मन्था (गढ़वाळी कहानी)

गढ़वाळी कहानी।
दिनेश ध्यानी। 23 जुलाई, 2020
मन्था।

सुबेरा टैम छौं घर गौं म लोग पाणी, ग्वीलु, गुठ्यार अर कल्यौ रोटी बणाण परैं लग्यां छया क्वी हैळ म जाणों छौ अर स्कोल जाण वळा अपणा पाटी, बस्ता तैयार करणा छया। गौं म असमान म धुुवा ही धुंवा दिखेणो छौ। वै जमना म न गैस न स्टोव होंदा छया घर गौंम्। लोग लखडु जळै कि खाणु बणौंदा छया। वै जमन म खेती-पाती खूब होंदि छै लोग रात दिन खेती किसानी म लग्यां रैंदा छया। एक घडी कै तैं बैठणा टैम नि रैंदु छयो। बरगत भी भौत छौ यीं खेती म। ग्यूं, धान, जौंए मंडुवा, कांण, मास अर दाळ क्या नि होंदु छौ। बसगाळ मंुगरी से ल्हेकि सागपात अर आडू, तिमला कखडी, बेडू, क्या क्या नि होंदा छया। जै सारी देखा जंगळों म काफुळ अर हिंसोला बुज्या अर किनगोड़ा लकदक पक्यंा रैंदा छया। गौड़ी, भैंसी, बळ्द, बखरा क्या नि छौ गोर गुठ्यार म। अहा कख गैंन वो दिन अर वो मनखी। चार, चार ज्वाळा गोट होंदि छै। सैर्या बसगाळ गोठ अर गुठ्याळों की रंगत रैंदि छै। अहा अमणि झणि कख गैंन वो दिन। खैर कथा परैं बढ़दां।

पदनों उरख्यळम कुटदरी कुटण लगीं छै। खल्याण म बि उरख्यळ म भी भीड़ छै लगीं कुटण वळों की। बुना मतलब यो छा कि सौंब लोग अपणा काम धाणी म लग्यां छया। यथगा म पदनों थाड़ म हल्ला सि सुणे देखि ता गुज्यरोंद एक कज्याण एक नौनी तैं म्वर्यों गोर सि हिंसोरदी आणी छै। जनि व पदनों थाड़ म पौंछि पदनि बोड़ि ल बोलि, कुछै ये अपणा बाबू सैणि तू? क्यों हिंस्वरणी छै तू यीं नौनी तैं?

झडझड लोग कट्ठा ह्वेगेने। देखि ता व हमारा गौंकि कज्याण अर नौनि ता छैं हि नि छन। पूछि ता पता चाळि कि वा समण्या गौं पाटी की छ अर जैं तैं व घिंधोड़णी चा व वींकि भुलि चा ज्वा ब्याळि रात मैला खोळ कैका घौर अपणी दीदि का घौर बिटिन भाजी ऐगेछै।

जन्नि व कज्याण रूकि त लोगों न भंया म प्वड़ीं वीं नौनी तैं उठाळि ता देखि वीं को मुंड परैं ल्वेखाळ हुयों अर पीठ का लारा बि चिरेगेन अर पीठि का खलड़ा ऐगेन। लोगोंन वी कज्याणि तैं भौत गाळी देन।

बोलि कनि असति छै तु हैं? निरबै करी क्या गळ्ती कैरि सी नौनी ल जो तु यनु म्वर्यों गोर सि घिंघ्वडणीं छै।
वीन बोलि कि य मेरी भुली चा। ब्याळि ब्यखुनि य भाजी कि ये गौं ऐगे। यख हमरा मैता दीदी रैंद। वों का घौर ऐगे अर हम सैर्या रात इनै उनै ख्वजणां छया कि कखि मोरि त नि गे। वनि य दिमागै भौत सगळि चा। सुबेर म्यारू आदिमन बोलि कि ये गां बि जैयादि क्या पता वख गयीं हो। जनि मि वीं दीदी का घौर पौंछु ता देखि कि स्य वोबरा म आराम से कल्यो रोटि खाणी छै।

पदनि बोड़ि न बोलि निरबै कज्याणी अगर या ये गौं ऐ भी गे छै ता तिन स्य क्या हाल कर्यां छन यींका सर्या मुंड ल्वैखाळ हुयांे अर पीठ परैं भी यना धध्वड़ा लग्यां जन बुलेंद बाघन धधोड़ि हो। असती कीड़ा प्वड़नी त्वै तैं देखि लियांदि। हैं यनु करदन कै मनखी दगड़ि? यनु त क्वी गोर तैं बि नि हिंसोरदा।

पदानी बोड़ी न झट अपणि ब्वारी खुणि बोलि कि एक गिलास हल्दी डाळी गरम दूध ल्है जरा। वोन वों द्वियों तें अपणा वोबर म बैठाळि अर गरम धूध पिलै अर वीं तैं पूछि कि तेरी दीदि त्वे मरदी चा क्या?

