चौक माटू ( हरीश कंडवाल मनखी कलम बिटी)

आज महेन्द्र भारतीय सेना बिटी सूबेदार ओहदा से रिटैर हूण बाद खुश ह्वे कन देहरादून आणा छ्यायी। सूबेदार रिटैर हूण खबर से पूर घर मा खूब उल्यार हूयूं छ्यायी। जब उ लैंसडौन बिटी आर्मी गाड़ी मा बैठी कन अपर बोरा बिस्तरा लेकन घर आणा छ्यायी त अधबट पर हिसाब लगाणा छ्यायी कि रिटैरमेंट पार्टी मा कै कै तै न्यूतण, अर क्या क्या पकवान पकल, दारू बोतल कथगा लगी जाली। रिटैरमेंट पार्टी मा खूब चखळ पखळ हूण चियांद, इथगा बरसू बिटी देश सेवा करी, देश सेवा मा रौं त जगह जगह घूमण अर अपर देश दिखणा मौका मिली। फौज मा रैकन जिंदगी तौर तरीका अर सलीका सीखणा खुणी मिली अर बगत हिसाब से जू बदलाव आयी तनी हम भी बदलो।
जब नै नै भर्ती ह्वे कन रंग रूट बणी त ब्वे बुबों, ददी ददा भै बैण्यूं अर गौं ख्वाळ खुद लगदी छेयी तब सुचदू छ्या कि कख ऐ ग्यों मी यख, लेकिन सै सै करी कन ढब्ब पड़ी ग्यायी। जब कब्बी छुट्टी पर घर जांद छ्यायी तब सिवियिन जिंदगी बिल्कुल अलग लगदी छेयी, पर अब त रिटैर हूण बाद सिविलियन ही बणन।
अपर खयालातों मा अर विचारों उधेड़ बुन मा महेन्द्र ऑख तब खुलीन जब ड्रेवर न गाड़ी अचाणचक ब्रेक लगै कन रोक द्यायी। महेन्द्र न ब्वाल कि जीतू तील भै या गाड़ी अधबट मा किलै रोकी ना इनै दुकान ना क्वी होटल। जीतू न ब्वाल कि भैजी समणी मा म्यार गौं दिख्याणा अर उनै बिटी आण ह्वाळ डांड कांठयूं हवा म्यार बदन झुरे कन ग्यायी अर वीं हवा मा म्यार गौं माट खुशबू न मि तै रूकणा खुणि मजबूर कर द्यायी। महेन्द्र न जब समणी मा गौं द्याख त वी पटळ ह्वाळ कूड़, मटखुड़ी मोळ माटा लिप्या नजर आणा छ्यायी, घडैक द्वी उखम खड़ रैन, फिर सूबेदार साहब न जीतू तै पूछ कि घर मा अजों कू छन। जीतू न ब्वाल कि भैजी घर मा ब्वे बाप छन, अर नौन्याळ घरवळी दगड़ कोटद्वार कमरा किराया पर छन, क्या कन नौन त पढाण ही छन्न। महेन्द्र न ब्वाल कि यार जीतू तुमर घर जाणा मा कथगा बगत लगदू ह्वाल, तब जीतू ब्वाल कि दुगड् बिटी गाड़ी मा 20 मिनट लगदन भैजी, उख बिटी कच्चू रस्ता च। महेन्द्र न ब्वाल कि चलो फिर अब गाड़ी चला।
जीतू तै थुड़ा नखरी त लग च पर, फिर गाड़ी स्टार्ट करी अर जाण लगी ग्यायी। सूबेदार साहब तै अपर गौं अर बाळपन दिन याद ऐ गीन। उं याद मा वै तै वैक ब्वे बुल्यां अर अड़यी बात वैक समणी रिटणी लगी गेन। जब उ भर्ती ह्वेकन रंगरूट बाद छुट्टी लेकन घर ऐ छ्यायी आर पैल पोस्टिंग जम्मू जाणा खातिर पैटणा छ्यायी त जांद बगत ब्वै न अड़ै कन भेजी छ्यायी कि बेटा देश रक्षा करद बगत अपरी जलम भुमी अर ये चौक तै नी भूली। ये चौक मा त्वेन सब्ब कुछ सीखी, ग्वे लगाण, चलन फिरण, खीलण, रूण अर हंॅसण। आज तू नौकरी पर जाणा छेयी त पैल खुट्ट भी आज त्यार ये चौक बिटी भैर निकळणा छन। बेटा जख भी रै राजी खुशी रै पर बाबा हम तै, ये गौं तै अर ये चौक तै नी भूली। बेटा ब्यौं कना बाद अपरी ब्यौंली