दिल्ली मा उत्तराखण्डी महाकौथिग सम्पन्न

दिनेश ध्यानी रिपोर्ट
दिल्ली एनसीआर का गाजियाबाद क्षेत्र इन्दिरापुरम मा विगत 21 दिसम्बर, 2019 बिटिन उरयों उत्तराखण्ड महाकौथिग ब्याळि 29 दिसम्बर, 2019 खुणि सम्पन्न ह्वैगे। हर विधा अर गीत, संगीत से ल्हेकि पहाड़ी खान,पान अर रीति, रिवाज को महासंगम छौ ये कौथिग म। यों नौ दिनों म ये कौथिग म लाखों लोगोंन शिरकत कैरि। गौं का कलाकारों से ल्हेकि साहित्य कि बात अर पलायन रोकणां का खातिर क्य-क्य जतन करे सकेंद जां से लोक अपणा घर, गौं म हि रावन। बच्चों को कैरियर म उन्नति अर चारित्रिक सीख से ल्हेकि माराज सब्बि कुछ छौ ये कौथिग मा। ये महकौथिग को जंकजोड़ अर विचार तैं कार्यरूप देण वळा मनीषी महाकौथिग का मुख्य आयोजक अर सुप्रसिद्ध संगीतकार श्री राजेन्द्र चैहान, सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती कल्पना चैहान, महाकौथिग का अध्यक्ष श्री केवल लखेड़ा अर वोंकि पूरि टीम तैं ये सफल अर अद्भुत आयोजन का वास्ता हार्दिक बधै अर शुभकामना छन। गजब को आयोजन छौ। श्री राजेन्द्र चैहान विगत कै वर्षों बिटिन गाजियाबाद क्षेत्र म महाकौथिक को आयोजन कनां छन। विकलांग प्रतिभावों तैं मंच प्रदान कना सवाल हो चा हमरि संस्कृति तैं महाकौथिग जना बड़ा मंचों म प्रदर्शित कना सवाल हो हर काम म श्री चैहान जी अग्वड़ि रंदन।
श्री राजेन्द्र चैहान जी कि य खासियत चा कि वो अपणा हर आयोजन म गढ़वाळी, कुमाउनी कवि सम्मेलन, बच्चों का वास्ता भाषा सम्मेलन अर विभिन्न प्रकारै आयोजन बि करदन। नथर हमरा समाजा अधिकांश संगठन यना छन कि गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं तैं न खुद पसंद कर्दा न कबि अपणा मंचों म यों भाषाओं की बात करदा। कुछेक संगठन छन जो अपणा आयोजनों म अपणि भाषा कि बात जरूर कर्दन। महाकौथिग का ये आयोजन म हर बार कि तरां ये याल बि 28 दिसम्बर, 2019 खुणि गढ़वाळी, कुमाउनी कवि सम्मेलन को आयोजन बि करेगे छौ। जै म एक दर्जन कवियों न अपणि कविताओं को पाठ कैरि जौं म सर्वश्री पूरन चन्द्र कांडपाल, पयास पोखड़ा, भगवाती प्रसाद जुयाल, गढदेशी, जयपाल सिंह रावत, डाॅ पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, दिनेश ध्यानी, रमेश हितैषी, जगत कुमाउनी, ओमप्रकाश सेमवाल, जगदम्बा चमोला, एक मात्र कवियत्री श्रीमती उपासना सेमवाल अर प्रदीप सिंह रावत खुदेड़, आदि कवियों न हर विधा परैं अपणि कविताओं का रंग विखेरी। द्ववफरा म उरयों ये कवि सम्मेलन म भीड़ कम छै लेकिन फिर बि आयोजन तैं लोगोंन भौत तन्मयता से सूणि अर हर भाव कि कविताओं को आनन्द ल्हे। कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं का दगड़ि दुराचार, पलायन, रोजगार, आदि विषयों परैं गजल, गीत अर कविताओं का माध्यम से कवियांे न लोगों को खूब मनोरजंन कैरि अर व्यवस्था अर समाज परैं खूब तंज बि कैरि।
जनुकि नौ दिनों को ये आयोजन म हर बिधा परैं बात ह्वे अर लोगोंन ये महाकौथिगा को खूब आनन्द ल्हे। लेकिन ये आयोजना हैंकु पक्ष बि चा कि ये कौथिग का माध्यम से दिल्ली एनसीआर म हमरा समाजा अलग पछ्याण बि होण लगीं। पिछला साल श्रीमती कुसुम असवाल जीन बि यनि कौथिग को आयोजन ये मैदान म कैरि छौ तै दिन बि विराट कवि सम्मेलन को आयोजन बि छौ। हर विधा परैं तै कौथिग म बि चर्चा करेगेन। हमरा उत्तराखण्डी खान, पान अर पहनावा से ल्हेकि भौत कुछ संज्वयों छौ ये कौथिग म। श्री राजेन्द्र चैहान को लक्ष्य चा कि ये महाकौथिग का माध्यम से हमरा समाजा पछ्याण दीन,दुन्या म होवन अर हमस् िसंस्कृति का विभिन्न रूपों से दुनिया विज्ञ होवन। संस्कृति म गीत, संगीत प्रमुख त छैं छन पण वांका अतिरिक्त बि भौत कुछ चा जै तैं संज्वोणा कि अर दुनिया अगनै ल्हाणा कि जरर्वत चा। हमरा विलुप्त होंदा रीति, रिवाज अर गीत विधा अर जागार विधा हो चा अन्य विधा सब्यों को संयोजन होण चैंद। अर सौब से बिण्डया हमरि अपणि भाषाओं को प्रति हमरा समाजा रूझान होण चैंद। ये जमना म हमरि नै पीढ़ि अपणा रीति, रिवाज अर भाषा साहित्य से बिलग सि होण लगीं। मंचों म गीत लगंदारा सैर्या बात हिन्दी म कर्दन अर चार लैन गीत सुणै कि अफुतैं लोक गायक बुलौंदन। वनि कै कवि छन जो समूचि बात हिन्दी म कर्दन अर वांका बाद मंचों म कविता गढ़वाली या कुमाउनी म सुणौंदन। ये दुबगळया सोच अर विचार से हमतैं उबरण होलु। जब तुम गीत लगै सकदों, कविता सुणै सकदौं अपणि भाषा म ता फिर बात कनम, मंच संचालन कनम गढ़वाली या कुमाउनी भाषाओं तैं बुनम शर्म किलै?
महाकौथिग जना आयोजनों न समाज परैं प्रत्यक्ष या परोक्ष भौत सकारात्मक असर होंद। हां स्य बात अलग छा कि इथगा बड़ा आयोजन म क्वी कमी, कसर बि रै जंदन जौं तैं दूर करे सकेंद पण आयोजन की विशालता अर भव्यता का आधार परैं कुछ कमि बेसि रै जंदन जौं तैं टैम-टैम परें दूर करे सकंेद। जो मनखि बुल्दन कि यना आयोजन सिरप काॅमर्शियल छन अर आयोजक अपणु फैदा का वास्ता कना छन तो क्वी बि आयोजक अपणि कूड़ि फूकी तमसु नि देखि सकदु। जो मनखि काम कनौं चा वैकि अपणि मेनत चा अर वैकि अपणि सीमा छन। हमरू समाज तैं जब कै बि आयोजन से फैदा होण लग्यूं चा ता, कै तैं कै बि प्रकार से क्वी नुकसान नी ता फिर बे बाती बात कनि खूब नि होंदि। पण हमरा समाजा कै मनख्यों कि आदत छन कि अगर वों तैं पंच बणावा ता सौब कुछ भलु चा अर नि बणावा ता फेर देखों रांजी, बांजि कनम क्वी कसर नि छ्वडदा। अर सच बात या चा कि हम अज्यों तलक एक हैंका टांग खैंचण म हि लग्यां छंवा अर फिर पुछदा कि हमुतैं दिल्ली म क्वी बि पार्टी चुनौं म टिकट किलै नि देणी होलि? हमतैं एक समाजा रूपम मान्यता किलै नि मिनी होली? ता जब भयों तुमन मंचों से ल्हेकि मीडिया अर स्यों दलों की चैखट म सौब जगा अपणा समाजा छीछलेदारी ही करौण ता यों दलों न तुमतैं मान्यता अर टिकट किलै दिणिन? जब तलक हम लोगों न अपणा समाजा मनख्यों तै मान, सम्मान नि देणु त फिर भैने वळों से हम मान सम्माना उम्मेद कनक्वै कैरि सकदां?