पैलि का व नौनी चुप रै। टुकर-टुकर कबरि अपणि दीदी अर कबरि पदानि बोड़ि तैं देखणी छै। भैर गौं का लोगों की भीड़ लगीं छै। छ्वटा नौनों खुणि तमासु हुयों छौं इस्कोल्या बि तमसु देखणा खुणि रूकिगैन। घसेरी बि देखण लगीन अर कुटदरी भी कुटणु छोड़ी देखण लगीन।
बार-बार पुछण परैं मंथा न बोलि कि मैं तैं मेरी दीदी अर जिजा मरदा छन अर सि मितैं छक्वै खाणु नि देंदा, दिनभर काम कराणा रंदन। इलै मि यों को गौं बिटिन यख भाजी ऐग्यों। मी पता छौं कि म्यरा बोड़ा जी की नौनी यख रैंद। पिछला हफ्ता मैं ता व दीदि सारि म गोर चरांद दिखे छै त वींन बोलि कबरि ऐ मेरा सैसुर। ब्याळि मैं गोरों म छो जंयों ब्यखुनि दौं गोर छानी म बांधीकि मैं झटपट भाजी ऐ ग्यों दीदी का घौर।

मंथा दीदीन चटाक वीं परैं ऐक हैंका सोटगा मारि अर बोलि झूठ बुनीं च स्य रांड़। हम न यीं म बिण्डी काम करौंदा अर न यीं तैं मरदा छंवा। य गुंदक्या गीजिगे। पाटी गौं म बि य ल्वखों ल्वखों का घौर गुंदकु खाणा जाणी रैं।
पदानी बोड़ि ज्व भौत देर बिटिन मंथा की दीदी की बात अर मंथा की बात सुणणी छै वीं पता चैलि गे छौं कि अगर यीं तैं लदोडी भोरी खाणु मिल्दु ता वा यना गुंदका किलै नियळदि? जन्नि मंथा दीदीन मंथावोंद सोटगा मारि पदानी बोडीन वीं का हथ बिटिन स्वटगी खैंचि अर चडाक, चड़ाक द्वी वींका पीठ परै मारि देन। अर बोलि कि अब ले त्वे होण लगीं पीड़ हैं कनु मरण लगीं छै। पदानि बोडिन कै नौना तैं बोलि कि अब्बि जौं अर प्रधान तैं बुला अर पटवारी तैं बि बुला यीं तैं जेल भेजा यींन यीं मंथा का क्या हाल कैरिदेन। हैं निरभागी मनखि तैं मनखि नि समझदा। अपणि भुली दगड यना कुहाल कर्यां छन ता यींन हौर्यों की पीड़ क्या समझण?
पदानि बोडी की बात सूणिकि मंथा की दीदी चितैं गे कि व गलत जगा फंसिगे। वीन पदानि बोडी का खुटा पखडी अर बोलि कि मैं से गल्ती ह्वेगे। अमणि बिटिन मि यीं तैं क्या कै तैं बि नि मरलु। मैं तैं माफ कैरि द्या।

समणि बैठी मंथा कबरि पदानि बोड़ि तैं द्यखणी अर कबरि अपणि निष्ठुर असति दीदि तैं देखिणी। मंथा का मन म झणि क्या ऐ वींन पदानि बोड़ि खुणि बोलि कि तुमन मेरी दीदी तैं किलै मारि? वा मेरी दीदी चा अर मेरी दीदी तैं क्वी मार मैं तैं भलु नि लगदु। बुल्दा-बुल्दा व रोण बैठिगे। अबरि वींका मुंडा परैं ल्वै जमि गे छौ अर माखा बि लगण बैठिगे छया। पीठ परैं भी दर्द होण लग्यों छौं किलै के दूधा गिलास वीन निसा नि धैरि साकि पण अपणि दीदी तैं पिटेंदा देखी वींका आंख्यूं म आंसू ऐगेन। मंथा बिसरि गे कि अब्बि मेरी दीदी मैं तैं म्वर्यों जानवर सि घिंसोडी ल्हाणी छै अर वींन मेरा कना कुहाल कैरि देन।

पदानि बोडिन बोलि कि देखि ल्हे ये असती। तिन यीं छोरी का क्या हाल करीन अर स्य चा कि त्वै परैं एक सोटगा कि चोट लगण से बिलबिलै गे अर एक तु छै कि वीं तैं कनि हिंस्वारणी छै गुज्यारोंद। कनु मोरि त्यारू अर यी छोरि को बि जैं तैं अपणा घा अर चोटों की पिड़ा नि दिखेणी अर त्यारा बान रूण लगी।

