सब्बि बुना राजधानी गैरसैण, आखिर सवाल या छ कि वख कैन रैण, जणी कवितौ बयार चली धाद लोकभाषा एकांश  काव्य गोष्ठी मा

सब्बि बुना राजधानी गैरसैण, आखिर सवाल या छ कि वख कैन रैण, जणी कवितौ बयार चली धाद लोकभाषा एकांश  काव्य गोष्ठी मा

धाद संस्था लोकभाषा एकांश कवि हर मैना मा दूसर इतवार दिन काव्य गोष्टी आयोजन करदन। भाषा अर सामाजिक सरोकारों पर सब्बि खुली कन विचार विमर्श करदन। एक दगड़ी नै लोकभाषा लिख्वारौ तै यख कविता लिखण,समझण,अर काव्य पाठ कना खुल मंच मिले करदू। धाद लोकभाषा आज काव्य गोष्ठि धाद कार्यालय देहरादून मा उरये ग्यायी। कार्यक्रम अध्यक्षता लोकभाषा एकांश अध्यक्ष बीना कंडारी करी, अर काव्य पाठ छांटी निरळी रमाकांत बेंजवाल जी न करी।

आज काव्य पाठ संचालन मधुरवादिनी तिवारी न करि।
आज वीर रस कवि बलवीर सिंह राणा ” अडिग” जी न “खुद” अर गजल हर फजल नै सूणे कन खूब ताली बटोरिन। वखि लक्ष्मण सिंह रावत न अपरि कविता माध्यम से विधवा जीवन खैरी बते। हरीश कंडवाल मनखी गैरसैण राजधानी पर आजकल राजनीति पर ” सब्बि बुलणा राजधानी गैरसैंण, पर सवाल या छ कि वख कैन रैण। वखि शांति अमोली बिंजोला न सुपन्या पर वाह वाही लूटी। वरिष्ठ कवियत्री सुमित्रा जुगलान न कविता माध्यम से भ्रष्टाचार पर तंज कसी। मधुरवादिनी तिवारी न अपरि कविता पैंछू सुणायी, जैमा ठेठ पहाड़ शब्द गंठखोल जणी शब्द कि सुंदर चर्चा अर व्याख्या सब्यूँ न करि। गीतांग सुरेश स्नेही न चल उठ भुला तेरी खैरी भोळ जरूर ह्वेली। आखिर मा बीना कंडारी न अपरि अध्यक्षीय कविता ढाकर खांकर सुणे कन काव्य पाठ तै विराम द्याय।
आज कवि गोष्ठी मा धाद लोकभाषा एकांश सर्वश्री रमाकांत बेंजवाल, सुमित्रा जुगलान, बीना कंडारी, शांति बिंजोला अमोली, मधुरवादिनी तिवारी, बलवीर सिंह राणा, “अडिग” लक्ष्मण सिंह रावत सुरेश स्नेही अर हरीश कंडवाल “मनखी” उपस्थित छ्यायी।

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