दि हाईहिलर्स ग्रुप द्वारा ऐतिहासिक गढ़वाळी नाटक राणी कर्णावती को सफल मंचन

दि हाईहिलर्स ग्रुप द्वारा ऐतिहासिक गढ़वाळी नाटक राणी कर्णावती को सफल मंचन।

दिनेश ध्यानी रिपोर्ट

नै दिल्ली 1 दिसम्बर, 2019 खुणि बाल भवन आईटीओ को मेखला झा आॅडोटोरियम म दि हाईहिलर्स ग्रुप द्वारा राणी कर्णावती गढ़वाळी नाटक को सफल मंचन करेगे। वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीमती सुशीला रावत जी को लिख्यूं अर वरिष्ठ रंगकर्मी अर निर्देशक श्री हरि सेमवाल द्वारा निर्देशित गढ़वाळी नाटक गढ़वाळ राज्यै कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि परैं केन्द्रित चा। कला अर मंच संचालन अर नाटकै प्रस्तुति का हिसाब से नाटक भौत भलु अर दर्शकों तैं बांधिकि रखण वळु छौ। खचाखच भ्वर्यों हाल अर दर्शकों की खामाशी बतौणी छै कि नाटक कतगा भलु अर दर्शकों तैं बांधिकि रखण वळु छौ। वरिष्ठ रंगकर्मी सर्वश्री खुशहाल सिंह विष्ट, बृजमोहन शर्मा वेदवाल, गिरधारी रावत, जगमोहन सिंह रावत, हरेन्द्र रावत,महेन्द्र रावत, धीरज कोठियाल, हिमांशु राणा, गौरी रावत, अर पैलि उत्तराखण्डी फिल्म जग्वाळ की नायिका श्रीमती कुसुम विष्ट, श्रीमती मंजू बहुगुणा अर सुश्री सुमन खण्डूरी, समेत कै कलाकारों समा बांधि दे। कोरस गायन म अंकित भण्डारी, महेन्द्र रावत आदि न नाटक तैं नै मुकाम दिलै दे।


नाटक बतौंद कि हमरा उत्तराखण्डै राणी कर्णावती न मुगलौं तैं उत्तराखण्ड म औण से पैलि हि घुटनों का बल पर गिरै देने अर बुल्दन कि आततायी मुगल सेना का पच्चीस हजार का लगभग सैनिकों तैं बंदी बणैकि वों का नाक काटि देन। तब बिटिन राणी कर्णावती को नौ नकटी राणी पोड़िगे। स्य बात अलग चा कि वै जमन मा मुगल आतंकी उत्तराखण्ड नि पौंछि सक्यां लेकिन अमणि उत्तराखण्डै भूमि चै तरपां बिटिन शाजिस का तहत सि घ्यरणां छन अर हमरा नेता अर सरकार वोट बैंका चक्कर म पुरखों की भूमि तैं कुर्चणी चा। हम लोग चुपचाप द्यचाण लग्यंा छंवा अर भैनै वळा ध्यरणां छन।
कुल मिलैकि नाटक को मंचन अर कथानक भौत भलु छौ। बगत-बगत परैं हमुतैं अपणा इतिहास अर वीर पुरोधाओं तैं मंच, नाटक अर लेखन का माध्यम से अगनै ल्याण प्वाडलो। राणी कर्णावती को योगदान क्या वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई से क्वी कम छौ पण फरक यो चा कि हौरि समाज अपणि भाषा, संस्कृति अर वीर महापुरूषों तैं अगनै ल्ंदन अर कुछ समाज यनु होंदन कि वो अपणि धुन म हि नचणां रंदन। दुख का दगड़ि बुन प्वडद कि हमरू समाज तैं बि अपणां इतिहास पुरूषों से क्वी सरोकार नी, अपणि भाषा, साहित्य से क्वी लगाव नी ।बल्कि हमरा स्वनामधन्य लोग अपणा इतिहास पुरूषों अर वोंका परिजनों की दुर्दशा देखिकि चुप रंदन। अपणा संस्कृति अर साहित्यकर्मियों परैं हंसदन। लेकिन बुन नि होलु कि दीदि श्रीमती सुशीला रावत जीन यो ऐतिहासिक नाटक लेखि अर वै दौर म समाज तें दे जबरि उत्तराखण्ड म भैर वळा लोग घुसपैठ कनां छन अर हम लोग अपणा चांठों तैं छोड़िकि भजण लग्यां छंवा।
समाजसेवी श्री कुलदीप भण्डारीन बोलि कि श्रीमती सुशीला रावत जीन हमरू आग्रह परें यनु नाटक लेखि अर भौत कम समय म लेखि य भौत भलि बात चा। हम सब्यों तैं अपणा समाजा संस्कृति, साहित्य का उत्थान अर प्रसार का वास्ता काम कर्यों चैंद। श्री खुशहाल सिंह विष्ट जीन सब्यों को आभार कैरि अर बोलि कि आप लोगों को सहयोग से हि यना कारिज सुफल होंदन। बेटी को ब्यों करणु आसान चा पण एक नाटक करणु भौत मुश्किल चा। श्रीमती सुशीला रावत जीन बोलि कि हमरू दायित्व चा कि अपणि संस्कृति अर सरोकारों का प्रति सजग रंवा।
ये आयोजन म समाज का कै बुद्धिजीवी, साहित्यकार, पत्रकार अर बड़ि संख्या म हमरि मातृशक्ति बि बिराजमान छै। जौं म सर्वश्री रमेश घिल्डियाल, डाॅ कुसमु नौटियाल, डाॅ सतीश कालेश्वरी सपत्नीक, वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश गौड़, उत्तराखण्ड पत्रकार फोरम का अध्यक्ष श्री सुनील नेगी, साहित्यकार दिनेश ध्यानी, रमेश हितैषी सपत्नीक, वरिष्ठ रंगकर्मी अर उत्तराखण्ड फिल्म एवं नाट्य परिषदै अध्यक्षा श्रीमती संयोगिता ध्यानी, श्रीमती रूचि जैमिल, प्रताप सिंह थलवाल, प्रदीप वेदवाल, जीपीएस रावत समेत कै लोग उपस्थित छया।
दि हाईहिलर्स ग्रुप तैं भौत-भौत बधै अर शुभकामना छन। उम्मेद कर्दां कि मंच का माध्यम से यन्नि भलि कृति समणि आलि अर हमरि नै पीढ़ि अपणु गौरवशाली इतिहास अर महापुरूषों से रूबरू होलि।

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