इथगा म मंथा का बोड़ा कि बेटी राधा ज्वा मैला खोल बिवयीं छै व बि ऐगे। असल म व सुबेर मंथा तैं कल्यो की रोटी दे कि घासा पल्या सारि चलिगे छै। वीं तैं कैन बथै कि मंथा की दीदी वीं तैं हिंसोरदा हिंसोरदा ल्ही जाणी। सैर्या गौं का लोग तैलाखोळा तमसु लग्यां छन। मथा का हाल देखी वीको मन खराब ह्वैगे। राधा न बोलि कि हे राम तिन क्या हाल करींन यीं छोरी का। अगर त्वै यीं से यथगा परेशानी चा ता यीं तैं मेरा घौर रैणि दे। मैं यी तैं सैतिपाळी ल्योंलु।

पदानी बोडीन बि बोलि कि हां ब्वारी ठीक बुनी छै तु। यना कुहाल केकु कराणी यीं बिना ब्वै-बाबू की नौनी का।
राधा न बोलि क्य बुन जी। जब य राधा चार साला छै तब यीं की ब्वै मोरि गे छै अर जगरि सात साला ह्वे बुबा जी सटिगि गैन। अमणि तक वींका बोड़ा नौना न पाळि अर अब वेकी ब्वारी न सोचि कि स्य बड़ी होण लगीं। हमरा दगड़ि रालि ता भोळ यीं का ब्यौं कना जिमेदारी कखि हम परैं नि पोड़ि जा इलै वोंन यीं तैं पाटी यीं की यी निरसी दीदी दगड़ि फटे दे। द्वी चार मैना ता सब ठीक छौं पण बादम यीं का कुहान होण लगींन। क्या बुन्न तुम्ही बथावा जब पेट म छक्वै गफ्फा नि होलु ता वींन डबकुणु चा कि ना? बस न छक्वै गफ्फा अर न लत्ता कपड़ा। दिनरात काम अर मार ही यीं मंथा का भाग म चा।
पदाीन बोड़िन बोलि कि कतना साला कि छ या मंथा?
राधान बोलि होलि क्वी सत्रा, अठारा साला। बाढण कम चा अर नि खंयान उबरि नि साकि। पदानि बोडिल राधा खुणे बोलि ब्वारी यीं मंथा तैं तु अपणा घौर सैंत पाळ अर यीं का दगड़ि नि जाणि दे। या यीं तैं मार खाण से भलु रालु कि कखि गरीब, गुरबा परिवार म यीं का ब्यौ कैरि द्योंला। झणि किलै मैं तैं बि यीं परैं दया सि औण लगीं।
राधा न झट अपणा घौर ऐकि अपणि सासु तैं बथै कि राधा तैं हम अपणा घौर रखि देंदा। त वींकि सासुन बि बोलि कि क्वी बात नीं अगर वींकि दीदी, भीना मानि जंदन ता क्वी बात नीं। हमरि बि नौनी बरौबर चा। निससि, बिससी चा। ब्वारी मैं तैं क्वी हर्ज नीं।
बस तब बिटिन राधा का दगड़ि मंथ रैण लगिगे। पदानि बोड़ि तैं झणि किलै मंथा परें भौत लाड़ आंदु छौ अर व जब बि दिखंदि छै ता पदानि बोड़ि वी तैं कुछ न कुछ देंदि छै। राधा का दगड़ि रैकि मंथा मनखि सि दिखेण लगिगे। अब वींका हाड़9,गोड़ खिलण लगींन। घर, भैर सौब काम करदी छै मंथा अर वीं खुणि राधा का घौर क्वी कमि बि नि छै। जना हौरि छया वनि मंथा भी छै। समय बितणों रैं। ऐ साल ह्वेगे राधा का घौर मंथा तैं।

एकदिन पदानि बोड़ी बुआ को नौनु अयांें छौ पदानि बोड़ि करों का घौर। मंथा उंद, उबैं जांद दौं पदानि बोड़ि का दगड़ि जरूर बच्यळु ह्वे जांदि छै। अब वीं को काम करणा सगोर बि अर बुन्न बच्याणु बि भौत बदलिगे छौ। पदानि बोड़िन वीं तैं चा दे अर वा डंड्याळ म बैठिकि चा पेण लग्या।

मंथा का जाणा बाद वे मैेमान बोलि कि कैकि नौनि चा स्या?

