राज्यसभा सीट को लेकर उत्तराखंड में सियासत गर्म, विजय बहुगुणा, नरेश बंसल, शौर्य डोभाल दौड़ में आगे, जनता बोले पैराशूट नहीं उत्तराखंड से हो राज्यसभा सांसद

देहरादून। उत्तराखंड से भाजपा किस नेता को राज्यसभा भेजने वाली है इसका ऐलान अगले दो-तीन दिन में हो जाएगा। एक राज्यसभा सीट पर कई नेताओं की नज़र है। लेकिन इस बार पैराशूट प्रत्याशियों के मुकाबले उत्तराखंड के नेताओं का दावा ज्यादा मजबूत नज़र आ रहा है। पार्टी के अंदर भी प्रदेश के नेता को ही राज्यसभा भेजने की बात कही जा रही लेकिन वाबजूद इसके आखरी फ़ैसला आलाकमान को करना है।

उत्तराखंड में राज्यसभा की 3 सीट हैं लेकिन एक-एक सीट के चुनाव में राजनीति में कोई कमी नहीं रहती। बात इस बार के चुनाव की करें तो तय है कि बीजेपी का उम्मीदवर ही राज्यसभा जाएगा। 27 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है। यानी अगले कुछ दिनों में बीजेपी को अपने उम्मीदवर का नाम फाइनल करने के साथ नामांकन भी कराना है। बीजेपी के अंदर खाने चर्चाएं अलग-अलग नामों की हो रही है। इस बात पर भी ज़ोर दिया जा रहा है कि जिसे भी राज्यसभा भेजा जाए उसका सीधा ताल्लुक राज्य से हो ताकि राज्य के अहम मुद्दे राज्यसभा में उठ सकें।

ये नाम हैं चर्चा में
बीजेपी के अंदर पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, सरकार में दायित्वधारी व पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष नरेेेश बंसल, व शौर्य डोभाल के नाम की चर्चा हो रही है। इसके अलावा हरियाणा में संगठन का काम देख रहे सुरेश भट्ट, मध्य प्रदेश से बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के नाम की भी चर्चा है। हालांकि उत्तराखंड से बीजेपी का उम्मीदवार कौन होगा इसका फैसला बीजेपी संसदीय बोर्ड को करना है। वहीं बीजेपी के अंदर इस बात की चर्चा हो रही है कि सांसद जो भी हो, उत्तराखंड का हो।

राज्यसभा सीट को लेकर जो नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में वो है सरकार में दायित्वधारी व पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष नरेेेश बंसल का। खांटी भाजपा नेता बंसल पार्टी आलाकमान के प्रत्याशी चयन के हर पैरामीटर पर फिट नज़र आते हैं। पार्टी के प्रति समर्पित बंसल के सरकार-संगठन के साथ ही दिल्ली व स्थानीय स्तर पर सभी नेताओं से बेहतर सम्बन्ध हैं। कार्यकर्ताओं में मजबूत पकड़ है। उनके नाम पर पार्टी के अंदर आसानी से सहमति बन जाएगी।

आलाकमान के प्रत्याशी चयन के हर पैरामीटर पर फिट नज़र आते हैं नरेश बंसल

भाजपा की रीति नीति में रचे बसे नरेश बंसल का जन्म देहरादून में हुआ। उनकी शिक्षा दीक्षा भी देहरादून में ही हुई है। जन्मभूमि के साथ उनकी कर्मभूमि उत्तराखंड रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें बड़ी ज़िमेदारी देते हुए उत्तराखंड में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। भाजपा ने एक बार फिर राज्य की पांचों लोकसभा सीट पर प्रचंड जीत हासिल की। नरेश बंसल 7 साल तक महामंत्री संगठन के पद पर रहे हैैं।

