उत्तराखंड क ये गांव मा डोली मा न बल्कन घोड़ा मा बैठी कन हूंद ब्यौली की विदाई, ये पैथर या च रोचक बात

भारत क ये गांव मा ब्योली की विदाई की अनोखी परंपरा अपणये जांद । यख ब्यौली की विदाई डोली मा ना बल्कन घोड़ा मा करे जांद । हाँजी जरा सुणन मा त सुणन मा अटपटू जरूर लगल, लेकिन यी सच च। दरअसल, उत्तराखंड क चमोली क बाण गांव क लाटू मंदिर आज भी श्रद्धालुओं कुनी रहस्य बन्यू च। ये मंदिर क भीतर क्या च , आज भी क्वी ये बाबत नि जणदू । यी इन पैल मंदिर च, जैक भीतर क्वी भी श्रद्धालु प्रवेश नि करदू। लाटू को मां नंदा (देवी पार्वती) क धर्म भाई मने जांद ।वांण गांव की एक होर विशेष परंपरा च। ग्रामीण मां नंदा देवी तै डोली मा बिठे कन श्री नंदा देवी राजजात यात्रा मा कैलाश ली जे करदन, ये कुणी अपनी आराध्य मां नंदा क सम्मान मा ग्रामीण अपरी बेटियू क ब्यो मा ब्यौली तै डोली क बजाय घोड़ा मा बिठेकन विदा करदन। देवाल ब्लाक मा समुद्रतल से साढे़ आठ हजार फीट की ऊंके पर ब्लाक क आख़िरी गांव वांण से करीब 800 मीटर दूर स्थित च लाटू देवता का मंदिर। बुले जांद एक बार मां नंदा क दर्शन बाबत कन्नौज क गौड़ ब्राह्मण लाटू कैलाश पर्वत की यात्रा कना छ्यायी । उ वाण गांव पौछीन। ये दौरान उते भौत बड़ी तीस लगी छेयी त उन समणी मा एक घर मा गेन वख रण ह्वाल जननी मनन पीण क पाणी मांगी। जननी न बतायी कि उकी कुटिया मा तीन घड़ धर्या छन। यू मनन एक घड़ मा पाणी च, वे मनन पाणी पी लें, लेकिन लाटू ब्राह्मण भूलवश पाणी क घड़ की जगह दूसर घड़े मा रखयूं मदिरा त पे गेन।

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अपर।ये कृत्य से लाटू ब्राह्मण दुखी ह्वेन अर तब उन अपरी जीभ काट दयायि। बुले जांद कि यी घटना क बाद मां नंदा देवी न सूपिन मा लाटू ब्राह्मण तै दर्शन देन। उन लाटू ब्राह्मण कुणी ब्वाल कि वाण बटी एथर हिमालयी नंदा देवी राजजात यात्रा मा उ उक धर्म भाई बणीकन यात्रा क बाट बताल। तब बटे लाटू देवता बारह वर्षों मा उरयांण ह्वाल नंदा देवी राजजात यात्रा की अगुवाई करदन । वांण क लाटू देवता मंदिर मा क्वी भी श्रद्धालु प्रवेश नि कर सकदन । पुजारी भी आंख पर पट्टी बांधकर दीया जलेकन पूजा करदन। मान्यताओं क अनुसार लाटू देवता मंदिर क अंदर नागराज मणि क दगड़ी प्रवास करदिन अर नागमणि तै क्वी देख नि सकदन । हालांकि ये रहस्य बटी आज तकन पर्दा नी उठी साकी कि लाटू देवता मंदिर क भीतर क्या च।

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