“एक कुला चा”( हास्य व्यंग )

1972 श्रीनगर गढ़वाल म ग्रेजुएशन की पढे हूणी छै !! 
उम्र कु तकाजा @@??
उम्र हाई जम्प करणी छै।
कंट्रोल क्य ??? फण्ड फूंका ।
नयु- नयु शौक !!!!
झूट बि नि बोले जै सक्द ।

मेरु एक कच्छा दोस्त छौ ।
एक दिन दोस्तन बोलि   “आज भंगुलु प्योला” ।
मिन बोलि ” वान क्य होलु “???
दोस्तन बोलि “ये पेकी आदिम परी लोक म चल जांद” ।उन य उम्र बित कमबख्त परी लोक म सैर करण कि हूँन्द ।
पापी प्राण !!!
अब शुरु हुन्द भंगुलु की खोज ।
ढुँडद ढुँडद ##???
हमरि खोज खत्म ह्वाइ ,शहर से द्वी किलोमीटर दूर भक्तयाणा गौं का मूडी़ ,
शमशान घाट का नजदीक ,
एक बाबाजी की कुटिया म ।
बाबाजी कुटिया म एक फ्री नर्सरी स्कूल बि चलाणा छा ।
येक अलावा बाबाजी फुरसत म अपणि दैनिक दाल रोटी का वास्ता भांग की गोली बि बणान्द छा । तन बि ये इलाका म भांग की पैदावार अलकनंदा का किनरा भौत च ।
बाबाजी कु केशरी रंग कु एक चोला (जन जननों की मैक्सी हूँन्द ) पैरयूँ छौ ।
अलकनंदा के किनर घुमणा छा । भटम भटम की सी आवाज निकलना छा ।
हमन उन्का एक भक्त म पूछी य भटम भटम कि आवाज बाबाजी कख बटि निकलणान???
जन बोलेंद बारूद फटणु होलु ।
भक्तन बोलि य बाबाजी कि रात भरे पेटम इक्कठी गैस कु कमाल च । यान माछा मरदन बाबाजी ।
सच्ची !!!
हमुन बि देखी बाबाजी नदी बटि माछ बि टिपणा छा ।यू काम बि उन्कु एक एडीसनल व्यवसाय छौ ।
हमुन बाबा जी थे प्रणाम कैरि अर् अपणि डिमांड उन्का समण रखी ।
बाबा जी न एक गोली कीसा मन निकाली, हमथे दिखाई ,अर्  द्वी रुपया एक गोली कु दाम बताई।
हम द्वी आदिम ,
विद्यार्थी जीवन ,
पैसा कख छा उँ दिनु ???
बड़ी मुश्किल से आठ अन्ना ह्वे सकिन।
बाबाजी का हातम आठ अन्ना देन ।

बाबाजी गुस्सा ह्वेगेन ???
ऊँन हमर आठ अन्न फुंँड चूटे देन ,
अर् बोलि ??##।
यख त लोग ठेका कैरि भंगलु ली जंदन ।

इथ्गा म त “एक कुला चा “बि निआन्द !!!!
         
हमन वख ज्यादा देर खड़ू रेण ठीक नि समझि, निरसे कि अपण अपण घौर चल ग्याँ।

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परी लोक कि जिज्ञासा @@?
अबिबि मन म हिटणी च 

लेख्वार -निर्मल नैथानी जी





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