‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ से आर्थिकी संवरी और मनोबल भी, उत्तराखंड के इन युवाओं ने कहा थैंक्यू CM सहाब

चमोली। प्रदेश में संचालित हो रही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना युवाओं को किस तरह से आत्मनिर्भर बना रही है, सीमांत जनपद चमोली में भी इसकी बानगी देखने को मिली है। कई युवाओं ने इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाया तो उनके लिए यह संजीवनी साबित हुई। आज उनकी न सिर्फ आर्थिकी संवर गई है बल्कि मनोबल भी ऊंचा हो गया। चमोली जनपद के ऐसे ही तीन युवाओं से आपको रूबरू कराते हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और लॉकडाउन की विकट परिस्थितियों को जबरदस्त मात दी। आज वह अच्छा कारोबार कर रहे हैं और क्षेत्र में अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुके हैं।

जनपद चमोली के विकासखंड नारायणबगड़ का एक छोटा सा गांव है किलोंडी। यहां के 28 वर्षीय संदीप सिंह सजवान हरिद्वार में एक होटल में काम करते थे। लेकिन कोरोना काल में नौकरी छूटी, और वह अपने घर लौट आए। माली हालत भी ऐसी नहीं थी खाली बैठकर या सरकार को कोसते हुए ही काम चल जाए। और सच कहें तो खाली बैठना संदीप जैसों की फितरत में भी नहीं होता। मेहनतकश इस युवा ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर गोपेश्वर हल्द्वापानी में मसालों का कारोबार शुरू किया। और आज उनकी स्थिति पूरी तरह से व्यवस्थित हो गई है। हल्दापानी में देवभूमि मसाला नाम से वह धनिया, मिर्च, हल्दी पाउडर तथा गरम मसाला तैयार कर उसकी अच्छी ब्रान्डिंग और पैकिंग के साथ मार्केट में बेच रहे है। बदले हालातों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जताया है।

खैनोली गांव निवासी गौरव सिंह रावत की उम्र अभी 30 वर्ष है। पहले वह दिल्ली में एक होटल में काम करते थे, जहां रात दिन की मेहनत के बाद उन्हें 18 हजार रुपये मिलते थे। कोरोना महामारी में लाॅकडाउन हुआ और वह बेरोजगार हो गए। घर आए तो क्या किया जाए वाली स्थितियां थी। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के बारे में पता चला। और उन्होंने तुरंत ऋण लेकर गोपेश्वर बाजार में अपनी स्पोटर्स वियर शॉप नाम से ट्रैक शूट तैयार करने का काम शुरू किया। आज इस कारोबार से वह करीब 35 हजार तक मासिक कमा रहे है। स्वरोजगार के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराने पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

घाट ब्लाक के चरी गांव निवासी विनय सिंह बताते है वे दिल्ली में एक पार्टी कार्यालय में टेलीफोन ऑपरेंटर थे। कोरोना काल में नौकरी छूटी तो घर लौट आए। घर की सारी जिम्मेदारी उन पर थी। ऐसे में खाली बैठना तो खुद को मारने जैसा था। विनय मेहनतकश जज्बा हैं ही आर्थिक मुश्किलों में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना हौसला दिया, और उन्होंने भानू गारंमेट नाम से रेडमेट गारमेंट का काम शुरू किया। एक अन्य व्यक्ति को भी उन्होंने अपने काम से जोड़कर रोजगार दिया। आज आर्थिकी पूरी तरह से पटरी पर है और जिंदगी भी।

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