खुशखबरीः हिंदी-गढवाली- रोमन शब्दकोश, गढवळी भाषा सीखणा दगड़ी हिंदी क भी बड़ाल ज्ञान भण्डार

यी शब्दकोष गढवळी शब्दू क उ संकलन च जै तै पढीकन हर क्वी अपर गढवळी अर हिंदी शब्द भण्डार तै बौत मजबूत बणे सकदन। यू गढवळी शब्दू क बाट बटी निकळी कन जिज्ञासू पाठकू तै लोक अर सांस्कृतिक धरोहर से जुड़दू अर वखी नै पढवळी तै अपर जलड़ तरफ बौड़ैं कन भाषा की एक अनूठी समलौण उं तै सौंपद। रमाकान्त बेजवाल अर बीना बेंजवाल न अपर मेहनत अर लगन दगड़ी भाषा की धरोहर तै संभळण अर नै पढवळी कुणी एक शब्दू क एक यन अगाध भण्डार तैयार करी जू गढवळी भाषा सीखण ह्वाळू खातिर बणयूं ये कोश मा पाठकू सुविधा खातिर गढवाली शब्दू तै रोमन रूप भी दिये ग्यायी। 480 पन्नों क ये शब्दकोश मा 10 हजार से ज्यादा शब्दूं क गढवळी अर अंग्रेजी मा अर्थ दियां छन। ये मा गढवळी क औच्चारणिक विभेद तै कम से कम रखीकन गढवळी क मानकीरण तरफ बढण क एक सफल प्रयास करे ग्यायी।
ये शब्द कोष शुरू मा गढवळी भाषा क व्यायाकरण दियूं च अर शब्दकोश अर वैक बाद हिंदी अग्रेजी दगड़ी गढवळी की व्यवहारिक शब्दावली दी यीं च जू गढवळी भाषा सीखण ह्वाळू कुणी विशेष रूप से मील पत्थर साबित ह्वेली। येक तुलनात्मक अध्ययन बाबत हिंदी गढवळी,जौनसारी अर भोटिया शब्दू तै भी कोश मा जगह दिये ग्यायी। छ्वट छ्वट वाक्यांश बाद अलग अलग मनख्यूं बीच ज्ञानप्रद बातचीत बटी गढवळी मा वार्तालाप करणा बाबत रोचक सामग्री भी कोश मा उपलब्ध च।

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प्राकृतिक वनस्पति,वनौषधि, पाणी पत्थर, अर पोथिळयूं से जुड़या शब्दावली, जख लोक जीवन अर प्रकृति बीच मा रागात्मक संबंधू कु सुंदर परिचय करांद अर वखी खानपान, आभूषण, वस्त्र,लोक व्यवसाय, लोक वाद्य अर लोक गीत अर लोक पंरपरा से जुड़या शब्द गढवाळ क समृ़़़़द्ध सांस्कृतिक परिदृश्य लेकन मुख समणी मिलल। मनखी स्वभाव,लोक विश्वास, कूड़ भाण्ड, पशु अर कीड़ पतंग अनाज, शारीरिक विकार, तंत्र मंत्र, ऋतु गौं क जगहूं क नाम, रंग गिनती, दिन, राशी, नक्षत्र तिथि मैनो की गढवळी शब्दावली भी पाठकू क ज्ञान बढाण काम करदी।

ये शब्दकोश मा दीयीं अनुभूति, बोधक, ध्वन्यर्थक, गंध, बोधिक, स्पर्श, अर स्वाद से जुड़या शब्दावली गढवळी की अनूठी विशेषता च। अलग अलग प्रकार की गंध खातिर पचास से ज्यादा शब्द प्रकृति की अपार सुंदरता क बीव वैक नाद सौन्दर्य से घ्वनित शब्द अर्न्तमन तकन हिलैं दींदन। बाळपन खेल अर खिलवणी, मात्रक अर संख्यवाची शब्दू की फूलकण्डी भी ये कोश मा कम नी छन।
ये कोश क आखिरी मा पर्यायवाची, विलोम, अनेकार्थी, समानता सूचक अर शब्द युग्म दियां छन। मुहावरा, लोकोक्ति, अर कुच्छ पहेली भी ये कोश की सुंदरता तै बढाणा छन। तीनी काल मा दियी क्रिया क एकबचन रूप क माध्यम बटी नै पढवळी कुणी अपर दूधबोली मा सीखण होर भी सौंग ह्वे जाल। ये तरीका से गढवळी व्याकरण से लेकन हिंदी गढवळी शब्दकोश, बातचीत क वाक्यांश, विशिष्ट शब्दावली, मुहावरा, लोकोक्ति एक ही कोश मा समाहित कन एक सफल प्रयास च। यी कोश संग्रहणीय अर पठनीय च।
ये शब्दकोष तै घऽर मा लैकन अपर पढवळी तै अपर जलड़ तरफ त बौडेली येक दगड़ी उंक ज्ञान भण्डार भी खूब फलल फुलल। यू शब्दकोश गढवळी साहित्यकारों अर लिखवारू कुणी गुगल साबित ह्वाल। आण ह्वाळी पीढी कुणी अर गढवळी भाषा की मानकीकरण कुणी यू शब्दकोश पाणिनी की अष्टाध्यायी से कम साबित नी हूण। गढवळी भाषा क मानकीकरण मा येक योगदान ऐथर जरूर काम आल।

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