अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति न उरायी कवि सम्मेलन

अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति न उरायी कवि सम्मेलन

देश अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति द्वारा कोरोना काल मा अपर राज्य केंद्रित ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रम  सृजन संसार क शुभारंभ बिहार राज्य बिटी शुरू करी कन दूसर कड़ी आयोजन बाबत उत्तराखंड तै न्यूते ग्यायी। यी साहित्यिक-सांस्कृतिक अनुष्ठान दिनांक 24 अक्टूबर ब्यखन बगत 2.30 से 3.45 बजे तक संपादित ह्वाई।संस्था क राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव जी न कार्यक्रम क अध्यक्षता करी। ये कार्यक्रम मा उत्तराखंड राज्य वरिष्ठ संस्कृति कर्मी श्री विमल बहुगुणा,श्री सुरेंद्र कुमार सैनी ,श्री नीरज नैथानी अर श्री राकेश जुगरान न प्रतिभाग करि।कार्यक्रम संचालन राकेश जुगरान द्वारा करे ग्यायी।
श्री विमल बहुगुणा न उत्तराखंड लोक संगीत नाटिका से जीवन तै सुख-दुख पर्याय बताण ह्वाल अंश प्रस्तुत करि-
“सुख का फूल,दुःख का कांडा,
जीवन मा आंदा अर जांदा,
सुखी त जून-सूरज भी नि रैनि,
ऊं पर भी ग्रहण लगी जांद।”

रुड़की वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेंद्र कुमार सैनी न मोहन अर राधा क अधूरे मिलन तै यूँ पंक्तियों मा व्यक्त करी-
“तुम्हारा प्यार भी देखो,अधूरा ही रहा मोहन,
मिलन राधा का तुमसे एक सपना ही रहा मोहन।

अपनी रचनाओं से देश विदेश मा सुर्खियां बटोरण ह्ववाळ साहित्यकार श्री नीरज नैथानी न
सामाजिक विसंगतियों,भ्रष्टाचार पर तंज करि कन ब्वाल कि-
“चींटियों की सभा आंसुओं से भरी थी,
व्यथा कुछ खोटी कुछ खरी थी।”

कार्यक्रम संचालन कन ह्वाल श्री राकेश जुगरान न बेहद समसामयिक व्यंग्य तै इन प्रस्तुत करी-
“जला कर चंद पुतले हमने समझा मर गया रावण,
हमारी आस्था के सामने यूँ डर गया रावण,
भरम टूटा हकीक़त जब हमारे सामने आई,
कि पिछली रात सीता का हरण फिर कर गया रावण।”
कार्यक्रम अध्यक्षता कन ह्वाल देश अग्रणी साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव जी न काम अर मोक्ष अंतर तै पाटी कन अपर मशहूर गीत प्रस्तुत किया-
“श्लोक अधर, मंत्र सी आंखें,
देवालय सा तन,
रामायण सा रूप तुम्हारा,
सांसें वृंदावन।”

कार्यक्रम अपर साहित्यिक उद्देश्यों सार्थकता दगड़ी संपन्न ह्वाई।

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