चैत चैत्वाळि का लोकार्पण

वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगमोहन सिंह रावत के गढ़वाली खण्डकाव्य चैता चैत्वाळि का लोकार्पण.

नई दिल्लीः 23 अगस्त, 2020 रविवार खुणि सुबेर 11.00 बजि रावत डिजिटल फेसबुक पेज परैं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का तत्वाधान म गढ़वाली एवं हिन्दी भाषा का वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगमोहन सिंह रावत की गढ़वाली खण्डकाव्य का चैतै चैत्वाळि को लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार एवं चितंक श्री पार्थसारथी थपलियाल, श्री मदन मोहन डुकलाण, श्री दिनेश ध्यानी, श्री आशीष सुन्दरियाल, श्री अनूप सिंह रावत अर श्री जगमोहन सिंह रावत का हाथोंन सम्पन्न ह्वे। श्री जगमोहन सिंह रावत की यां से पैलि पांच पुस्तं चार हिन्दी और एक गढ़वाळी मं प्रकाशित ह्वै चुकी गैन। श्री जगमोहन सिंह रावत वों विरला साहित्यकारों मदे छन जो नियमित तौर परैं रोज साहित्य सृजन करणा छन। गढ़वाली भाषा म श्री रावत जीन बारह महीनों का छः खण्ड काव्य लेखियलीन। जौं को प्रकाशन भौत जल्दी होलु। ये फागुण फिक्वळि का बाद दुसरि पोथि चैतै-चैत्वाळि चा। श्री जगमोहन सिंह रावत अपणा समय का वों साहित्यकारों सुमार छन जो दूर परदेश म रैंणा बाद बि गौं का ठेट शब्दों तैं अपणु लेेखन मा जगा देणान।

कार्यक्रम का संचालन कर्दा वरिष्ठ साहित्यकार अर उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक श्री दिनेश ध्यानी न बोलि कि श्री जगमोहन सिहं रावत द्वारा लिखित बाहर महीनों का खण्डाकाव्य अगर समग्र रूप से प्रकाशित करेजैन ता यो गढ़वाली भाषा को महाकाव्य चा। श्री जगमोहन सिंह रावत जीन भौत उत्कृष्ट अर छन्दबद्ध कविता लिखीं छन। वरिष्ठ लेखर अर चिंतक श्री पार्थ सारथी थपलियाल न बोलि कि श्री जगमोहन सिंह रावत दिल्ली जना महानगर म रैणा बावजूद वो अपणि जड़ों से जुड्यां छन अर लगातार साहित्य सेवा म रत छन। पिछले दिनों श्री रावत जी का स्वास्थ्य नासाज था लेकिन उन्हौंने साहित्य सृजन को रोका नही। श्री थपलियाल जीन बोलि कि श्री जगमोहन सिंह रावत को साहित्य परैं भोळ नै पीढ़ि का कतनै विद्यार्थी शोघ कारला यांका खातिर एक समग्र संग्रह का रूपम यीं पोथि तैं समणि औण चैंद।

वरिष्ठ साहित्यकार अर चिट्ठी पत्री का संपादक श्री मदन मोहन डुकलाण न अर श्री आशीष सुन्दरियालन बि श्री जगमोहन सिंह रावत तैं बधै देन अर वों का द्वारा गढ़वाळी भाषा तैं अगनै बढौणा खातिर सदन्नि यन्नि प्रयास होणा राला यनि कामना कैरि।

जगमोहन सिंह रावत की चैतै चैत्वाळि खण्डकाव्य का प्रकाशन परैं बधै देण वळों म वरिष्ठ भाषाविद़ री रमाकांत बेंजवाल, वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती बीना बेेंजवाल, श्री ललित केशवान, श्री विश्वेश्वर दत्त सिलसवाल अर श्री दर्शन सिंह रावत, श्री वीरेन्द्र जुयाल उपरि, श्रीमती रामेश्वरी नादान समेत कै साहित्यकारों न अपणि शुभकामना औन लाईन प्रदान करीन।
कार्यक्रम म कुमाउनी एवं गढ़वाली क साहित्यकार श्री रमेश हितैषी न भी श्री जगमोहन सिंह रावत तैं चैता चैत्वाळि पोथि को प्रकाशन हेतु बधाई देन। अर निरन्तर साहित्य सेवा में रत रैण कि कामना कैरि। रावत डिजिटल के प्रकाशक श्री अनूप सिंह रावत न भी बोलि कि श्री जगमोहन सिंह रावत जी एक मधुर स्वभाव का मनखि छन। श्री जगमोहन सिंह रावत जी की पुस्तकों को प्रकाशन करणु भी रावत डिजिटल खुणि सौभाग्य की बात चा।

अन्त म श्री जगमोहन सिंह रावत न बोलि कि मैं तैं मांॅ सरस्वती और अपणा पितृों को ही आर्शीवाद लगदा कि मैं यनु साहित्य सृजन कैरि सकणों छौं । श्री रावत जीन बोलि कि मैन सिरप प्रयास कैरि लेकिन कैन कै अदृश्य शक्ति को जरूर मैं तैं आर्शीवाद चा, किलैकि जब मैं कलम चलांदु ता शब्द अपणा आप निकळि जंदन। अर मेरी रचना आकार ल्हेणी रंदन। तब मैं तैं ही खुद अपणि रचना पढ़णा बाद लगदा कि भौत भलि लिखेगे। श्री जगमोहन सिंह रावत न बोलि कि मेरू परिवार अर वरिष्ठ साहित्यकारों को साथ मिलणु भी एक सुखद अनुभव चा। परिवार को सहयोग से ही क्वी बि साहित्यकार कुछ लेखि सकदा। अन्त में श्री जगमोहन सिंह रावत ने सभी मेहमानों, दर्शकों एवं रावत डिजिटल टीम का आभार व्यक्त किया।

उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच विगत वर्ष 2012 बिटिन दिल्ली एनसीआर अर उत्तराखण्ड म बि गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं का प्रचार, प्रसार का वास्ता कार्य करणों चा। नौन्याळों तैं गढ़वाळी, कुमाउनी सिखाणा कक्षाओं को आयोजन हो चा महाकवि कन्हैया लाल डं़डरियाल साहित्य सम्मान हो या गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शािमल करणा भाषा आन्दोलन को या दिल्ली दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं की अकादमी को गठन हो उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच लगातार प्रयासरत चा। कोरोना काल म बि मंचन डिजिटल माध्यम से विभिन्न पोर्टलों का माध्यम से भाषा, साहित्या की बात लगातार रखदा आणों।

उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंचा संरक्षक डाॅ विनोद बछेती को सहयोग अर श्री अनित पन्त को मार्गदर्शन मंच तैं लगातार मिलणों चा। तभी मंच लगातार यना आयोजन करणों चा।

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