“ढसांग” (गढ़वळी कहानी) लिख्वार दिनेश ध्यानी

पीं पीं जनि हौर्न बजि तन्नि संजू ब्वै समझि गे कि संजू का बुबा जी ऐगेन। दफ्तर बिटिन रोज सात बजि तकै पौंछि जांदा छया लेकिन अमणि झणि क्य बात ह्वै कि नौ बजि औंणा छन। न क्वी खबर न रैबार। दगड़म स्यू पानु बि च बिरणु नौनु। भतीजु गौं बिटिन स्कूला छुट्यों म दिल्ली घुमणा अयों, वै न बोलि चचा जी मि आपकु औफिस देखणा आंदु छौं। अर ल्ही गैंन वै थैं दगड़म।
स्वचदा स्वचदा संजू ब्वै न जन्नि दरवाजु खोलि अर भैर आंगन म ऐ त देखि कि पानु का हथ परैं सफेद पट्टी सी बधीं चा। वीन बोलि स्यु क्य ह्वै, कनम ह्वै?

स्ंाजू का पिताजी न स्कूटर खडु करद बोलि पैलि भितनै आणि दे दि तब पुछ्यंद सवाल। अर वो हैलमेट अर अपणु बैग ल्हेकि भितनै ऐगेन पिछनी बिटिन पानु अर संजू कि ब्वै बि कमरा म ऐगेन। संजू का बुबा जी हैंका कमरा म कपड़ा बदलणा चलिगैन।
वींन लैट म देखी कि पानू का हथ परैं सची पट्टी बंधी। अरे पानू यांखुणी गै तु यों को दफ्तर? स्यु कनम लागि त्वै। हथ ता नि टुटि? क्य ह्वे रे बुना बोलि लेदि। पानू ल बोलि अरे चची वो बुना अबि औंद दा रस्ता म कै परैं जरसि ढ़साग लागि गै छै अर हमरू स्कूटर लमड़िगे। चचा जी त नि गिरा पण मि स्कूटर बिटिन सड़क म लमड़ि ग्यों अर म्यरा क्वीन परैं चोट लगिगे।

हैं कन देखिकि नि चलौणा छया सि स्कूटर तैं?
अरे चची चलाणा ता देखि कि छया पण वो रिक्शा वळु अचणचक समणि ऐगे। संजू का बुबा जीन बोलि अरे देखिकि त चलौणों छौ तबी त ज्यान बचीन नथर क्य से क्य ह्वै जांदु एक मिनट म। हमत अपणी लेन म चलणा छया पण अचणचक निरबै रिक्शा वळु बैं तरपां मुड़िगे अर हमरू स्कूटर बचदा-बचदा जरसि ठुके गे। पर देखा निरबै रिक्शा वळाा दुर्बुद्धि गळत बि अफी चलणों अर झगड़ा बि हमरू दगड़ि करणों। यो पानु नि लमडदु ता मिन वैका हाल कुहाल कैरि देणा छया पण मि ये तैं समळण म लगिगौं अर वैन कतनै लोग कट्ठा करि देन वखम। त्वै त पता हि छ कि बड़ी गाड़ी वळा गळति बि नि हो पण सैकल से ल्हेकि बस तलक को जबरि बि क्वी लफड़ा होंद ता बड़ि गाड़ी वळैकी गळ्ती मने जांद। पण मिन बि अपणि सच बात तैं धैरिकि वै रिक्शा वळा का दांत खट्टा कैरि देन।

उल्लू पट्ठा बुनौं कि म्यारू रिक्शा टैर मुड़िगे मीं मुआवजा देवा। मिन बोलि हराम कु बच्चा हम लमड़ि गै छा अर ये देखि पानु तै चोट लगिगे वै कु क्या?तब चुप ह्वै। ये पानु तैं डाक्टर म ल्हींगु त वैन बोलि कि एक्सरे करावा तब एक्सरे करै अर वांका बाद वैन एक्सरे देखिकि बोलि कि हड्डि परैं चैट नीं, भैनै खरोच छ बस पट्टी अर दवै लगै कि खूब ह्वै जालु। हे राम यांखुणी लिगौ तुम बिरणु नौनु तैं अपणु औफिस दिखाणा खुणि। हैं जो क्वी बात ह्वै जांदि ता हम क्य जवाब देंदा घौर जिठाणी जी तैं अर ज्यठा जी तैं। तुमरू बि स्यु निरबै ख्यपटणा स्कूटर परैं झणि क्या सोर चा कतना साल ह्वेगेन मिन बोलि छौ कि हैंकु ल्हेदेवा लेकिन न वै तैं हि हिस्वरणां छंवा ढांगु बळ्द जनु। अरे अब ता अक्वै कि लेवा स्कूटर नथर बस से ही जावा। संजू ब्वै न बोलि।

