90 साल की उमर मा जीवटता परिश्रम अर संकल्प मिसाल श्री शिवदत्त सुयाल।

आज क बगत मा जख मनखी 50 साल उमर पार करना उ दवायी अर इलाज भरोसू पण अपणी अगन्या जीवन तै ठिलणा। आज बगत मा जख एक तरफ मनखी औसत उमर घटण दगड़ वैक शारीरिक क्षमता भी घटी ग्या। ये सब कारण छ बदलन ह्वाळ मनखी दिनचर्या अर खान पान। लेकिन आज भी हमर पहाड़ गौं मा यन यन लोग भी दिखणा कुणी मिलदन जू कि 80 साल से बिण्डी उमर मा भी पूर काम करणा छन। आज हम यनी एक मनखी बात कना छवां जू 90 साल से उब्ब ह्वे गेन पर अपणी दिनचर्या कारण आज भी नै छोळी नै ज्वान तै पैथर छुड़ना छन। आज हम श्री शिवदत्त सुयाल, गौं सौड़, द्वारीखाल विकासखण्ड रैवासी बाबत आप समणी उंक योगदान अर उंक सेवा भाव रखण प्रयास करणा छवां।

                   जीवन परिचयः- श्री शिवदत्त सुयाल, नौन श्री स्व0 किशनदत्त सुयाल, गौं सौड़ पट्टी डबराळस्यूं जिला पौड़ी गढवाळ जौंक जलम नवम्बर 1928 मा एक साधारण घऽरया कुटुम मा ह्वायी। छ्वटु बिटी पढण लिखण शौकीन छ्या पर ब्वे बाप वै बगत हिसाब से बिण्डी पढै लिखै नी पायी। भगवान अर कुल द्यवतों आशीर्वाद न 26 अगस्त 1948 मा बंगाल इंजीनियरिंग मा भरती ह्वे गेन। 22 साल तकन देश सेवा करी अक्टूबर 1970 मा सेवा निवृत्त ह्वेगेन। पढ़ण लिखण अर दगड़ मा पढाण लिखाण शौक हूण से 1970 मा ही जूनियर हाईस्कूल चैलूसैण मा  मास्टर बणी नौन्याळूं तै पढाण लगी गेन। पढण लिखण दगड़ पूजा पाठ अर भगवान प्रति उंक सदनी आस्था रायी। निस्वार्थ भाव से पढाण लिखाण दगड़ी पूजा पाठ करण उंक जिंदगी मकसद रायी। आज भी 90 साल उमर मा उ अपणी दिनचर्या नी बदली। अपण काम दगड़ा दगड़ी अपण परिवार पण ध्यान द्यायी। आज सब्ब राजी खुशी से उंकी सेवा करणा छन। 1975 मा ’नागदेव गढी’ महन्त श्री गंगा गिरी जी बण्यूं जूनियर हाईस्कूल मा हेडमास्टर बणी गेन अर 1980 तकन यी स्कूल मा अपणी सेवा द्याण रैन। 1980 -1990 बीच जू0हाईस्कूल चाक्यूसैण मा  एक मास्टर बतौर निशुल्क नौन्याळू तै पढाण रैन। 1990 मा उंक मन बदली अर अपणू पूर ध्यान ’शिव मंदिर ’ ग्राम सौड़ पर लगायी। शिव मंदिर तै नै बणाण  खातिर उन कमर बांधी द्या। बिना कै सि़द्ध पुरूष सहयोग बिना यू काम पूर ह्वे नी सकदू छ्या तब उ अपणी मन बात अर प्रस्ताव लेकन नागदेव गढी मंदिर महात्मा श्री श्री गंगा गिरी जी समणी गेन। महात्मा जी उंक बात ध्यान से सूणी अर एक शर्त रखी कि अगर मंदिर चैक मा रोज सुबेर श्याम द्यू बत्ती बळणा राव अर पूजा पाठ ह्वाल तब जैक यू मंदिर बणये संकयादं। अगर तुम यन करण सौं खदों त मी ये काम मा सहयोग करलू। तब वै दिन वै बगत ही श्री शिवदत्त सुयाल जी संकल्प ल्यायी कि मी मंदिर मा रोज सुबेर श्याम द्यू बत्ती करलू। संकल्प ल्याण आसान हूंद पर निभौण कठिन, पर आज तकन उ अपण सौ अर संकल्प तै निभौणा छन। उंक प्रयास अर गौं रैवास्यूं सहयोग से सौड़ गौं मा मंदिर बणी तैयार ह्वेगे। ये मंदिर तै बणाण मा उंक दगड़ साथ द्यायी श्री कुलानन्द सुयाल, श्री पूरण सिंह भण्डारी, श्री केशवानंद सुयाल, अर कर्नल केशाश चन्द्र सुयाल दगड़ी सब्बी गौं रैवास्यूं ये काम मा अपणू योगदान द्यायी। आज भी ये मंदिर मा सुबेर श्याम द्यू बाती जगाण काम श्री शिवदत्त सुयाल निस्वार्थ भाव से करणा छन।

Loading...

