छिबड़डाट

शैरू भटि घौर ऐकि.
द्वी दिनों कु घपरौल कैकि
भितरौ ठमट्याट कैकि
सुन सान गौमा कैरि जन्दिन.
परदेशी छिबडाट…………
गौ बजारू मा भीड कैकि.
धारा पन्देरि मा सेल्फ़ि लेकि.
वाडा मीन्डा जपकै जपकैकि.
गौ गालौ हकरौल लगैकि.
द्वी दिन कु घार ऐकि
कैर जन्दी परदेशी छिबडाट…….
सभ्यता संस्कृति कु भात बणैकि
हिन्दी अंग्रेजी घुसै घुसै की.
बोलि भाषा की थिचोणि बणैकि.
सुधार कम बिगाड जादा कैकि.
कैरि जन्दी परदेशी छिबडाट….
अपणि कूडि खन्द्वार कैकि
दुसरौ भितरौ खूब खैकि.
गौ गालौ आनंद लेकि.
शहरी हूणौ रौब दिखैकि.
रीति फ़ुट्याण दिखै दिखै की.
आजाद पहाडू हवा पाणि पेकि.
ली जन्दीन दगड समलौण
कुछ हैसि कुछ असधरि लेकि
चल जन्दी परदेशी.
कैरि गौ मा छिबडाट………
सन्दीप गढ्वाली ©®

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