गढवाळी कुमाउनी भाषा तै आठवीं अनुसूची मा रळाण खातिर सांसद अजय भट्ट तै उत्तराखण्ड लोक भाषा सिहत्य मंच न द्यायी ज्ञापन

      दिनेश ध्यानी  रिपोर्ट :    नै दिल्ली 28 नवम्बर, 2019 खुणि उत्तराखण्ड भाजपा अध्यक्ष अर नैनीताल संसदीय क्षेत्र बिटिन लोक सभा संासद श्री अजय भट्ट जी से वों का निवास परैं डाॅ विनोद बछेती, श्री दिनेश ध्यानी अर युवा कवि, श्री प्रदीप रावत न शिष्टाचार भेंट कैरि। ये अवसर परैं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंचा तर्पां बिटिन श्री भट्ट जी तैं अग वस्त्र भेंट कैरिकि सम्मानित करेगे अर एक आभार पत्र बि सौंपे गे। श्री भट्ट जीन बोलि कि आप लोगोंन मेरू प्रयासा सराहना कैरि मी भलु लागि अर अगनै बि हम आप जनसरोकारों का खातिर एकजुट काम करला यनि उम्मेद चा। जन कि आप जणदा छन कि श्री भट्ट जीन हाल ही म संसद म गढ़वाळी, कुमाउनी तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर निजी विधेयक प्रस्तुत कर्यों चा। जै परैं संसद म चर्चा होलि। ये हमरि भाषाओं तैं वों को हक दिलौणा खातिर एक लपाग मने जाणी चा।यां से पैलि जबरि श्री सतपाल महाराज लोक सभा म बतौर गढ़वाळ संसदीय क्षेत्र बिटिन सांसद छयां वोंन संसद म हमरि भाषाओं की बात उठै छै। लगभग तीन साल पैलि उत्तराखण्ड प्रवासी पंचायत म तत्कालीन गृहमंत्री श्री राजनाथ सिह जी न बोलि छौ कि हम गढ़वाळी, कुमाउनी तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल करणा खातिर औण वळा समय म जतन करला। लेकिन वांका बाद ये वास्ता क्वी पहल नि करेगे। पिछला साल एक आयोजन म श्री सतपाल महाराज तैं मीलिकि हमुन महाराज जी तैं वों को वक्तब्य कि याद दिलै कि आपन संसद म हमरि भाषाओं कि बात उठै छै अर अमणि बि हाल जन्या तन्नि छन। अब ता हमरि भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर जतन होण चंदन। श्री महाराज जीन बोलि किलै ना, मि पूरू सहयोग करलु। हमरि गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची जगा मिलण चैंद।
अब श्री अजय भट्ट जीन संसद म अपणि भाषाओं की बात उठै कि भाषा प्रेमियों का मनों म एक आश जगै दे। उम्मेद चा कि औण वळा समय म हमरि भाषाओं तैं उचित मान -सम्मान मीललु। भट्ट का दगड़ि विस्तार से बातचीत का दौरान य बात समणि ऐ कि हमतु तैं अपणि भाषाओं को इतिहास अर प्रकाशित साहित्य अर विधाओं का बारम एक समग्र लेख प्रस्तुत कनु होलु अर जथगा बि हो साक वों तैं पुस्तकों का बारम जानकारी दिये जालि। यां का खातिर भविष्य म मुलाकात अर भाषा, साहित्य संबधी बैठकों को प्रचलन शुरू कन होलु। श्री भट्ट जी को सकारात्मक रवैया देखिकि लगणों कि ज्व बात उठीं चा य कखि न कखि सकारात्मक रूपम समणि आलि।
         सुप्रसिद्ध समाजसेवी, डीपीएमआई का चेयरमैंन अर भाषा प्रेमी डाॅ. विनोद बछेती जीन भट्ट जी से आग्रह कैरि कि यो कारवां अब रूकण नि दियां । हम अपणा समाजा तर्पां बिटिन आप तैं पूरू सहयोग को वचन दिंदन। ज्ञातव्य हो कि डाॅ. बछेती जी का प्रयासों का सुफल चा कि दिल्ली एनसीआर म वर्ष 2016 बिटिन नौनिहालों तैं गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का द्वारा भाषा सिखाणा जतन होण लग्यां छन। ये बावत उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंचा संयोजक श्री दिनेश ध्यानी न श्री अजय भट्ट जी तैं विस्तृत जानकारी दे। वोंन बथै कि मंच वर्ष 2012 बिटिन दिल्ली बिटि महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल साहित्य सम्मान देणों चा अर समय-समय परैं अपणि भाषा सहित्य का विकास का खातिर विचार गोष्ठी अर संगोष्ठियों को आयोजन कनों चा। ये साल दिल्ली म लगभग बत्तीस जगा ग्रीष्मकालीन कक्षाओं को आयोजन करेगे जख लगभग छ सौ बच्चों न अपणि भाषा सिखणा जतन कैरि। अमणि हालात यि छन कि जौं बच्चों न वर्ष 2016 बिटिन लगातार भाषा सिखणु शुरू कैरि वों मदे कै इनां छन कि जु बना छन कि गुरूजी अब हम बि नौन्याळों तैं गढ़वाळी, कुमाउनी भाषा सिखै सकदन।
       कुल मिलैकि अमणि फेर एक दौं हमरि गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर नै पहल शुरू हुईं चा। जो कि हमरा समाजा खातिर शुभ सूचना चा। सब्बि भाषा प्रेमियों अर साहित्य सेवियों तैं अमणि एक दौं फेर एकजुट होणा जरूरत चा। जनु कि हमुन वर्ष 2016 म दिल्ली म गढ़वाळी, कुमाउनी अर जौनसारी भाषा अकादमी का खातिर सामुहिक जतन कैरि छौ अर अमणि दिल्ली म हमरि अकादमी अस्तित्व म ऐगे। दिल्ली सरकार तैं भाषा अकादमी का खातिर बि सौब से पैलु ज्ञापन हमुन हि दे छौ। वांका बाद कै संगठन अर मनखि अगनै ऐन अर सब्यों को सामुहिक प्रयास को हि परिणाम चा कि अमणि हमरि भाषा अकादमी बणिगे।
कै बि समाजा कि भाषा अर साहित्य जब तलक समृद्ध नि होंदु तब तलक वै समाजा सर्वांगीण विकास नि होंदु। हमरि पछ्याण अर हमरा पुरखों कि बिरासत को आधार बि हमरि भाषा, संस्कृति अर हमरा रीति-रिवाज अर सरोकार हि छन। नथर देश विदेश म बसणा का बाद बि हमरू ज्यू पराण अपणां घर गौं अर वीं थाति म नि अटक्यां होंदा। यु सब्बि तबी चा कि हमरा सरोकार हमुतैं बांधिकि रखदन। अर जब तलक हम अपणि भाषा, संस्कृति अर सरोकारों से जुड्यां छंवा तबी तलक हम ठेट उत्तराखण्डी छंवा। अपणि भाषा, सरोकारों से हटणा बाद त हमरि अपणि क्वी पछ्याण नि बचणी। इलै कखि बि रंवा कतना बड़ा बि बणि जावा पण अपणि पछ्याण, भाषा, संस्कृति, साहित्य अर सरोकारों तैं नि छुडण चंदन।
              भाषा, साहित्य अर संस्कृति हमेशा ज्वड़दि चा, मनखि तैं वैका सरोकारों कि महत्ता अर महानता को बोध कराणी रैंदं ता भै-बैणों एक दौं फेर उम्मीद चा कि हम सब्बि अपणि गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर जो पहल आदरणीय श्री अजय भट्ट जीन कैरि वे तैं सुफल कना खातिर एकजुट होंला अर एक दिन औलु जब हमरि अपणि भाषा वि संविधानै आठवीं अनुसूची म जगह पालि। ता आवा हम अर आप अपणि भाषा, साहित्य का खातिर सब मतभेद अर मनभेद भुलैकि एकजुट होंला अर समाजा खातिर नै पीढ़ि का खातिर ये कारिज म अपणि अग्याळ देणा जतन कर्दां।

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