अरे भै त्वैतैं म्यारू स्कूटर से क्या परेशानी चा? पुरण बेसक चा त्वै जनु पण अज्यों तक बिगडि नी वो त्वै जनु नी वो जो बात बात परैं बिगड़ि जंदि। ह्वै जांद कबर रस्ता चलदा लेकिन यां को मतलब स्यु नी कि म्यारू स्कूटर खराब चा। अरे वो ता पुरणु चा इंजन देखा एकदम टनाटन मी जनु फिट। हां स्या बात अलग चा कि वैकि बाॅडी जरा खपचे गे लेकिन अज्यों तब दन दनादन चल्दा।
रेणी द्या तुम अपणि सफै अफुमी। सच बात त या चा कि तुम भौत कनजूस छंवा। इतगा बोलिकि संजू ब्वै किचन म चलिगे सैद वखा चुला म कुछ चढयों छौ।

चट गैस बंद कैरिकि वोन बोलि तुम झट हाथ मुक ध्वै ल्यावा अर मैं खाणु लगांदु। खाणु खांद खांद पानु तैं झणि क्या याद ऐ बल चचा चचा यखा ता वै रिक्शा वळा परैं जरा सि ढसाग लागि अर वो लडै करणा खुणि तैयास ह्वैगे अर या एक दिन गौं म वो चा ना मैला खोला को पिर्वा वो पाणि ल्हेकि औणों छौ अर बंच्या बोड़ा जोळ ल्हेकि जाणों छौ जोळ को ढसाग लागि अर पिर्वा को कसेरा गड़मंड गड़मंड लमडी अर क्यळणा रौल एगेे। सैर्य कस्यरा फुटिगे अर घौर ऐकि वेके ददीन वैतें खूब गाळि देनी अर राति वेकि ब्वैन खूब मारि। अर वांका बाद बंच्या बोड़ा न वों को कसेरा तैं बणवाणा खातिर बोलि ता पानु कि ददी न बोलि क्वी बात नी तुमन कौन से जाणि बूझिकि ढसाग मारि।

बुल्दा बुल्दा पानु जोर जोर से हैंसण लैगे। वेका चाचा न बोलि ब्यटा गौं की बात हौरि छन देशा बात होंदि त यथगा म लड़ै अर झणि क्या-क्या ह्वे जांदु। यख ता परदेश म जरासि कै गाड़ी परैं सर मनखी परैं सड़क म जरसि ढसाग लागी न त एक हैंका तैं मरण परैं ऐ जंदन। आये दिन यख गाड़ी ठुकेणा परैं ऐक हैंका हत्या करणु आम बात ह्वेगे। अमण्या मनखि खुणि लोखरा ख्यपरा गाड़ी कीमत हैंका ज्यान से बिण्ड्या ह्वेगे। निरबे मूरख इंसान यनु नि समझदा कि गाडी को नुकसान कतगा ह्वै होलु हजार, द्वी हजार, पाचं चा दस हजार लेकिन बिना बात कर्यां हैंका तैं मारि देणु ये मनखी को रागस होणा निशानी चा।

पिछला मैना बात चा दिनदहाडे़ सडकी म द्वी कार आपस म टकरै गैन चलदा चलदा। एक कारा दरवजु परैं जरासि खंरोच ऐगे अर हैंका को बोनट टुटिगे। द्वी गाड़ि वळों न गाडी रोकिन अर बिना बात कर्यां, बिना नुकसान दिख्यां ऐक हैंका परैं चिपटि गैंन अर जब तलक द्वी ल्वैखाळ नि ह्वेगेन अर पुलिस नि जब तलक तब तलक नि छंटेन। द्वीयों तैं पुलिस अस्पालाळ ल्हीगे अर बाद म द्वियांें मदे ऐक मोरि गे। यनि घटना बतौंदन कि मनखि साधन जुटाणों चा अर वोंको गुलाम होंदा जाणों चा। तभी ता वेकि स्वचणा अर सैणा शक्ति समाप्त ह्वैंगन।

एक दौं ता कखि कै कलोनी म अडोसी पडोसी म नाळी का पाणी का खातिर बहस ह्वंेन अर बात यथगा बढ़ि कि हैंका पड़ोसी न गंडासन पडोसी अर वैकु नौना हत्या कैरि दे अर वैकि जनानी तैं घैल कैरि देन। ह्वेगेन घड़िम जरसि बात म मौकि मत्त। मी त लगदु कि हत्या कन वळों तैं कानूना को जरा बि खौफ नी। वों पता चा कि हमुन अमणि न त भोळ छुटि जाण जमानत परैं ता ज्या करला। सरकार तैं अमणि देश समाज म बढ़ण लगी हत्याओं अर अपराधों को खातिर नै कानून बणौण चंदन। बेट्यों अर महिलाओं का खिलाफ बि अपराधी बेखौफ छन हुयां। अट्ठार साल से पैलि कुछ बि कैरि ल्या वैन बाल सुधार गृह बिटिन छुटि जाण। ता संगठित अपराध बढण लग्यां छन।

संजू ब्वैन बोलि तुम क्या कम छंवा। जरा-जरा बात परैं मि तैं डंटणा रंद्वा, बिना गल्ती को बि बात सुणाणा रंदन। हौर्यों खुणि उपदेश देण असान हेांद कि अमण्या मनखि असहनशील हांेदा जाणों चा अर अफ्फु तैं क्वी नि देखदु। चुपचाप खाणु खावा ।
अये तु ता सगळ समझी बुनी छै, मी पता चा। पण धरती म यनु को परिवार छ जखा कजे-कज्याण म कभी कभी तुड़ाबुडा नि होंदन। भगवाना घौर बि यां से नि बचि साक्यों । भगी परिवार म कबि तु सुणे देंदि कबरि मी गुस्सा ऐ जांद व बात अलग चा। अपणा बाल बच्चों की भलैं का वास्ता सौब बुल्दन। लेकिन आम जिन्दगी म देखणों छौं कि मनखि का सुभौ भौत बदलेगे। न वै तैं धरती से प्यार न बण, जंगळ, पाणी अर न पौन पंछ्यों से प्यार। लोभ अर लालच न वै तैं मनखि बिटिन रागस बणै देन। अर सच बात त या चा कि लोभ अर लालची मनखि भौत बुरू सुभौ का होंदा जाणों चा।

अरै पानु तु घर गौं कि बात क्या करणों छै लाटा हमरा इलाका म देखि दि पिछला बीस तीस साल म लगभग पन्द्रा हत्या अर एक हैंका तैं खतम करणा कांड ह्वेंगेन। अपणु गौं का हाल देखिदि। कना ह्वेगेन द्वी तीन कांड़। वो ता हमरू गौं चा इलै हमुतैं क्वी बुरू नि लगदु नथर हैंका गौं वळा जा हमरू गौं म अपणि बेट्यों तैं बिवाणा खातिर ना नुकर कर बैठिगे छया वै दौर म जबरि हमरा गौं म हत्या जना कांड़ ह्वै छया। देखि ल्हेदि जरा गौर कैरिकि हमरि तीन चार ग्राम सभाओं म क्य-क्या कांड़ नि ह्वेन? यो सबि मनखी को सुभौ अर हंकार ही ता चा कि वे तैं पता नि लगणों चा कि मि क्या करणों छौं अर मिन क्य कन छौं?

पानु टक लगैकि अपणा चचा जी की बात सुणणों छौं। सची वैन कभी हिसाब नि लगै छौ कि वोंका गौं का इर्द गिर्दा गौं म क्य-क्या कांड़ हुयांन। वो एक एक कैंरिकि वों हत्याओं अर मारपीट को केसों तैं एक तरपां बिटिन गठ्याण बैठिगे। वेकि चचीन बोलि कि क्या गणणों छैं अंगुळ्यों म। पैलि खडु उठ हाथ ध्वै ल्हे दि। तेरा हाथ परैं पिड़ा नी होणी। खडु उठ मिन गरम पाणि कर्यों चा दवै खैले। तब जैकि पानुकि तन्द्रा टुटी। हाथ ध्वै कि वैन दर्दा दवै खैन अर लेटि गे। पण वैका नजरों म एक एक कैरिकि हर घटनाक्रम चलचित्रों को माफिग रिटण बैठिगैन।

सौब से पैलि फलणि कज्याण मारिकि कलमट घालि दे छै अर वांका बाद पूरा इलाका म कनि सनसनी फैलीगे छै। सैद चा य हमरा इलाका पैलि हत्या रै हो जो दिन दहाड़े एक जनानी तैं जिवोरों लालच म मारि देन। वांका बाद सुंदार मरेन, वांका बाद एक बंदुक्या अर वांका बाद हमरा गौं म कुछ सालों का अन्तराल म द्वी जघन्य हत्या कांड़ ह्वेगेन अर वांका बाद फलणा गौं इनि गणदा-गणदा पूरा सत्रा अठारा केसा गैंणि देन पानुल। वै तैं अजीब सि लगणों छौं कि मि वै इलाका रैण वळु छौं हैं सची जखा इतगा मारकाट ह्वेगे पण हम तैं यांकु आभास नी कि समाज परैं यांकु कनु दुष्प्रभाव होणों होलु।

जरा जरा सि बातों परैं ऐक हैंका खूना प्यासा किलै हूंदा जाणों चा अमण्या मनखि? ढसाग लगण परैं बि आदिम हैंका आदिमा खून कै देणों चा, एक हैंका ज्यान ल्हे देणू चा? त आखिर कख जाकि रूकलु यो सिलसिला? सैर हो चा गौं कखि बि मनखि सुरक्षित नी छन ता फिर क्या कना हमरू इतगा भतोड़ा-भतोड़ कैरिकि? स्वचदा-स्वचदा झणि कबरि पानु कि आंखि लगिगैन।

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