Thursday, September 23, 2021
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रामकिशोर साहू को सौंपी भाजपा ललितपुर की कमान

2019 लोकसभा चुनाव की जीत में समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहे थे रामकिशोर साहू

ललितपुर। वैसे तो रामकिशोर साहू काफी जाना-पहचाना नाम है। यही नहीं भाजपा के प्रदेश व क्षेत्रीय संगठन में भी उन्हें एक तरह से तुरूप का इक्का भी समझा जाता है। क्योंकि 2018 में उन्हें भाजपा ललितपुर का प्रभारी बनाया गया था, लेकिन उन्होंने 8-9 माह में ही अपने कुशल नेतृत्व, वाकपटुता एवं आनुसांगिक संगठनों पर मजबूत पकड़ और सफल सहयोग के साथ बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से सीधा सम्वाद स्थापित करके 2019 में झांसी-ललितपुर सीट से अनुराग शर्मा को बड़ी भारी जीत दर्ज करवायी थी। जिसमें ललितपुर जनपद से ही लगभग दो लाख वोटों से अनुराग शर्मा आगे रहे। उस समय समाचार पत्रों में उन्हें जीत का प्रमुख सूत्रधार, महानायक जैसी उपाधि से नवाजा गया था। अब विधानसभा चुनाव को लगभग 6 माह का समय बचा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की प्रत्येक सीटों पर अपनी नजर तेज रख रही है। खासतौर पर बुन्देलखण्ड की 19 विधानसभा सीटों पर उसकी पैनी नजर है।

वर्ष 2017 में भाजपा ने अन्य पार्टियों को धूल चटाकर सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। पिछले कुछ समय से ललितपुर भाजपा संगठन और कार्यकर्ता गुटबाजी का शिकार रहे हैं। ललितपुर में तो जमीन से जुड़े पुराने भाजपाई लगभग नदारत ही रहे और तो और प्रदेश व क्षेत्र में लोगों तक इसकी शिकायतें बड़ी तेजी से पहुंचाई जा रहीं हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव सिर पर देखते हुये और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के उद्देश्य से अपने तुरूप के इक्के रामकिशोर साहू को फिर से ललितपुर भाजपा की बागडोर सौंपी है और माना जा रहा है कि रामकिशोर साहू अपनी छवि के अनुरूप संगठन में जिले से लेकर बूथ तक अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कयास तो यह भी लगाये जा रहे हैं कि भाजपा टिकिट के लिए प्री मॉनीटरिंग करा रही है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व विभाग प्रचारक एवं वर्तमान में भाजपा कानपुर बुन्देलखण्ड के बेदाग छवि के महामंत्री रामकिशोर साहू को महती भूमिका दी गयी है। अब देखना है कि अरसे से नाराज कार्यकर्ताओं को वह किस हद तक सरकार की नीतियों के प्रचार-प्रसार में लगाकर वर्ष 2022 की बेतरणी पार कराते हैं।

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