उत्तराखंड से राज्यसभा सीट पर नरेश बंसल का दावा सबसे मजबूत
नरेश बंसल प्रदेश के प्रमुख व जाने-माने राजनेता हैं।वह वर्तमान मे उत्तराखण्ड सरकार मे कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति है। उनका लम्बा सामाजिक व राजनैतिक जीवन रहा है, वह लगभग 50 वर्षो से भी अधिक समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वह निरंतर संगठन के निर्देशानुसार कार्य कर रहे है तथा अपने कुशल नेतृत्व व बेहतर संगठन क्षमता एंव संगठन पद्धति के अनुसार हर कार्य करने की क्षमता रखने वाले माने जाते है। वह प्रदेश में संघ परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में स्थापित है।

प्रारम्भिक जीवन व संघ से जुड़ाव
नरेश बंसल का जन्म निम्न मध्यम वर्ग के वैश्य परिवार में देहरादून में हुआ, वेे 8 वर्ष की आयु में वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आये और स्वयंसेवक बने। इनकी प्राईमरी शिक्षा देहरादून नगर पालिका के स्कूल में तथा इंटरमीडिएट तक की सामान्य हिंदी माध्यम विद्यालय देहरादून में हुई। 14 वर्ष की आयु में उन्होने संघ का प्राथमिक शिक्षा वर्ग किया तथा बाद में संघ के तृतीय वर्ष (नागपुर) का शिक्षण लिया तथा डी0ए0वी0 कालेज देहरादून से एम॰काम तक की शिक्षा प्राप्त की।

  • 4 नवम्बर 2002 से 4 नवम्बर 2009 तक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में 7 वर्ष तक प्रदेश महामंत्री (संगठन) भाजपा उत्तराखण्ड का दायित्व निर्वाहन किया।
  • राज्य गठन के बाद सफलतापूर्वक एवं बहुत प्रयास के बाद 2006 में राश्ट्रीय कार्य-समिति भाजपा का सफलतापूर्वक आयोजन एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की विशाल जनसभा का सफल आयोजन।
  • 2007 में उत्तराखण्ड की सत्ता में भाजपा सरकार की वापसी।

उत्तराखण्ड़ सरकार में दायित्वः-

2009 से 2012 तक तत्कालीन प्रदेश भाजपा सरकार में अध्यक्ष आवास एंव विकास परिषद का दायित्व।
वर्तमान में (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) उपाध्यक्ष राज्य बीस सू़त्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष का दायित्व।

पार्टी मे प्रमुख दायित्व व कार्य।

  • 2009 से 2012 तक भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में कार्य।
  • 2012 में विधानसभा चुनाव में प्रदेश चुनाव अभियान समिति के सचिव का दायित्व।
  • 2012 में केन्द्र के आदेश पर राज्य सभा के लिये नामांकन,बाद में नाम वापस लिया।
  • 2014 में लोकसभा चुनाव में केन्द्र के कैम्पेन कमेटी के संयोजक श्री नरेन्द्र मोदी जी की अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में 3डी सभा सम्पन्न करायी एंव अन्य केन्द्रीय नेताओं के कार्यक्रम व जनसभाओं का कार्य।
  • 2004, 2009 एंव 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश के स्टार प्रचारक की सूची में सम्मिलित व चुनाव में प्रमुख सहभागिता।
  • 2007, 2012 एंव 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के स्टार प्रचारक की सूची में सम्मिलित व चुनाव में प्रमुख सहभागिता।
  • 2001 से वर्तमान समय तक विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में जाकर कार्य किया।
  • 2012 से 2019 तक प्रदेश महामंत्री भाजपा उत्तराखण्ड का दायित्व निभाया।
  • 2019 लोक सभा चुनाव मे प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भाजपा उत्तराखण्ड का दायित्व ।
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में प्रमुख भूमिका व स्टार प्रचारक एंव ऋषिकेश में एंव देहरादून में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी की विशाल जन सभा का संयोजन किया।
  • 2017 विधानसभा चुनाव से पूर्व देहरादून में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की विशाल परिर्वतन महारैली के संयोजक का दायित्व।
  • 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक व प्रदेश कार्यालय प्रभारी के रूप में चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण सहभागिता।
  • 2019 में त्रिशक्ति सम्मेलन में संयोजक का दायित्व।
  • वर्तमान मे भाजपा उत्तराखंड प्रदेश कोर ग्रुप के सदस्य का दायित्व ।
  • केन्द्रीय एवं प्रदेश भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ कार्य करने का अवसर मिला एवं दी गई जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

