“पुके पुके कि खाण”<(हास्य व्यंग्य )

मेरा एक सह्रदय मित्रन फोन करी बोलि,

“खाँसी ठीक नि हूणि च क्वी दवै बतो “

मीथे इथ्गा सम्मान अबि तक कबि नि मिली ।

वेन मी थे डाक्टर समकक्ष सम्मान देद्या ।

खैर !!! मिन कै जानकार बंधु से पता कैरि कि केमिस्ट से 10 गोलिकु एक एन्टी एलर्जिक  पत्ता अपण मित्र खुण भिजवे दया ।
  अर्  दवै कि खुराक बी बताई कि एक गोली सुबेर अर एक शाम बक्त खाण।
आज फेर 3 दिन बाद वेकु फोन आई कि खांसी की  शिकैत फेर हूणी च ।
मिन ब्वाल “कन दवै खतम ह्वेग्या क्य “??

वेन बोलि “पुके पुके की खाणू छौं,एक गोलि एक दिन चलाँदु मि ,ठँडी कु टैम च ,परिवार म और लोखु थे खाँसी होलि त??? उन्कु बि ख्याल रखण पोड़द मीथे ।

मिन बि सोचि ???? कत्न किफैति आदिम च यु 
मित्र ।
इन टैपा लोग ऊत्तराखण्ड  म  सुदि जग जग खतेणा छन। सरकार अगर यूँकि प्रतिभा कु इस्तेमाल करली त  सरकार कु बजट अर् इकोनॉमी थे, इ लोग दुरुस्त कैर सकदन ।

लिख्वार निर्मल नैथाणी जी ।

  






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