कुल मिलैकि आयोजन भौत स्तरीय छौ अर हमरा समाजा पछ्याण से ल्हेकि कै लोगों का उत्पादन खूब बिकिन कतनै लोगों तैं रोजगार बि मीलि चा दस, पांच दिनों खातिर हो। राजनैतिक स्तर परैं बि गाजियाबाद क्षेत्र म हमरा समाजा स्तर बढि। स्य अलग बात चा कि हम एक समाजा तौर परैं ये मान तैं हौरि उठदौं कि आपसी टंाग खिचै से सब गडमड करदां। लेकिन पिछला साल ये ही महाकौथिग म उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी न शिरकत कैरि अर सुणण म औणौं कि गाजियाबाद म उत्तराखण्ड भवन बणाणा खाातिर जमीन बि सरकार देणी चा। ता कखि न कखि यनि हस्तियों का औण से समाज तैं बल मिलदा अर राजनैतिक अर सामाजिक स्वीकृति बि बढ़द।
हमरू समाज तैं अमणि समझणु होलु कि हमुतैं एक समाज का तौर परैं संगठित होण प्वाडलु। नथर एक हैंका टांक खिचै म हमुन यनि रैंण अर हौर दल अर समाज हमरा बांठा को राजनैतिक हक यनि मरणा राला। यना आयोजन ये मुकाम तैं हासिल कना खातिर माध्यम ह्वै सकदन। हमुतैं अपणा आपसी मतभेत अपणा भितनैं हि सुलझाण चंदन। भैने एक नेता अर एक समाजा तौर परैं आण हि होलु। इन्दिरापुरम महाकौथिग की पूरी टीम को ये सतत प्रयासा खातिर श्री राजेन्द्र चैहान, श्रीमती कल्पना चैहान अर श्री केवल लखेड़ा जी अर वोंकि पूरी टीम तैं हार्दिक बधै अर शुभकामना छन। उम्मेद कर्दां कि औण वळा समय म यो कौथिग हौर बडु मुकाम हासिल कारलु अर हैंका साल ये आयोजन म गढ़वाळी, कुमाउनी भाषाओं की बात हौरि बि सिद्दत से होलि। पुनः सब्यों तैं बधे अर नै साला बि अग्रिम बधै अर शुभकामना ।

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