ये दिन बैठण छन श्राद्ध, यू च श्राद्ध महत्व।

हर साल असूज मैना प्रौष्ठपदी पुरणमसी बटी श्राद्ध शुरू ह्वे जदिन । यू कुणी सोलह श्राद्ध भी बुल्दन। श्राद्ध 24 सितंबर बटी शुरू हूँणा छन। यी 8 अक्टूबर तक सर्वपितृ श्राद्ध तकन चलल। ये बगत लोग अपरु पितरु तै पिंडदान करल।

ज्योतिषाचार्य वीरेन्द्र जुयाल बते कि श्राद्ध महत्व बाबत पूरण ग्रंथ अर पुराणु मा लिखयू। श्राद्ध क पितरु दगड़ी भौत ही करीबी संबंध छन।

पितरु तै खाणुक अर अपणी श्रद्धा पहुंचाण एकमात्र रास्ता श्राद्ध छन। मृतक कुणी श्रद्धा से कर्यु तर्पण, पिंड अर दान ही श्राद्ध बुले जांद। अगर मृतक आदमी तै अपण कर्मो हिसाब से देव योनि मिलदी।श्राद्ध क दिन बामण तै जिमयू भोजन उते अमृत रुप मा मिलदी।

यू तिथियू कुणी छन यी श्राद्ध

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24 सितंबर 2018 पूर्णिमा श्राद्ध
25 सितंबर 2018 पड़वा श्राद्ध
26 सितंबर 2018 दूज श्राद्ध
27 सितंबर 2018 तीज श्राद्ध
28 सितंबर 2018 चौथ श्राद्ध
29 सितंबर 2018 पांचे श्राद्ध
30 सितंबर 2018 छठ श्राद्ध
1 अक्टूबर 2018 सप्तमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2018 अष्टमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2018 नौमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2018 दशमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2018 एकादशी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2018 द्वादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2018 त्रयोदशी/चतुर्दशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2018 अमावस्या श्राद्ध

पितृ पक्ष महत्व

पंडित बीरेंद्र जुयाल बतन्दन की देवताओं से पैली पितरों तै खुश कन ज्यादा कल्याणकारी हूंदीन । देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व हूंद।

वायु पुराण, मत्स्य पुराण, गरुण पुराण, विष्णु पुराणबहोर पुराणों अर होर शास्त्रों जन मनुस्मृति इत मा भी श्राद्ध कर्म क महत्व बाबत बतये ग्याई।

पूरणमसी से लेकन औंस बीच अवधि अर्थात पूर 16 दिनु तक पूरखु की आत्मा तै शांति खातिर यू काम करे जदिन। पूरे 16 दिन नियम धियम से कन से पितृऋण बटी मुक्ति मिलद। पितृ श्राद्ध पक्ष मा बामणु तै जिमये जदिन।

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