ड्वाला भी ये चौक मा ही लैयी अर जब म्यार प्राण निकळ जाल त म्यार मुर्दा तै भी कांध ये चौक मनन ही देय। जब कभी भी नौकरी मा छुट्टी मिलल त ये चौक मा आणा जाणा रैयी। महेन्द्र मॉ बुल्या द्वी बचन मनन एक बचन त ब्वे ज्यूंद छेयी तब्बी निभै ये छ्यायी। ब्वे खुणि ब्वारी ड्वाला चौक मा ही लै छ्यायी लेकिन दूसर बचन नी निभै साकी छ्यायी उ ब्वे मुर्दा तै कंधा द्याण, किलै कि जब ब्वे प्राण निकळी छ्यायी त वै बगत उ कारगिल लडै मा छ्यायी अर छुट्टी नी मिली पायी। आज भी मॉ तै चौक मनन नी उठै पाण मलाल वै तै गार सी तरां बिनाणा रंद।
यूं पूरणी बातों तै याद करद करद वै तै पता नी चली कि दुगड्डा ऐ ग्यायी। दुगड्डा मा जाम लगणा कारण गाड़ी रूक ग्यायी। भैर द्याख त दुगड्डा बजार दिख्यायी। महेन्द्र जीतू खुणी गाड़ी इक तरफा लगाणा खुणी ब्वाल। जीतू गाड़ी एक किनर लगायी अर सूबेदार साहब जीतू तै लेकन साड़ी दुकान मा चली ग्यायी अर एक सुंदर सी साड़ी ल्यायी दगड़ मा कुर्ता पायजामा अर कपड़ा भी ले ल्यायी। वैक बाद मिठै दुकनी मा जैकन खटै मिठै भी ले ल्यायी। मौसमी फल भी बैग मा कोची देन। ऐथर जैकन एक जोड़ी चप्पल भी ले लेन। जीतू स्वाच भैजी अपर घर खुणी ल्याणा ह्वाल सामान, वैन कुच्छ नी पूछी अर द्वी गाड़ी तरफा ऐ गेन। सूबेदार साहब ब्वाल कि यार जीतू भुला चल त्यार घर जौला, त्यार गौं देखी ऐ जौला फिर मौका मिलदू च कि ना, चल यार अपर चौक माटू अर पटाळ त दिखे दे दी। ये बाना पर घर गौं अर चौक दर्शन ह्वे जाल।
ज्ीतू गाड़ी अपर गौं तरफ खुणी मोड़ी अर चलाण लगी ग्यायी, सूबेदार साहब जू भी पूछणा रैन उ सब्ब सै सै मा सब्ब बताणा रायी। छ्वीं बत्थ मा रस्ता कटी ग्यायी। जीतू गौं ऐ ग्यायी, गाड़ी सड़क इकतरफां खड़ी करी अर द्वी जीतू घर पौंछी गेन। चौक मा खुट्ट रखदी सार सूबेदार साहब तै अपर ब्वे अड़यी बात याद ऐ ग्यायी, अर दगड़ मा अपर बचपन याद भी ऐ ग्यायी। उबरू बिटी जीतू ब्वे भैर आयी द्वीयूं सेवा सौळीं ह्वायी ब्वे द्वीयूं चौंटी भुक्खी प्यायी, राजी खुशी पूछी। सूबेदार साहब तै अपर ब्वे याद आयी त उ भिटयाण बिगैर नी रै साकी। तबरी जीतू बुबा भी कांध मा लखड़ लेकन ऐ ग्यायी। जीतू सूबेदार बारे मा बतै कि आज सूबेदार भैजी रिटैर ह्वे कन घर जाणा छन। जीतू बुब्बा न सूबेदार साहब तै बधै द्यायी, फिर आपस मा छ्वी बत्थ लगण लगी गेन। जीतू ब्वे गिलास पर पैल पाणी फिर चाय लेकन आयी, वैक बाद ब्वाल बाबा रूटी खैकन इखी मनन जैन, अब्बी चुल्ल रंगुड़ गर्म ही छ झटपट बणांदू। सूबेदार साहब न ब्वाल कि काकी हमन जरा जल्दी जाण, जांद जांद बगत लगी जांद। अजों घर जैकन पार्टी इंतजाम कन पड़ल। सूबेदार साहब न लयीं साड़ी अर खटे मिठै जीतू ब्वे तै पकड़ैन अर कुर्ता पायजामा कपड़ा जीतू बाबा तै पकडै कन ब्वाल कि काका ना नी बुलीन या मेरी तरफ बिटी तुम कुण समलौण छ। वैक बाद जीतू बुबा न सूबेदार साहब तै हल्दी पिटै लगै कन विदा करी द्यायी।

देहरादून जाणा खुणी द्वी गाड़ी मा बैठ गेन, सरा बाट पर मन मा उकताट सी हूणा रायी। फिर मन तै बिळमाणा खुणी पार्टी हिसाब किताब लगाण लगी ग्यायी। कै कै तै न्यूत दीण क्या क्या ब्ववस्था करे जाली। एक तरफ बिटी सरा रिश्तेदरी भै बिरदरी तै गिणन शुरू करी द्यायी गिणद गिणद लगभग 200 लोग हूणा छ्यायी। गिणद बगत गौं मा जू चिचा अजों कूड़ी जुगाळ कना छ्यायी उंक याद ऐ ग्यायी कि अरे काका तै फोन करी कन ही न्यूत दे द्यांदू। घर काका फोन पर नम्बर लगायी, काकी फोन उठै द्वीयूं मा फोन पर सेवा सौंळी अर राजी खुशी ह्वायी, वैक बाद काका दगड़ी बात हूण लगी ग्यायी। सूबेदार न ब्वाल काका परस्यूं ब्यखन बगत मेरी रिटायरमेंट पार्टी च काकी तै लेकन ऐ जैन।
काका न ब्वाल ब्यटा हम मनन एक ही ऐ सकदू। मी कोशिश करलू। घर मा हमरी एक ढांगी गौड़ी च, वी तै नी छोड़ सकदा ये बुढप् बगत। पूर जिंदगी हमर दगड़ निभायी, सरा गोट वींकी पैथर पर भरी रायी, सब्ब नौन यींकी दूध पेकन बड़ हुयां छन अर अब भी यींकी बाछी कैरूण चाय पाणी पिलाणी। अब इन मा एक आदमी यीं दगड़ रण जरूरी च बाबा। सूबेदार साहब न ब्वाल कि ठीक च काका कोशिश जरूर करीन आणा क यन बोली कन फोन धरी द्यायीं ।
अब सूबेदार दिमाग मा कत्ती भल बुर विचार आण लगी गेन अर खास करी कन काका बुली बात कि बाबा घर मा एक ढांगी गौड़ी च वीं तै बुढयांद बगत नी छोड़ सकदो। या बात उंक दिमाग अर जिकूड़ी मा समै ग्यायी, अर वै बगत ही उंक विचार बदली गीन कि जब गौं मा रैकन काका गौड़ बाना पार्टी मा नी आणा छन, अर वै गौड़ बाना घर नी छोड़ी सकणा छन। लेकिन क्या मी अपर गौं मा जैकन रिटायरमेट पार्टी खातिर अपर सौलियत नी छोड़ सकदू। वैक मन ही मन मा रिटैरमेंट पार्टी अपर चौक करण विचार बणायी, अर पितर हुयीं ब्वे बुबों तै याद करी कन ब्वाल कि हे ब्वे जै चौक बिटी मी भर्ती मा गे छ्यायी आज रिटायरमेंट बाद भी पैल कदम वै चौक मा रखलू।
जीतू तै चण्डी माई पुळ मा ब्वल कि तुम देहरादून ना बल्कण किमसारी तरफ म्यार गौ सड़क पर चल, यख बिटी 20 किलोमीटर दूर चं। सूबेदार साहब न अपर घर फोन करी अर सब्ब कुच्छ बतै कन ब्वाल कि तुम सब्ब सामान लेकन भोळ घर ऐ जैन। उनै गौं मा भी काका खुणी फोन करी कि मी आणा छौ आज ही घर। इनै जीतू भी सूबेदार बुल्या पर गाड़ी चीला बैराज तरफ मोड़ी द्यायीं।
गॉव मा जैकन सबसे पैल द्वी हत्थू न गौ तरफ हत्थ जुड़ीन फिर चौक मा जैकन माटू तै हत्थ पर लेकन कपाळ पर पिटै लगायी। तबरी सरसराट करी कन हळकू बथौं सी अचाणचक चली अर बकै माटू भी सूबेदार कपाळ पर लगी अर इन लगी कि कैन मुण्ड मलासी कन आशीर्वाद दे ह्वाल। वै तै इन लगी कि जन बुल्यांद वैक ब्वे इन बुनै ह्वेली कि बेटा चल तीन म्यार दीयू तीसर बचन त निभै द्यायी। आज तील सच्चू देश भक्त दगड़ी मातृभूमि अर जलम भूमि दगड़ी ब्वे भक्ति भी पूर करयाली।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *