राजकीय प्राथमिक विद्यालय बुकण्डी का भवन जीर्ण शीर्ण स्थिति में, कभी भी हो सकता है धराशयी

          एक ओर सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जहॉ बड़े बड़े दिवास्पवन दिखा रही है, काम के बड़े बड़े पोस्टर बैनर और विज्ञापन जारी किये जा रहे हैं, वहीं ग्रामीणों क्षेत्रों में प्राथमिक स्कूलों के पुराने भवन इतने जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं, कि उनमें नौनीहाल और अध्यापक अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। सरकारी तंत्र की उदासीनता देखी जा सकती है कि बुकण्डी प्राथमिक स्कूल लगभग 1960-62 मे प्रारम्भ हुआ था । वर्तमान में यह भवन बहुत ही ज्यादा खस्ताहाल स्थिति में है।

           बुकण्डी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एसपी जोशी ने अपने सोशल मीडिया से एक वीडियो वायरल करते हुए बता रहे हैं कि प्राथमिक विद्यालय के ऑगन में बहुत नुकीले पत्थर हैं, जिनमें छोटे छोटे बच्चे खेलते हैं, यदि कोई बच्चा खेलते हुए गिर जाय तो उसे चोट लग सकती है। वहीं अन्ंदर फर्श टूट चुका है कही जगह पर लंबी दरारे पड़ी हुई है। भवन की दीवारें इतनी जीर्ण शीर्ण हो गयी हैं कि टीन की चद्दरों के नीचे लगी बल्लियों ने दीवारों को छोड़ दिया है और दीवारें आगे की ओर झुक चुकी हैं, जो कि कभी भीर गिर सकती हैं। ऐसे में प्राथमिक विद्यालय बुकण्डी में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को आगे आने वाले दिनों में स्कूल में भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है, बरसात और भूकम्प के दौरान कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है।

    विद्यालय की पुराने भवन के सामने ही एक अतिरिक्त कक्ष जो कि विधायक निधि से बना है उसकी छत भी टपक रही है और उसका प्लस्तटर भी टूटकर गिर रहा है, जिस कारण वहॉ पर बच्चों की पढायी नहीं करवायी जाती है, उक्त भवन भी खतरे से खाली नहीं है।

      राजकीय प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती ममता बड़थ्वाल का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण इसका मरम्मत कार्य नही हो पाया है , जल्दी ही इसके पूरे नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव विभाग को प्रेषित किया जाना है। विभाग द्वारा मिलने वाले बजट के लघु निर्माण के मद से आवश्यक मरम्मत कार्य करवा दिया जायेगा एवं विद्यालय खुलते ही सम्पूर्ण भवन के मरम्मत के लिए विभाग को प्रस्ताव भेज दिया जायेगा ।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *