धाम यात्रा सभी के लिए शुरू हुई।

चार धाम तीर्थयात्रा हेतु उत्तराखंड से बाहर के तीर्थ यात्री 72 घंटे पूर्व की इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से प्रमाणित लैब से कोरोना जांच की नैगेटिव रिपोर्ट अथवा क्वारंटीन अवधि का प्रमाण के मानक को समाप्त कर दिया गया है। अब स्वास्थ्य मानको का पालन कर देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट से देश के अन्य प्रांतों के लोग आसानी से चारधाम यात्रा ई पास बना सकते है। आज शाम तक उत्तराखंड देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड की वेबसाइट www.badrinath-kedarnath.gov. in से 4401 लोगों ने चार धामों हेतु ई -पास बुक कराये हैं।

जिसमें श्री बदरीनाथ धाम के लिए 1113 श्री केदारनाथ धाम के लिए 2162 श्री गंगोत्री धाम हेतु 657 श्री यमुनोत्री धाम हेतु 469 लोगों ने ई पास बुक कराये है। आयुक्त गढ़वाल/उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने यह जानकारी दी है कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा श्री यमुनोत्री धाम एवं गंगोत्री धाम में न्यासियों/ हकूकधारियों के सहयोग हेतु देवस्थानम बोर्ड के अधिकारियों/कर्मचारियों की तैनाती की है। उन्होंने कहा कि देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के तहत हक हकूकधारियों के सभी हित सुरक्षित हैं।

कहा कि देवस्थानम द्वारा अब प्रदेश से बाहर लोगों को कोरोना निगेटिव जांच रिपोर्ट एवं क्वारंटीन की शर्तों को हटा दिया गया है।

अब सभी को स्वास्थ्य मानकों का पालनकर चार धाम यात्रा की अनुमति है। चार धामों में तीर्थयात्रियों को मंदिरों में दर्शन हो रहे है जिसमें किसी तरह का कोई अवरोध नहीं है। चारधाम यात्रा के अच्छे परिणाम आये हैं। कोरोना महामारी से बचाव एवं रोकथाम हेतु थर्मल स्क्रीनिंग, सेनेटाइजेशन के पश्चात ही मंदिरों में तीर्थ यात्रियों को प्रवेश दिया जा रहा है। मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है शोसियल डिसटेंसिंग का ध्यान रखा जा रहा है। यात्रा मार्ग पर देवस्थानम बोर्ड के यात्री विश्राम गृहों को तीर्थ यात्रियों की सुविधा हेतु खोला जा चुका है। तीर्थयात्रियों से अपेक्षा की जा रही है कि अति आवश्यक होने पर ही धामों में रूके। यह कोशिश रहे कि दर्शन के पश्चात तीर्थ यात्री निकटवर्ती स्टेशनों तक वापस आ जाये।

मौसम तथा सड़कों की स्थिति की जानकारी रखें। सड़को की स्थति अब सामान्य है। बरसात के बावजूद यात्रा मार्ग खुले हुए हैं। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि चारों धामों में धीरे-धीरे तीर्थ यात्रियों की आमद हो ताकि पर्यटन एवं तीर्थाटन को गति मिल सके। अब उत्तराखंड से बाहर के लोग भी बिना कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के चारधाम यात्रा हेतु ई पास बनाकर एवं स्वास्थ्य संबंधी मानक पूरे कर यात्रा कर सकते हैं। केवल कोरोना के लक्षणवाले लोगों के पाज़िटिव रिपोर्ट आने पर चारधाम यात्रा की अनुमति नहीं होगी जब तक कि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव नहीं आ जाती। सामान्य जांच में कोरोना के लक्षण पाये जाने पर संबंधित जिला प्रशासन यात्री का कोविड-19 आरटी पीसीआर टेस्ट करवायेंगे। हेली काप्टर से आने वाले तीर्थयात्रियों को ई पास से छूट दी गयी है तथा हेली से दर्शन को पहुंचनेवाले तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य जांच की जिम्मेदारी संबंधित हेली कंपनी की होगी।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी.सिंह ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा 1 जुलाई से 2 अक्टूबर शाम तक 85785 ई -पास जारी किये जा चुके हैं। ई पास तीर्थ यात्रियों को उनके द्वारा सुझाई गयी तिथियों हेतु जारी किये गये है। ई पास लेकर तीर्थयात्री दर्शन को पहुंच रहे हैं। अभी चारों धामों में दर्शन हेतु आनेवाले तीर्थयात्रियों की संख्या बद्रीनाथ हेतु 1200, केदारनाथ हेतु 800, गंगोत्री हेतु 600 तथा यमुनोत्री हेतु 450 पूर्ववत सीमित रखी गयी है।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि अभी तक 46 हजार से अधिक तीर्थयात्री चारधाम दर्शन हेतु पहुंच गये है। कोरोना बचाव मानकों का पालन हो रहा है तथा चारधाम यात्रा सतत रूप से चल रही है।

पोर्टल प्रभारी संजय चमोली के अनुसार ई- पास के लिए श्रद्धालुओं द्वारा लगातार संपर्क किया जा रहा है तथा यात्रियों को उचित मार्गदर्शन किया जा रहा है।

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