रंत रैबार चौथी वर्षगॉठ पर सब्बी सम्मानित पाठकौं बाबत धन्यवाद प्रस्ताव

रंत रैबार सब्बा पाठकौं तै यी बताण मा बौत खुशी हूण छ कि आज रंत रैबार न अपर पूर तीन साल करी येन। आज बिटी रंत रैबार चौथ साल मा प्रवेश कनू। रंत रैबार शुरूवात वरिष्ठ पत्रकार श्री अमित अमोली जी न करी। एक दिन मित्र अमित अमोली जी फोन आयी कि मि एक गढवाळी न्यूज वेब पोर्टल चलाण चाणू छौं, लेकिन क्वी इन बतौ कि क्वी गढवाळी मा समाचार लेखी द्याव। ये बाबत हमरी लम्बी चर्चा ह्वायी, तब फिर मील ब्वाल कि गढवाळी मा त लेखी द्योल पर आज तकन मील खबर कभी नी लेखी, अर ना मि ज्यादा जणदू ऑन लाईन खबर बाबत। तब उन ब्वाल कि बस आप लेखी द्याव बकै मी सम्भाळी द्योल। फिर मील हिंदी मा एक लेख उ कुणी मेल करी, उन तुरंत ओपीनियन पावर मा छापी द्यायी। वैक बाद हमुन शुरूवात करी। शुरूवात मा बौत मुश्किल आयी, लेकिन धीरे धीरे पाठकौ प्यार मिलद ग्यायी। ंशुस्वात मा जब एक दिन मा 50 पाठक ऐन वै दिन हमन खूब खुशी मणै, ये बीच हम तै बौत लोगू सहयोग करी। शुरूवाती दौर मा हमर दगड़ श्री मनोज भट्ट गढवाळी सहयोग मिली, श्री देवेश आदमी, श्रीमती अंवतिक अमोली, श्रीमती सिमरन सुयाल कंडवाल श्री वीरेन्द्र जुयाल जी अर अन्या गढवाळी साहित्यकारों न हमतै सहयोग करी। ये रंत रैबार तै ऐथर बढाण मा सबसे ज्यादा प्रयास अर मेहनत श्री अमित अमोली जी क छ, जू दिन रात टैक्नीकल समस्याओं तै दूर कना रै करदन।

      ये दगड़ी सब्बी पाठकगण जौ बगैर रंत रैबार कल्पना भी न कर सक्यांद, आज उंक प्यार बदौलत हम पीछल तीन साल मा 20 लाख से ज्यादा पाठक बणौण मा कामयाब हुआं। वखि अजों तकन 8 हजार लोगून गूगल पर जैकन रंरत रैबार तै ख्वाजी। एक बगत उ छ्यायी जब रंत रैबार समूज शुरूवात मा 50 पाठक एक दिन मा लाण मा खुश ह्वे छ्यायी आज हम लोग तै यी बात तै बतौण मा खुशी हूणा कि हम पीछल चार मैना बिटी 60 हजार से ज्यादा पाठक हर मैना लाण मा कामयाब ह्वे ग्यवां। एक दूधबोली मा लिखयां समाचारौं तै जनमानल यू प्यार मिलण अफु मा खुशी बात छ। आप लोगू प्यार इनी बण्यू राव, अर आपक सुझाव हम तै मिलणा राव त हम अपरी दूधबोली अर गढवाळी भाषौ तै होर अगड़ी मजबूत कना प्रयास करला। आज रंत रैबार एकमात्र गढवाळी वेब न्यूज पोर्टल छ,जू हिंदी भाषा दगड़ा दगड़ी हिटणा छ।

हरीश कंडवाल मनखी कलम बिटी ।

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