दूनघाटी गौं ब्यौ मा खूब छके जांद पल्लर, आवा आज हम भी जणला कनमा बणदू यू पल्लर

दूनघाटी रायपुर, रानीपोखरी थानों अर टिहरी जिला दुसांद पर लग्यां गौं ब्यौं मा अगर पल्लर नी प्यायी त समझो तुमन कुछ नी खायी। आज भी यूं गौं मा पल्लर बणाण रिवाज छ, ब्यौं मा भले ही तमाम 52 ब्यंजन बणी जाव लेकिन लोग वख जैकन पल्लर ही ढूंढे करदन। यी पल्लर रस्यांण बिल्कुल अलग ही छ, दगड़ मा सेहत खातिर बौत फैदामंद छ। आवा आज जणला कि पल्लर कनमा बणदू ।

माट घड़ मा मोळ गुफळू मा बणदू पल्लर

पल्लर बणाण अलग ही तरीका छ। ये खुणी माट घड़ तै साफ करी कन सुखये जांद। फिर थुड़सी हींग इलैची दाणा, लौंग अर काळी मर्च पौडर बणै कन वै तै घर्या घी दगड़ी वैक पेस्ट बणये जांद। वैक बाद मोळ गुफळूं तै फूकी कन वैक साबूत अंगरू मा येक पेस्ट तै रखे जांद। धुंआ उठण बाद वैक मत्थी सुखयूं घड़ तै उल्टू धरी देकर दन, जैसे धुआं घड़ पुटक भरे जाव। पेस्ट जब सरा फुके जाव तब घड़ अद्धा हिस्सा या तीन चौथाई हिस्सा पर कपड़ा मा छणयूं छांछ (मठ्ठा) भरी दींदन। वैक बाद पिसीं हल्दी अर राई बीज पाउडर तै खूब छांछ मा रळयें जांद।

पल्लर तै छौकणां अलग तरीका

वैक बाद अब शुरू हूंद ये छांछ तै छौकणा काम। ये खातिर मळ गुफळू तै जळद अंगार मा माटू गिलास या कटोरा जणी भांड पर धरे जांद। खूब गरम (लाल चचकार) हूण पर ये भांड मा सरसों तेल अंदाज डाळी दे करदन। तेल खूब गर्म हूण पर वै मा तडका लगाण खातिर धणिया डाळी कन वै तै भूरू हूण दींदन, फिर जीरा अर लाल मर्च डाळी कन, जनी तड़तड़ाट आवाज हूण लगी जाव तनी वै कटोरी जणी भांड तै चिमटा पकड़ी कन सीध वै घड़ मा डाळी कन छांछ तै छौंक दे करदन।

तीन दिन तकन पट्ट बंद भांड़ पर रखे जांद पल्लर

छांछ तै छौकणा बाद हिसाब से लूण मर्च राळीकन घड़ खाली हिस्सा तै पाणी न भर दे करदन। येक बाद घड़ मुक्ख ढकणा खातिर गोळ पेंदी ह्वाळ भांड क ढक्कण धरी कन पट्ट बंद कर दिये जांद, ताकि हवा तक नी जाव। ये खुणि घड़ अर ढक्कण बीच जोड़ पर गिल्लू आटू लगये जांद। तीन दिन तक बंद रखणा बाद चौथ दिन घड़ ढक्कण खुले जांद। फिर वैक बाद तब तैयार ह्वे जांद रस्याण भर्यूं पल्लर। ये पल्लर खास बात या छ कि यी पुटग रोग ठीक कना खुणी रामबाण बतयें जांद। यी पल्लर कत्ती दिन तकन खराब नी हूंद। ये मा खास ध्यान दीण ह्वाळ बात या छ कि जब छांछ तै छौके जांद वै बगत चंट चितवळ हूण पड़द। ये कारण या छ कि जब कटोरा जणी भांड तै घड़ मा छौकणा खुणी डळद बगत आग लपेटा उठे करदन। ये बाबत कै गोळ पेंदी भां़ड न घड़ मुक्ख ढक दीण चियांद, लेकिन दूसर तरफ बिटी घड़ मुक्ख खुल्यूं रखण जरूरी छ, ताकि आग लपेटा भैर निकळ साको, निथर ढढयाणा डर रै करदू। दूनघाटी गौं क ब्यौं मा जैकन पल्लर खूब छकी कन खैकन जरूर आण।

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