देहरादून किलै छ्यायी पैल, अंग्रेजू अर आजादी बाद सेवानिवृत्त लोगू पैल पंसद, जाणो पूरण देहरादूण कन छ्यायी

उत्तराखण्ड वेनिस बुले जाण ह्वाळ देहरादून अपण बगद पाणी अर हर भर जंगळ कुणी जणे जांद छ्यायी। आज हम देहरादून क वै पुरण बगत से तुम तै परिचय कराणा छवां। आज देहरादूण मा अब भले ही बडी बड़ी बिल्डिंग सड़क नजर आणी छन, लेकिन आज से द्वी ढाई दशक पैल यन नी च। देहरादून नस मा पैल पाणी ना बलकण जिंदगी दौड़दी छेयी। बगत बदली अर येक दगड़ी बदलण लगी ग्यायी शहर रहन सहन अर मिजाल। साल 2000 मा अस्थायी राजधानी बणन क बाद आज ये दौर मा यख बगण ह्वाळ नहर अब सड़क मा बदली गेन। आज बस देहरादून मा उ सूकून जू कब्बी जणे जांद छ्यायी सै सै मा करीकन बिरणू हूणा।
इलाहाबाद बैंक बटी सेवानिवृत्त एमएल कण्डवाळ न बतै कि अवैज्ञानिक ढंग से विकास की सोच सदनी विनाश तै न्यूते करदू, यनी कुच्छ देहरादून की यीं सुंदर रमणीय घाटी दगड़ी ह्वायी। विकास की यीं काणी दौड़ मा शामिल ह्वेकन जख देहरादून न अपणी सुंदरता तै ख्वायी वखी जै चीज कारण कब्बी देहरादून शहर तै जणे जांद छ्यायी उ छे नहर जू अब कखी दिख्याणा कुणी भी नी मिलणा छन। कब्बी देहरादून की यी नहर जौ कारण बासमती की खेती, लीची, अर आम बगीचा साग बुज्जी, पैदा हूंदी छेयी, वखी यखखी आवो हवा तन मन बदन तै सुकून क अहसास करांद छेयी। वै बगत देहरादून मा खूब नहर हूण से दून कुणी उत्तराखण्ड क वेनिस भी बुलें जांद छ्यायी। जगह जगह बटी निकळण ह्वाळ नैहर शहर क अलग अलग हिस्सों मा काश्तकारू क पुंगड़ तकन पाणी पौंछाण काम करदी छेयी। बरसात मा यूं नहर कारण शहर मा पाणी भरयाणा की दिक्कत नी हूंद छेयी। आज जै कुणी ईसी (ईस्ट कैनाल) रोड़ बुले जंदीन, उ कब्बी नहर दगड़ा दगड़ी चलदी छेयी अर वै पन कत्ती घट्ट बण्या छ्यायी। लोग यूं नहर से खेती की सिचैं, प्याण पाणी कुणी उपयोग करद छ्यायी। यनी कब्बी देहरादून धड़कन बुले जाण ह्वाळ वेस्ट कैनाल रोड़ जीएमएस रोड़ दगड़ा दगड़ी बगती छेयी। लेकिन द्वी दशक पैल खासकरी कन उत्तराखण्ड बणन बाद अर अस्थायी राजधानी बाद एक- एक करी कन नहरू तै जमीन तळ करी कन उंक जिकुड़ी मा सड़कू डाम घरी देन। जैक नतीजू या च कि जरा बरखा ह्वे ना अर शहर अर सड़क पाणी न लबालब भरे जै करदन।


अंग्रेजू क पंसदीदा शहर छ्यायी दून
अंग्रेजू तै दूनघाटी भौत सुंहादी छेयी। बुल्दन कि उ देहरादून शहर तै लंदन जणी विकसित कन चांद छ्यायी जै कारण दून क मौसम बौत सुहाना अर सुंदर छ्यायी। जख कब्बी जेठ मैना तड़तड़ू घाम मा भी घाम पता नी लगदू छ्यायी, बरखा कब्ब ह्वे जाव कुच्छ पता नी चलदू छ्यायी जै कारण यख गर्मी तकन महसूस नी हूंद छ्यायी। ये कारण देहरादून पाणी की इथगा ज्यादा हूंद छ्यायी कि कब्बी भी मौसम गर्म नी ह्वे पांद छ्यायी। दून की सबसे बड़ी नहहर ईस्ट अर वैस्ट कैनाल लोगू तै पीण पाणी तै दिलांदी छेयी बलकण ये पाणी से सिंचे बासमाती अर लीची की करी कन येकी खुशबू देश- दुन्या तै अपण तरफ खींचदी छेयी।

