झंगरयाळ रस्याण क्वी जबाब नी छ, झंगरयाळ झंगरयाण खशबु नाक मा जांदी भूख कबलाट शुरू

पैल लोग बुल्दी छ्यायी कि गरीबू खाण क्वाद झंगरू अर मेहमानू खाण ग्यों रूट्टी। झंगोरू से पैल कौणी पकदी, वैक बाद झंगरू। पहाड़ मा झंगवरू चटपट पकण ह्वाळ खाणुक छ, झंगरू कूटी कन झंगरयाळ बणदन। एक बगत छ्यायी जब गुरमिलाख बगत खाणुक झंगरयाळ भात हूंद छ्यायी, लेकिन आज बगत मा अब लोगू न ये तै खाण ही छोड़ी याल। उन भले अजकली शहर मा रैवास कन ह्वाळ पहाड़ी लोग झंगरयाळ तै मैहंगू दाम पर लीणा खातिर तैयार रै करदन। झंगरयाळ दगड़ी गहत फाणू, झुंगर, झुळी अर झुंगर, डुबका, मणझोळी, दही, कद्दू रैठू, काखड़ी (खीरा) रैलू, कळी कपली, पिडंळू पत्तों काफली, अल्लू झोळ, अल्लू थिचवंणी दगड़ी झगंरयाळ भात रस्याण ही कुच्छ होर छ।

झंगोर झंगरयाळ भात बणाण बौत आसान छ। ये खुणी सबसे पैल पतीला मा पाणी उमाळ दीण, लेकिन पाणी मात्रा झंगरयाळ से दुगणी हूण चिंयाद। झंगोरू अगर उरख्यळू मा कूट्या छन त वै तै धूण ज्यादा जरूरत नी छ। लेकिन मशीन मा कूट्या तै जरूर ध्वे दीण अर वै तै उमळद पाणी मा डाळ दीण। येक बाद करछुल घुमाणा रैण, ताकि झंगरयाळ भांड तळ नी लगू। अगर पाणी मथीन झंगरयाळ परळी लगणा त वै तै निकाळी दीण। इन ध्यान रखीन की तळ झळ कम हूण चियांद, उन भांड मथीन ढक्कण भी धर सकदो, लेकिन पाणी उमाळ आण पर करछी तै जरूर चलाणा रण, दस मिनट मा झंगोरू गाढ हूण लगी जाल।


बीच बीच मा दिखणा रण कि पाणी ज्यादा त नी छ, अगर छैं च त पतीला बिटी मांड निकाली ल्याण। झंगवर दगड़ी क्वी घी खाण शौकीन छन त एकाध चम्मच पतीला मा डाळ द्याव, रस्याण मा मजा ऐ जाली। अब करछी चले कन झंगरयाळ तै ढंग से पल्टी द्याण अर पाणी सूखण बाद पतीला मा ढक्कण लगाण बाद झळ कम कर द्याण। थुड़ा देर भप्याण द्याव यन पता लगाणा खुणि अजो पकी छ कि ना। पतीला झंगोरा ह्वाळ हिस्सा मा भैर बिटी पाणी छींटा मार दीणन। ये बीच अगर झंगरयाळ मा पाणी सुखी गे ह्वाव त भांड तै चुल्ल बिटी निकाळी कन चुनख्यळ मा धरी द्याण। ल्याव अब मजेदार फरफरू झंगरायाळ भात। ये झंगरयाळ झंगरयाण खुशबु पुटग पर भूख कबलाट गिच्च पर लाळ टपकण शुरू।

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