दान क बुल्यूं और आंवला खंयी बाद मां मिठ्ठी लगदी, जै गौं मा कुखड़ नी हुंदीन तै गौं मा रात नी खुल्दी,

दान क बुल्यूं और आंवला खंयी बाद मां मिठ्ठी लगदी। जै गौं मा कुखड़ नी हुंदीन तै गौं मा रात

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भोजन संबंधी गढ़वाली लोक कहावत आज का अर्थ मा

कुछ  भोजन संबंधी गढ़वळि कैपणि बोल (कहावत ) अजकाल यीं तरां से परयोग्याणा छन – १- खिचड़ी पकदी घीयक बरोळी

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