जमीन तळ पाणी पर बढद जरूरत
आज हालात या छन कि देहरादून जीवन रेखा नहर या त खत्म ह्वे गेन या खतम हूण पर अयां छन। शहर द्वी जणी मणी नदी आज गंदू नाळा मा बदल गेन। पूर देहरादून शहर की तीस बुझाण क सारू अब जमीन तळ पाणी पर च। जैक नतीजू यी ह्वाणा कि यखक जमीन पाणी होर उंद उंद जाणा अर खत्म हूंद जाणा। चरी तरफ पक्क रस्ता, सड़कं कंकरीट बड़ी बड़ी इमारत, बणू कटान, कारण बरखा पाणी सब्ब एेंछ ही एेंछ बगी जांद, जै कारण जमीन तळ पाणी नी जै पांद अर उ रीचार्ज नी हूंद। खानू बटी लगातार चूना खणन कारण पाणी स्तर पन फरक पड़नू। पैल यख यू पाणी जलीय चट्टान तरां काम करदू छ्यायी, लेकिन अब पाणी मा चूना की मात्रा इथगा ह्वे गे कि पथरी शिकैत यख रैवास्यूं मा आम बात ह्वे ग्यायी।


देहरादून की यी छेयी खास खास नहरः-
राजपुर नहरः दून की सबसे पुरणी नहर, जैतै बणाण पैल श्रेय पृथ्वीपति शाह की माता रानी कर्णावती तै जांद। इतिहासकार साल 1820 की शुरुआत मा यी नहर की रेख-देख क जिम्मा गुरु राम राय दरबार साहिब संभाळी फिर साल 1874 मा इतिहासकार विलियम्स लिखद ं कि राजपुर नहर क पुनरुद्धार साल 1840 मा सर कौटली न करवायी। नहर क सोत रिस्पना नदी पर हत्थ की क्रेन पूली क बैराज बण्यूं च। ये पर लखड़ क म्वाट म्वाट तखत लग्यां छन या नहर खासकरी कन पीण क पाणी काम आंदी छेयी, वैक बाद फिर या सिचैंं काम आणी लगी। 36 किमी लंबी यी नहर बटी राजपुर, देहरा, धर्मपुर, कारगी ग्रांट, अजबपुर कलां, अजबपुर खुर्द अर बंजारावाला तकन पाणी पौंछये जांद छ्यायी।

बीजापुर नहरः बीजापुर ज्वा अजों राजभवन अर मुख्यमंत्री आवास से जणे जांद, वै दौर मा टोंस नदी क पाणी शहर रैवासियू कुणी पौंछद छ्यायी। 1841 मा बीजापुर कैनाल नाम से बणी 47 किमी लंबी यी नहर बटी बीजापुर, कौलागढ़, बनियावाला, शुक्लापुर, अंबीवाला, रांगड़वाला, आर्केडिया ग्रांट, मोहनपुर ग्रांट यूं जगहू तै पाणी मिलदू छ्यायी। गढ़ीचौक पर या नहर द्वी हिस्सों मा बंटै कन कौलागढ़ नहर अर कांवली नहर नाम से जणे जांद छेयी। कौलागढ़ बटी निकळण ह्वाळी नहर प्रेमनगर टी-स्टेट तकन जांदी छेयी त कांवली नहर शिमला बाइपास क पैथर पुगंड़ मा निकळदी छेयी।

खलंगा नहरः दून की सबसे पुरणी नहरू मननं सौंग नदी बटी निकळण ह्वाळी खलंगा नहर च। या साल 1860 मा बणन शुरू ह्वायी। सौ किमी लंबी या नहर मालदेवता बटी शुरू ह्वेकन केशरवाला, किद्दूवाला अर रायपुर इलकू मा खेती सिंचैं खातिर काम आंदी छेयी। रायपुर बटी नथुवावाला ऐथर या नहर नकरौंदा अर बालावाला इलकू मा बगी कन पौछी कन सिचैं करदी छेयी या एक अंडरग्राउंड नहर छेयी, जै तै मालदेवता समणी दिखे जै सकदी। यनी देहरादून मा 0जाखन नहर 1863 मा बणी अर या 31 किमी लंबी या नहर जाखन नदी क पाणी तै जाखन अर रानी पोखरी क इलकू मा पौंछये जांद छ्यायी।

धर्मपुर नहरः रिस्पना नदी बटी निकळण ह्वाळी या नहर ईस्ट कैनाल नाम से भी जणे जांद। या बारीघाट, दर्शनलाल चौक, नैनी बेकरी, बंगाली कोठी से ऐथर ऐकन पुंगड़यू मा मिली जांदी छेयी। यी नहर की नाम दगड़ी चलण ह्वाळी सड़क कुणी ईसी रोड बुले जांद। यी नहर बळी एक छ्वटी नहर धर्मपुर मा बदरीपुर नहर बटी कटण ह्वाळी छ्वटी छोटी नहर मा मिलदी छेयी। यख बटी रेसकोर्स, चंद्रनगर ह्वे कन हरिद्वार रोड पौंछीकन कारगी नहर नौं से जणें जांद छेयी अर बंजारावाला क पुगंड़ी मा मिलदी छेयी।

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