उपलब्धिः-

  • प्रतिबन्धित रामनवमी की शोभायात्रा संघर्षों के बाद प्रारम्भ की।
  • 1989 में डा0 हेडगेवार जन्म शताब्दी समिति का नगर महामंत्री का दायित्व,
  • 1989 में श्रीराम शिलापूजन समिति का नगर संयोजक का दायित्व।
  • श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के समय गठित उत्तरांचल संवाद समिति के कोषाध्यक्ष का दायित्व
  • विश्व संवाद केन्द्र उत्तराखंड के संस्थापक ट्रस्टि का दायित्व।
  • 1992 में बावरी ढांचा ध्वस्त होने पर बैंक से अवकाश लेकर भूमिगत होकर संघ कार्य व श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन मे सक्रिय भूमिका।

आपातकाल में कार्यः-

  • 1975 आपातकाल में सक्रिय भूमिका, सरकारी नौकरी में रहते हुए,भूमिगत रहकर संघ कार्य करना साहित्य का स्टैंसिंल काटना एवं साहित्य का वितरण एवं आपातकाल में संघ का कार्य कैसे बढे इसकी योजना बनाने का कार्य किया। 19 नवम्बर 1975 इंदिरा गांधी के जन्मदिवस पर आपातकाल लगाने के विरूद्ध वाॅल राईटिंग व टाईप कराकर पर्चो एंव साहित्यों का वितरण।
  • संघ द्वारा प्रकाशित पुस्तक (तानाशाही को चुनौती भाग-2) में आपातकाल में किये गये कार्य हेतु नाम प्रकाशित हुआ। फरवरी 1977 में सिंचाई विभाग से संघ से सम्पर्क के कारण सेवा समाप्ति का नोटिस।जुलाई 1977 में वे नौकरी छोड़कर यूको बैंक में नियुक्ति।
  • संघ कार्य- गठनायक, गण शिक्षक, मुख्य शिक्षक, मंण्डल कार्यवाह, सायं कार्यवाह, नगर कार्यवाह, बौद्धिक प्रमुख, जिला सम्पर्क प्रमुख एवं जिला प्रचार प्रसार प्रमुख के विभिन्न दायित्वों का निर्वाहन 1967 से 2001 तक किया।1989 से 2001 तक विभिन्न विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव में समन्वयक का दायित्व निर्वाह्न किया।
  • 1972 से 1974 तक विधार्थी परिषद के नगर कोषाध्यक्ष् का दायित्व सम्भाला।
  •  1977 में विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक का दायित्व।
  • 1980 से 1986 तक हिन्दू जागरण मंच के नगर अध्यक्ष का दायित्व वहन किया।
  • 1991 में उत्तरकाशी में भूकम्प राहत कार्य के लिए बनी संघ परिवार की उत्तरांचल दैविय आपदा पीड़ित सहायता समिति का गठन हुआ। जिसमें स्थापना से वर्ष 2011 तक (20 वर्ष तक) महामंत्री का दायित्व निर्वाहन किया, तत्पश्चात उपाध्यक्ष ।
  • सरस्वती शिशु मन्दिर का संचालन करने वाली बाल कल्याण समिति के पहले महामंत्री व वर्तमान में अध्यक्ष का दायित्व। प्रदेश शिशु मंदिर परिवारों की आर्थिक सहायता हेतु विद्याभारती शिक्षा विकास निधि न्यास में कोषाध्यक्ष।
  • अमर उजाला द्वारा “उत्तराखण्ड उदय श्री“ सम्मान से सम्मानित,
  • हयूमन राईट्स एंव विभिन्न संस्थाओ द्वारा उत्कृष्ट सामाजिक जीवन के लिये सम्मानित
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