         श्री शिवदत्त सुयाळ जी अपण बचन पूर श्रद्वा से निभैन। दिन रात या घाम बरसात जड्डू आॅधी तुफान ह्वा पर उ अपण बचन अपण काम से पैथर नी हटीन। उन अफु तै कब्बी कमजोर नी हूण द्यायी। अब उंकी इच्छा छ कि मंदिर मा द्यू बत्ती जगाण काम उ यन आदिम तै सौंपण चंदन जू ये तै पूर्ण निष्ठा से निभै साकू। अर यू मंदिर आस्था जगहा बण्यू राव। अपण गौं विकास अर क्षेत्र विकास दगड़ा दगड़ी अपणू विकास करण रैबार भी द्याणा रै करदन।

श्री शिवदत्त सुयाल जी दिनचर्याः – मनखी तै बड़ू बणांद उंक दिनचर्या अरं उंक अनुशासनन अर उंकी आदत। शिवदत्त सुयाल जी दिनचर्या जू कि सब्बी मनख्यूं कुणी खास करी नै ज्वान दगड़यो जौन अफीक भी अगड़ी बढण अर समाज तै भी अगन्या बढाण। श्री शिवदत्त सुयाल 90 साल उमर तै पार करी गेन पर आज भी उ 50 साल जणी जोश छ। अजों भी ई उमर मा रतखुळ मा उठी नये धुये मंदिर मा जैकन द्यू बत्ती करदन अर जब मंदिर घण्टी बजद तब गौं लोग बिजे करदन अर समझी जैकर दन कि सुयाळ जी पूजा ह्वेगे। मंदिर गौ। बिटी तकरीबन अ़द्धा किमी दूर पर नदी किनर बण्यूं। ये उमर मा भी गळ चढणा अर उतरना छन। उं तै आराम पंसद नीछ दिनभर कै ना कै काम अपणू तै बिळमयूं रखे करदन। उंक अपणू नियम छन जन बगत पण उठण, नयाण धुयाण, पूजा पाठ करण, खाण प्याण अर रात बगत पन स्याण। भगवान प्रति उंक अटूट विश्वास छ। जै दिन उन मंदिर मा द्यू बत्ती संकल्प ल्यायी वै दिन उन भगवान शिव तै भी अपणू बचनू बांधी द्यायी। उन भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करी कि जिबर तकन मी छौं तबरी तकन मंदिर मा द्यू बत्ती जगणा रैली पर ये बीच मा क्वी आधा बाधा नी आण चियांद। सैद भगवान शिवजी उंक या बात माणी अर आज तकन यन क्वी दिक्कत नी आयी। उन अपणू संकल्प पूर करण खातिर ना ठण्ड द्याखी ना गरमी ना बरसात, ना आॅधी ना तुफान, अर ना जंगळी जानवर डर। बस उन अपणू जीवन लक्ष्य बणायी मंदिर मा द्यू बत्ती बळण। उंक व्यक्तित्व बाबत सरा गौं ह्वाळ बतै करदन कि उन कब्बी कै कुन बुरी वाणी नी निकाळी। उन कब्बी कै प्रति क्वी छल कपट नी करी येकी कारण से ना उ गलत देख सकदन अर ना गलत काम कन दे करदन। नशीली चीज बीड़ू तम्बकू शराब सिगरेट मांस मंछली तै कब्बी उन द्याखी नी छ।

    श्री शिवदत्त सुयाल जी शिक्षा से प्रेम हूण कारण उ गौ स्कूल्या नौन्याल्ळ तै निशुल्क पढै लिखै अर उंते हमेशा भली शिक्षा द्यायी। बाट पर चलण ह्वाळ नौन तै सवाल पूछण सही जबाब द्याण पण उंते अपणू तरफ से ईनाम द्याण उंक आदत मा बस्यूं च। शिवदत्त सुयाल बाबत गौं रैवासी बतै करदन कि उन सामाजिक कार्य मा सदनी अगड़ी रैन। ब्यौ बराती मा कुच्छ साल पैल तनक अरसा बणाण जिम्मेवरी उंकी हूंदी छे अर उंक अरसा वै इलकू मा खूब पंसद करे जंदीन। आज भी लोग उंक बणयां अरसों स्वाद नी भुलीन।

       श्री शिवदत्त सुयाल आज 90 साल उमर मा अपणू गौं मा ही रैवास कना अर अपणू संकल्प तै पूर करण दगड़ी गौं मा रैकन पूर काम काज करणा छन। लोगू बुलण छ कि आज तकन उन अपणू सेहत बाबत कब्बी क्वी दवै नी खायी। आज भी उ स्वस्थ छन अर लोगू कुणी प्रेरणा स्त्रोत छन। खासकरी नै पीढी बाबत उ एक आदर्श पुरूष छन उंसे सीख लेकन फिर कई शिवदत्त सुयाल जणी मनखी वै गौं मा ह्वेकन गौं नौ रोशन कर सकदन।

 

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *