दिल्ली सरकार से कुच्छ सीखो उत्तराखण्ड सरकार, गढवळी-कुमाउनी- जौनसारी अपर घर मा हुयीं गैर

दिल्ली मा केजरीवाल सरकार न पैल उत्तराखण्ड भाषा साहित्य संस्कृति तै ऐथर बढाण खातिर गढवाली कुमाउंनी-जौनसारी भाषा अकादमी ख्वालली अर येक पैल उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा बणये गेन। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र दिल्ली मा रैवास कन ह्वाळ 30 लाख उत्तराखण्डी रैवासीयूं बाबत या बड़ी खुश खबरी छ। उत्तराखण्ड आदोंलन वरिष्ठ आंदोलनकारी अर प्यारा उत्तराखंड सम्पादक देवसिंह रावत न ब्वाल कि जै काम तै उत्तराखण्ड अर केन्द्र सरकार नी कर पायी वै काम तै दिल्ली सरकार न करी कन दिखायी। श्री रावत न ब्वाल कि उत्तराखण्ड सरकार तै दिल्ली की केजवरीवाल सरकार न जू आईना दिखायी वै से समझण जरूरत छ। जू काम 19 साल मा उत्तराखण्ड सरकार नी कर सकीन वै काम तै दिल्ली सरकार कनी। बौत भलू हूंद कि प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड भाषा तै संविधान की आठवीं अनुसूची मा शामिल करवांदी। लेकिन उत्तराखण्ड अर केन्द्र सरकार ये तरफ क्वी ध्यान नी द्यायी।

उत्तराखण्ड मा जथगा भी सरकार ऐन उन बस अपर स्वार्थ देखी। काबिना मंत्री सतपाल महाराज ये तरफ प्रयास करी भी छ पर वै पर भी क्वी अमल नी ह्वायी। धाद संस्था गढवळी भाषा पर काम कना ये पर कै बार धाद संस्था तरफ बिटी प्रतिनिधित्व मंडल भी ग्यायी, हस्ताक्षर अभियान भी करवायी लेकिन अजों तकन सरकार बिटी क्वी खास पहल नी करे ग्यायी। उत्तराखण्ड मा होर संस्था भी द्वी भाषा तै आठवीं अनुसूची मा लाणा खातिर प्रयासरत छन। पौड़ी जिला मा सरकार एक अच्छी पहल त करी छ, लेकिन वा भी अजों तकन पूरी तरह से लागू नी ह्वे साकी। उत्तराखण्ड मा प्राइवेट स्कूल दगड़ी ही पर्यटन स्थल पर गढवळी कुमाउॅनी जौनसारी भाषा प्रयोग से इतैं व्यवसायिक भाषा बणाण पर जोर दे सक्यांद। येक दगड़ी उत्तराखण्ड मा गढवळी-कुमाउॅनी- जौनसारी भाषा अकादमी स्थापना कन पर जोर दीण जरूरत छ। दिल्ली मा ये भाषा अकादमी बणवाण खातिर उत्तराखण्ड एकता मंच दिल्ली न व्यापक आंदोलन करी। वखी दिल्ली मा उत्तराखण्डी बोली भाषा तै बढावा दीण खातिर दिल्ली मा उत्तराखण्डी समाजसेवी विनोद बछेती भी बौत बडू योगदान रायी। उन दिल्ली मा बड़ू स्तर पर उत्तराखण्डी बोली भाषा कक्षा संचालन करवै कन आम जन तै भाषा से जोड़ी।

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