दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी की पैलि बैठक

दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी की पैलि बैठक।

नै दिल्ली 7 नवम्बर, 2019 खुणि दिल्ली सचिवालय म उप-मुख्यमंत्री मनीषी सिसौदिया कि अध्यक्षता म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी की पैलि बैठक छै। यीं बैठक म अकादमी का उपाध्यक्ष जनकवि अर लोग गायक श्री हीरा सिंह राणा जी, दिल्ली प्रदेश आप पार्टी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ का चेयरमैन बृजमोहन उपे्रती समेत सब्बि नै नवाण सदस्यों न शिरकत कैरि। डाॅत्र जीतराम भट्ट जी को योगदान बि ये कारिज म अहम चा। सरकारन अज्यों सचिव अर संचालन की पूरी जिम्मेदारी डाॅ. भट्ट जी तैं हि दियीं चा। य हमरि भाषाओं का वास्ता भलि बात चा। उम्मेद चा कि विद्वत लोगों का सानिघ्य म हमरि भाषाओं को सुगम विकास होलु।

जन कि आप जणदन छन कि दिल्ली सरकारन विगत म दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषा अकादमी की घोषणा कै छै। तब तलक सब्यों तैं लगणों छौ कि सैद य सिरप चुनावी घोषणा चा लेकिन ब्याळि अकादमी की विधिवत बैठक, द्वी करोड़ बजट अर औण वळा कार्यक्रमों परैं गभंीर चर्चा यीं बातौ संकेत देंदा कि अकादमी भौत मुस्तैदी से अगनै काम कना मोड़ म ऐगे।

यीं बैठका बिटिन जो सन्देश ऐ वै लगदा कि दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं का विकास अर प्रचार, प्रसार का वास्ता भौत कुछ यों लोगों न स्वच्यों अर विचर्यों चा। सुणण ऐ कि दिल्ली म जल्दी हि उत्तराखण्ड उत्सव को द्वी दिना आयोजन दिल्ली का दिल कनाट प्लेस म होलु। साहित्य सृजन कन वळा साहित्यकारों तैं प्रोत्साहन देणा वास्ता अर वोंकि साहित्य सेवा तैं सम्मान देणा का वास्ता दिल्ली म अनेकों सम्मान देलि। य भौत भलि पहल चा। गणतंत्र दिवसा अवसर परैं बल दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं को कवि सम्मेलन बि आयोजित करे जालु। वांका अतिरिक्त अकादमी दिल्ली म लगभग पन्द्रा जगों गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं तैं सिखाणा खातिर सैण्टरों को संचालन कारलि। यी सब पहल स्वागत योग्य छन। अपणा पैलि बैठक म म हि अकादमी इथगा गैरे से स्वचणी चा अर हर क्षेत्र म काम कना विचार ल्हेकि अगनै बढ़णी चा।

गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं तैं सिखाणा खातिर विषय परैं हम यु बनु चंदन कि दिल्ली म वर्ष 2016 बिटिन उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंचा,दिल्ली पैरामेडिकल एन्ड मैनेजमेंट इंस्टीट्यटू क तत्वाधान म लगभग पच्चीस, तीस सैण्टरों म गरमियों की छुट्टियों म नौन्याळों तैं गढ़वाळी, कुमाउनी भाषा सिखाणा खातिर कक्षाओं को आयोजन कना छंवा। हौरि कै संगठन बि अपणा स्तर परैं यनु प्रयास कना छन। अगनै बि हमरू प्रयास चा कि यीं दिशा म भौत कुछ होण। गढ़वाळी कक्षाओं को पाठ्क्रम वरिष्ठ साहित्यकार, भाषाविद् स्वर्गीय भगवती प्रसाद नौटियाल जी न बणयों चा जै का आधार परैं हम दिल्ली एनसीआर म पढ़ौणा छंवा।

कुमाउनी को पाठ्क्रम वरिष्ठ साहित्यकार श्री पूरन चन्द्र काण्डपाल जी न बणयों चा। काण्डपाल जी की एक पुस्तक ये वास्ता अनुकरण्ीय चा। गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषा अकादमी से हमरू यु निवेदन चा कि अगर आप लोगों तैं असुविधा न हो ता दिल्ली एनसीआर म संयुक्त रूपम यों भाषाओं की कक्षाओं को आयोजन करे जै सकेंद। जैसे भलु सन्देश जालु अर नौन्याळों तैं बि सुगमता अर सुचारू रूप से पाठ्क्रम पढये जा साक।
हमरू यु सिरप एक सुझाव चा। क्वी यीं बात तैं अन्यथा नि ल्या। किलै कि हमरा समाज म य बात भौत दिखण म औंद कि जरसि कुछ बोला तो लोग बात को बतंगड़ बणौणम देर नि कर्दा। यी बात हमरि अकादमी का गठन का बाद देखण ऐ। तब हमरू यी निवेदन छौ कि यों सदस्यों को दगड़ि द्वी चार वरिष्ठ साहित्यकार बि यीं अकादमी म होंदा ता भाषा साहित्या या कंठी माळा हौरि बि भलि अर मायादार लगदी। पण हमरि बात तैं कुछ लेागोंन अकादमी विरोधी करार दे। जबकि हमुन हि यु आन्दोलन दिल्ली म शुरू कै छौ। अमणि बि अकादमी का वास्ता सौब से पैलि ज्ञापन मेरा हि हस्ताक्षरों से दिल्ली सरकार तैं दिये गे छौ। लेकिन ये कारिज म हम सब्यों को योगदान चा। अर विशेष हम दिल्ली प्रदेश आप पार्टी अर सरकार तैं बधै देण चंदन कि आपन यी बात परैं संज्ञान ल्हे। आप का तमाम कार्यकर्ता अर नेतों समेत सब्या संगठन चा वो उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच होे, उत्तराखण्ड एकता मंच हो, उत्तराखण्ड लोक मंच हो, गढवाळ हितैषिणी सभा हो या हौरि बि क्वी संगठन या मनखि होवन सब्यों को सामुहिक योगदान भुले नि सकेंदु।


पुनः एक दौं सब्बि सदस्यों तैं बधै अर शुभकामना कि आप लोग सै दिशा म अगनै बढणां छन अर उम्मेद कर्दां कि आप लोगों को यो भगीरथ प्रयास औण वळा दिनों म उत्तराखण्ड सरकार का वास्ता बि एक सीख होलु कि उत्तराखण्ड म ता यों बीस सालों म अपणि भाषा, संस्कृति अर सरोकारों तैं किनरा परैं धरे गे। भैने वळों की खूब मौज अर बाकी आन्दोलनकारी, शहीदों का परिजन अर आम जनता जन्या तन्नि चा। लेकिन दिल्ली सरकारन ऐतिहासिक पहल कैरि अर वीं पहल का प्रतिफल अमणि जमीन परैं दिखेणों। जग्वाळ चा ता यीं बाता चा कि औण वळु समय म हम लोग अपणि भाषा, संस्कृति अर जन सरोकारों तैं कतगा अगनै अर कनु तरीका से ल्हिजंदौ। आशा चा कि गढ़वाळी, कुमाउनी, जौनसारी भाषा अकादमी नै इतिहास बणाली अर सर्वसमाज का वास्ता काम कारलि। पुनः एक दौं शुभकामनाओं का दगड़ि।

रिपोर्टर दिनेश ध्यानी वरिष्ठ साहित्यकार दिल्ली बिटी।

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