मि उत्तराखंड छौ

हे सुणों मि उत्तराखंड बुलणु छौ

जन भी छौ तुमर ही अपणु छौ

चुल्लू अलग करीक नै मवस बसायी
जै पहाड़ बाना अलग हो मि
सी आज खाली ह्वे ग्यायी।।

अठारह साल बटी विकास की सिसकारी भनु छौ
कै मा लगों खैरी, द्वी सैणयूं कू एक मैस बणयूं छौ
कबि फूल की जड़ हरी करी, कबि हत्थ तै सम्भाळी
जैन जक फैदा द्याखी तक पल्दरू न बदली पाळी।।

तेरह नौन मनन तीन नौन बणीन सौकार
जौ नौन बाना पर अलग हो मि
सी आज पहाड़ बोलीकी ह्वे गेन बेकार
कखी अस्पताल कखी सड़क कखी स्कूल की खैरी
आज सरा पहाड़ ह्वे ग्याई मन्ख्यात कुणी बैरी।।

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कैमा लगणि छुंवी ये रीत पहाड़ की
बाँझ पुंगड़ी, खंद्वार हुया तिवरी डिण्डलयूं की
बेरोजगार हुया नै पढवळी की, बीमार पड्या अधबूढ़ेडू की
नौन बगैर खाली हुया सरकरी स्कूलू की।।

कैन बणेन आयोग कैन दिवस मनैन
सच्च मानो त राजनीति ह्वाल कखी जोग नि ह्वेन
स्याळ बिरळ सी मौज उड़ाणा छन
सच्च उत्तराखंड आन्दोलनकारी सी पित्र पूज्याणा छन।

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