जनता इंटर कॉलेज किमसार में प्रबंधन समिति का गठन जल्दी हो, यमकेश्वर प्रधान संगठन ने की मांग

जनता इंटर कॉलेज किमसार में प्रबंधन समिति का गठन जल्दी हो, यमकेश्वर प्रधान संगठन ने की मांग

जनता इंटर कॉलेज किमसार में वर्ष 2013 से प्रबंधन समिति भंग हो रखी है, पिछले 7 सालों से प्रबंधक संचालन द्वारा विद्यालय का रख रखाव किया जा रहा है। जबकि उत्तराखंड शिक्षा विभाग की प्रबंधकीय स्कूल की नियमावली के अनुसार प्रबंधन समिति के भंग होने या अपरिहार्य कारणों से समिति का पुनः गठन नहीं होने की दशा में अधिकतम 5 साल तक ही प्रबंधक संचालक नियुक्त हो सकता है। जबकि किमसार स्कूल में पिछले 7 सालों से अभी तक प्रबंधक संचालक द्वारा स्कूल का रख रखाव किया जा रहा है।

किमसार स्कूल में वर्तमान में मात्र दो अध्यापक स्थायी नियुक्ति पर है कुछ एडाक पर नियुक्त है, शेष अध्यापक अभिभावक संघ द्वारा हर माह विद्यालय शुल्क के अलावा दिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क से इन अध्यापको को मानदेय दिया जा रहा है। इससे एक तो अल्प आय में अध्यापको का शोषण हो रहा है, वही इनके मानदेय का बोझ वँहा पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। वंही स्कूल में तीन क्लर्क में से एक ही प्रधान क्लर्क द्वारा कार्य किया जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी के तीन कार्मिक नियुक्त है। स्कूल भवन बहुत ही जर्जर हो रखा है। ऐसे में स्थानीय विद्यार्थियों को यँहा पर अनेको समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

विद्यालय में प्रबधन समिति नही होने से यँहा पर अध्यापकों की स्थायी नियुक्ति नही होने से क्षेत्रीय विद्यार्थियों को अन्यत्र मजबूरी में प्रवेश लेना पड़ रहा है, जिसका अतििरिक्त खर्च का  वहन उनके अभिभावकों को करना पड़ रहा है। यँहा पर प्रधानाचार्य भी कार्यवाहक है। इसके अलावा यँहा पर 5 प्रवक्ता और 5 ही सहायक अध्यापक के पद पिछले दो दशक से खाली चल रहे है।

विद्यायल में इन सब कारणों से स्थानीय विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकारो का हनन हो रहा है, और शिक्षा विभाग कुम्भकर्ण की नींद में सोया हुआ है। शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय में प्रबंधन समिति के गठन नही करने की लापरवाही के कारण यँहा पर शिक्षा और अन्य कार्य प्रभावित हो रहे है।


इस सम्बन्ध में प्रधान संगठन यमकेश्वर के महासचिव बचन बिष्ट ने कहा कि यदि जल्दी ही प्रबधन समिति का गठन नही होता है तो शिक्षा विभाग के खिलाफ जनआंदोलन किया जाएगा। प्रबधन समिति गठित होने के बाद ही विद्यालय के प्रान्तीयकरण की कार्यवाही की जाएगी।

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