पदानि बोडिन बोलि कि अपणी दीदी घौर रैंद य मंथा नौ कि नौनी यीं का ब्वै-बुबा नि छन।
कखि यीं नौनी बातचीत नि ह्वे अज्यो ब्यौकि?
पदानि बोड़िन बोलि न। अज्यों कखि नि ह्वे।
हमतैं दे द्याला यीं नौनि तैं यि लोग?
पदानि बोडिन बोलि को चा नौनु ।
ता मैमान न बोलि कि म्यारू नौनु चा। दीदी तुम का जणदा छंवा मेरी जनानी बि म्वर्यां दस साल होंदन। तब बिटिन ये छ्वारा खातिर दिन कटिन मिन। स्वचणों छौं नौनु फौज म भर्ती ह्वेगे अर एक गफ्फा देणा सारू अर एक गागर पाणि ल्हेणा सारू ह्वे जांदु ता भलु होंदु। म्यारा नौनु तैं फौज म भर्ती हुयों चा अर रंगरूटी का बाद वो बौडर परैं तैनात चा।

पदानि बोडिल बोलि कि मैं बात करलु।

झट पदानि बोडिन राधा तैं सब्या धाणि बतै अर राधान मंथा दीदी-जिता खुणि पाटी गौं रैबार कैदे। हैंका दिन मंथा दीदी अर जिता ऐगेन अर वोंन बोलि कि हम तैं क्या परेशानी। राधा त्वी छै वींकि दीदी अब। सच हमुन यीं का दगड़ि भलु नि कैरि।

बस झट बात ह्वे अर टिपड़ा मीलि गे। हैंका दिन मंथा मांगण कना खातिर पांच आदिम ऐगेन। वोन बोलि कि पदानों का वोबरा मा हि मांगण होलि। मैला खोळ जगा वोंका घौर कम छै। व्यखुनि दौं पदानों का घौर पूज ह्वे अर पट्टा लगै देने मंािा का गौळा परैं। हैंका दिन मैमान विदा ह्वेगेन। सुबेर मैमानों का जाणा बाद मंथा का दीदी अर जिजा भी चलिगैन। मंथा राधा दगड़ि पदानों को वोबर म बैठी छै। झणि वीं तैं क्या याद ऐ अर व झट उठि अर पदानि बोड़ि तैं औंगाळ घालि रूण बैठिगे। पदानि बोडिन बोलि क्या ह्वे? रूणी किलै छै?

मंथा न बोलि कि यीं वोबरि म तुमन मेरी रक्षा कैरि अर अमणि यीं वोबरि म मेरो हैको जन्म ह्वेगे। अगर वे दिन तुम मैं तैं नि रोकदा अर मेरी दीदी मैं तैं अपणा घौर ल्हीजांदि ता अमणि झणि क्या हाल होंदा मेरा। मंथा की बात सूणी राधा का आंखों म बि आंसू ऐगेन।

पदानि बोड़िन बोलि कि सौब भगवानै मर्जी चा। सब वी करदा। हम तुम ता निम्मित छंवा।

बैशाखी खुणि बड़ी धूमधाम से मंथा का ब्यौं राधा का घौर बिटिन ह्वेगे। सौब मैमान अयां छया। लडका भी भौत बढ़िया छौ। सौब खुश छया। मंथा न बिदै का टैम परैं राधा अर पदानि बोड़ितैं भट्ट औंगाळ क्या घाळि कि छोड़ि नी। धवासन कै चुप करै अर वीं को बिलाप देखी सौब रूण बैठिगेन। क्या जनानी क्या मर्द। सौबों का आंखां आसूंन भ्वरेगेनं।

मंथा विदा ह्वेगे अर पदानि बोड़ि तैं लागि कि अमणि वोंन ऐ बेटी हौरि ब्यवै दे। अर राधा तैं बि लागि जन वींका घौर बिटिन वींकी भुली को डोला गै ता वो धन्य ह्वेगेन। मंथा की दीदी अर जिजा अमणि बि वीं ग्लानि अर पछतावा का कारण कै दगड़ि अक्वैं नजर नि मिलै सकणा छया पण हर्ष वों तैं भी छैं ही छया कि चला हमरि भली तैं भलु धर अर वर मीलि गे। मंथा की दीदी तैं अपणि गल्ती को अफसोस त छैं छौ पण जबरि विदा होंद दा मंथा पदानि बोडि अर राधा परैं चिपटीं छै ता मंथा की दीदी दूर बिटिन भक्वैरी आंसु बगाणीं छै। जों भुलि की विदाई का बि छया अर अपणि गल्ती का पछतावा का बि छया। अमणि जन बुलेंद वींका पाप बि धुये गै छया अर वो बि भुली तैं मरण, पिटणा पाप से मुम्त ह्वेगे छै।

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