तुम भुना त ठीकी ह्वालु ( गढवळी कविता)

तुम भुना त ठीकी ह्वालु….. “””””””””””””””””””””””””””””””””” मिता सारै रौ कि कैन त आण च क्वी त द्वार मोर ख्वाललू. ……..

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बीन नदी पुळ बणाणा मुख्यमंत्री घोषणा पर लगी गेन घूण, जन प्रतिनिधियों जरा रंगूड़ न खरे द्याव या नीम पत्ता ही डाल द्याव

साल 2018 मा थल नदी मा गिंदी कौथिग उर्यू छ्यायी, जगह जगह बिटी लोग गिंदी दिखणा खुणि कम, जलेबी चाख

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गढ़वळी साहित्य पढण ह्वाळू खुणि खुश खबरी, ’मन की गेंड़’ जणि कविता संग्रह बजार मा भी उपलब्ध

गढ़वळी साहित्य आज खूब फलणा फुलणा छ, आज गढविळ अब बोली ना बल्कण भाषा छ येकू बड़ू उदाहरण आज बगत

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