रावत डिजिटल प्रकाशन: गढ़वळि कुमाउनी भाषा किताबो तै छापिकन कना लोकभाषा संवर्धन

भाषा कू जू प्रेम छ, उ बुलण लिखण, पढ़ण, तक ही नि छ, बल्कि ये तै किताबों बिटी लोगू तकन भिजण भी एक सेवा भाव छ। उत्तराखंड लोक भाषा साहित्यकारो किताब तै छपणा कुणी एक इनी भाषा प्रेमी छन जू नै छोळी क लिखवार अनूप सिंह रावत जौक रावत डिजिटल करी कन दिल्ली मा प्रकाशन छ। अनूप रावत एक कवि भी छन। आप लोकभाषा क़िताब तै प्रकाशन कन मा सबसे पैल भूमिका निभे करदन। येक दगड़ी रावत डिजिटल किताब प्रकाशन त करदी छन दगड़ी मा लोकभाषा किताब कू ऑन लाइन प्रचार प्रसार भी करदन। आप अपरि एक गढ़वली कविता की पोथी छपी जै नौ ” ज्यू त ब्वनू च”। येक दगड़ी उन अजो तकन 6 पोथी कू प्रकाशन करियाल। जू पोथि उन अजो तकन प्रकाशित करि येन उ ई छन्न।

पोथि।               लिख्वार
1. “ज्यू त ब्वनू च” – अनूप रावत
2- बचपन एक उड़ान ( बाल कहानी संग्रह) – रामेश्वरी नादान
3. राष्ट्र चेतना और रोशन- सुनील सिंधवाल ” रोशन”
4- धार मा कू गौ छ म्यारू- पृथ्वी सिंह केदारखंडी
5- नौ वर्षक ब्या( कुमाउनी कहानी संग्रह) – रमेश हितैषी
6- पैलागून पोखड़ा( गढ़वळि गजल गौंछि) – पयाश पोखड़ा।


अनूप रावत न बते कि ये बाबत जल्दी ही ई- बुक मा गढ़वली कुमाऊनी साहित्य तै पाठकों तक पौछाणा कुणी प्रयास कना छन। उन बते कि अजकलि डिजिटल जमनू छ, अर पाठक भी अब डिजिटली ह्वे ग्यायी त उ तकन हम तै अपर लोकभाषा साहित्य तै डिजिटल या ऑन लाईन उपलब्ध करये जाण जरूरी छ।

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