दिल्ली म पैलु गढ़वाळी, कुमाउनी अर जौनसारी भाषा को राष्टी्रय कवि सम्मेलन सम्पन्न

गणतंत्र दिवसै पूर्व संध्या परैं गढ़वाळी, कुमाउनी अर जौनसारी भाषा अकादमी द्वारा
दिल्ली म पैलु गढ़वाळी, कुमाउनी अर जौनसारी भाषा को राष्टी्रय कवि सम्मेलन सम्पन्न।

  1. दिनेश ध्यानी

नै दिल्ली, ऐतवार, 19 जनवरी, 2020 खुणि 11.00 बजि बिटिन द्वफरा 2.30 बजि तलक संस्कृत अकादमी सभागार म गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी द्वारा आहूत ऐतिहासिक गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी कवि सम्मेलन भौत मयळु अर सिजळु माहौल म सम्पन्न ह्वै। गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी का विद्वान सचिव डाॅ जीतराम भट्ट जी का अथक प्रयासों से हमरि भाषाओं की अकादमी अस्तित्व म ऐन। अर वोंका ही प्रयासों से अमणि यो ऐतिहासिक क्षण हमरा समाजा खुणि छौ। स्वयं डाॅ जीतराम भट्ट जीन बोलि कि यो क्षण हमरि भाषाओं खुणि अर हमरा समाजा खुणि ऐतिहासिक चा। वोंन बोलि कि उत्तराखण्ड म हमरि गढ़वाळी, कुमाउनी अर जौनसारी भाषाओं तैं द्वितीय भाषाओं को दर्जा मिलण चयेंद। अर संविधानै आठवीं अनुसूची म हमरि भाषाओं तैं स्थान बि मिलण चैंद। हमरि भौत पुरणि भाषा छन, वोंको साहित्य अर हर विधा म विशद भण्डार उपलब्ध चा। इलै अब समय ऐगे कि हमरि भाषाओं तैं मान सम्मान मील। ज्ञातव्य हो कि उत्तराखण्ड म अज्यों तलक हमरि भाषा अकादमी नि बणी अर न सरकारोंन हमरि भाषाओं तैं वो मान सम्मान दे। लेकिन दिल्ली सरकारन हमरि भाषाओं को मान बढै अर दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी को गठन कैरि।
आमंत्रित कवियों म सर्वश्री गिरीश विष्ट हंसमुख, श्री मदन मोहन डुकलाण,डाॅ पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, श्री दिनेश ध्यानी, श्री रमेश हितैषी, डाॅ रमेश चन्द्र जोशी, श्री खजानदत्त शर्मा, श्री नीरज बवाडी अर डाॅ जीतराम भट्ट जी बि शामिल छया। कवि सम्मेलन म उपस्थित अकादमी का एक मात्र सदस्य डाॅ पवन कुमार मैठाणी जीन सबि कवियों तैं अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह आदि से सम्मान कैरि। मंचासीन कवियों अर सभागार म उपस्थित जनसमुदाय खुणि य अचरज की बात छै कि नै-नै बणी गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी का मात्र एक सदस्य हि ये आयोजन म उपस्थित छया जबकि लगभग पन्द्रह सदस्यों की पूदी टीम बणी चा। स्वयं अकादमी का उपाध्यक्ष श्री हीरा सिंह राणा जी चण्डीगढ म कै आयोजनम जंया छन। समारोह का मध्य अकादमी का एक हौरि सदस्य श्री राजेन्द्र प्रसाद जीन अपणि उपस्थिति देन। सदस्यों की गैर मौजूदगी न लोगों तैं अपणां अपणो तर्पां बिटिन कयास लगौणा मौका दे देन, कि सैद चा अकादमी म सौब कुछ ठीक नि चलणों हो, या क्य बात ह्वे होलि जो क्वी बि सदस्य नि ऐन? बहरहाल उम्मेद कर्दां कि हमरि अकादमी हमरि भाषाओं का विकास का खातिर, हमरू साहित्या का खातिर भला, भला कारिज कारलि। जनु कि डाॅ जीतराम भट्ट जीन अपणा संबोधन म बि य बात बोलि कि गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी हमरि भाषाओं का विकास अर समाज तैं अपणि भाषाओं का दगड़ि ज्वडणां खातिर सेतु का काम कारलि। लेकिन यां का खातिर अकादमी का सदस्यों को सकारात्मक रवैया, भाषा अर साहित्य का प्रति अनुराग अर सहयोग की भावना अहम चा। किलै कि नै नवाण अकादमी तैं कै दिशा म ल्हिजाण अर क्य-क्य आयोजन होणन यों सब्बि पहलुओं परैं विचार अर चिन्तन खुला माहौल अर विषय की जानकारी का होणु भौत जरूरी चा। साहित्य की समझ अर साहित्य का विकास का आयामों का खातिर चिन्तन तबी ह्वे सकदा जब हम स्वयं विज्ञ होवन अर हमरि सोच अर परधि विस्तार लियीं होवन। आशा कर्दां कि हमरि अकादमी नित नै-नै कीर्तिमान स्थापित कारलि।
मंचासीन कवियों न काव्यपाठ का विभिन्न विषयों परैं अपणि रचना सुणैकि श्रोताओं तैं मंत्रमुग्ध कैरि देन। सब्बि कवियों न दिल्ली सरकार अर स्वय डाॅ जीतराभट्ट जी को आभार व्यध्क्त कैरि कि जौंका परताप से हमरि भाषाओ की अकादमी दिल्ली म बणी। कवियों न राजनीति, पलायन, प्रकृतिप्रेम अर समसामायिक विषयों परैं अपणि पैनि, प्रभावकारी अर सिजळि कविताओं की श्रोताओंन ताळि बजै कि प्रशंसा कैरि। पैलि दौं सभागार म यना श्रोता दिखेन जो सीधा कवि का दगड़ि जुड़िकि माहौल तैं हौरि बि खुशनुमा बणै देणा छया। कविता हो चा गजल हो यो विधाओं तैं जब सुधी श्रोता मीलि जंदन ता कवि अर गजलकार को मन अर सुणौणा कि भौण बि सटीक बैठदा। य बात ये कवि सम्मेलन मा प्रमाणित ह्वे। बुलें सकंेद कि ये मायना म बि यो कवि सम्मेलन ऐतिहासि छौ। कवि सम्मेलन का संचालन डाॅ जीतराम भट्ट जीन अर डाॅ शंकर दत्त पाण्डेय न संयुक्त रूप से कैरि।


सभागार म उपस्थित श्रोताओं म वरिष्ठ साहित्यकार श्री ललित केशवान, श्री जयपाल सिंह रावत, वरिष्ठ कवि श्री जगमोहन सिंह रावत, श्री ओम प्रकाश आर्य, उत्तराखण्ड जागरण का सम्पादक श्री सत्येन्द्र सिंह रावत, श्री विनोद उनियाल कवि, श्री प्रदीप वेदवाल, श्री जगत कुमाउनी, श्री द्वारिका प्रसाद चमोली, श्री विश्वेस्वर प्रसाद सिलस्वाल, श्री देवेश्वर विष्ट, यूके टाईम वीडियों बिटिन श्रीमती यशोदा जोशी, श्री दीपक जोशी, श्री हरीश चन्द शर्मा, श्री राघव शर्मा, श्री नरेन्द्र रौथाण समेत कै अन्य गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित छया। अकादमी को पूरू स्टाफ अर अन्य सहयोगियों की तत्परता अर कार्य का प्रति समर्पण भौत ही सराहनीय छौ।
समारोह का उपरान्त उपस्थित जनसमुदाय का खातिर भोजन की व्यवस्था बि अकादमी का द्वारा करेगे छै। कुल मिलैकि बुले सकेंद कि सची म आयोजन ऐतिहासिक अर राष्ट्रीय स्तरौ छौ। यां का वास्ता गढ़वाळी, कुमाउनी और जौनसारी भाषा अकादमी को आभार अर उम्मेद चा कि औण वळा समय म अकादमी साहित्य से संबधित हौरि बि भला-भला आयोजन उर्यालि।

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