श्री सिलसू महादेव मंदिर – कड़थी(उत्तराखण्ड)”

 श्री सिलसू महादेव मंदिर – कड़थी(उत्तराखण्ड)   लिख्वार -श्री विश्वेश्वर  प्रसाद सिलस्वाल

आज मी आपतें दर्शन करांदू प्रसिद्ध  पौराणिक  श्री सिलसू  मंदिर  कड़थी,पोस्ट-सिलोगी,द्वारीखाल ब्लाक,लैंसडाउन  तहसील,पौड़ी  गढ़वाल (उत्तराखण्ड ) क । 

श्री सिलसू मंदिर तकरीबन 150 साल  से अधिक  पुराणु बतैं जांद. जन कि मंदिर क वर्तमान पुजारी श्री लच्छी राम सिलस्वाल जी न बताई  अौर अन्य दाना-स्याणा भी बतांदन।

श्री सिलसू मंदिर क उत्पत्ति व शुरु हुणा भी अलग -अलग कहानी छन. जन कि अधिकतर गढवाल क मंदिर क बारा मा सुणे जांद कि रात मा एक गौडी आंदि छै भैरव गढी तरफ बिटिक जू रोज एक जग्गा मा पेड़ क ताल दूध छोडी जांद छै त एक दिन विंक मालिक न लुकि कन विंक पीछा कार त वै त सब पता चलि ग्या त तब उखम मंदिर क निर्मा करै ग्या।

पर दुसरी कहानी ज्यादा विश्वसनीय लगदि।

वू किले कि सिलसू देवता क पूजा मा मंदिर क पेलि भगत अर पुजारी गुमाल ठाकुर क नाम भी आंद।

गुमाल ठाकुर क गोठ छे करीं कड़थी क डांड मा।

त गुमाल एक जग्गा माव गौरु-बाखरुक क कील  गठणु छाई त वे ते एक आकाशवाणी  सुणै द्याई. यखम कील नि गाड़ या मेरी जग्गा च। त गुमाल  हैंक पुंगड़ मा ऐथर सरकी कील घटण बैठि ग्या.

त फिर एक भारी सी आवाज आई कि या भी मेरी जग्गा च हौर फूण्डु जा.

वैन आपरि गोठ पैऽल कि फांग मा रैणि द्या अर स्वाच कि भौल ही गोठ बदलै जालि द्वी चार भाईयूं क दगड़

आपर ढुंगुऽल खैन गुमाल ठाकुर न अर सै ग्या.

राति वैक सुपन्यू मा एक बाबा आई कि मी शिवजी रुप सिलसू बाबा छौं । उतना जग्गा म्यार च त वूं फांगू ते तुम लोग मै खुणि छोड़ी द्यावा।

सुबेर वैन वीं जग्गा मां जैकि घी क धुपाण जलाई अर हौर गुठेतूं ते भी रात क आकाशवाणी  व बाबा क सुपिन मा आणा क बात बतैं  त सब्ब्यूं वू पुंगड़ सिलसू बाबा कुन छोड़ि दैन अर तब बिटिक वखम श्री सिलसू देव बाबा क पूजा शुरु करै ग्या। अर गुमाल ठाकुर तें पैलि पुजारी मने जाव तु या कहानी सत्य प्रतीत हुंद।  त श्री सिलसू बाबा ,शिव महादेव के ही प्रतिरुप है, तब बिटिक वीं जग्गा पर पूजा अर्चना शुरु करै ग्या अौर जतना फांग बाबा  जी  सुपिना मा छुडणा को बोलि छया वू सब्बि गौं वालूं न दिवता कुणि छोड़ी देन। तब्बि बिटिक वखम श्री सिलसू बाबा क पूजा शुरु करै ग्या। वा जग्गा तीन चार बीघा करीब च. बाद म  वखम मंदिर बणै ग्याई अौर बुले जांद कि भौत भारि कुऽलें अर बड़ क स्य़ूं जड़ जग्गा बिटिक बल्कि दूर दूर गौं बिटिक उठेकि लये गैं।  अब्बि भी कत्तेई डाऽल छन जू सैकडों साल पुराण छन।

कुछ समय क बाद गुमाल जी न गाँव क भट्ट  लुखु तें सिलसू मंदिर क पूजा कन्ना कु बोलि द्याई त भट्ट  लोग पुजारी बणि गैन।

लेकिन कुछ सालू क बाद भट्ट  लुखु तें भी मंदिर  क पूजा कन्ना कुन्न बाबा जी सुपिन मां एक मना कैरि द्याई  अर आदेश द्याई कि बाबा क पूजा कन्ना कुन सिलसू गाँव बिटिक पुजारी सिलसवाल पुजारी  लये जाव जू कि डांड क नागराज क पुजारी भी छन ।बाबा क भट्ट  लुखु से पूजा नि कराण क अलग अलग कानी छन जौंक जिक्र कन यखम आवश्यक  नी किले कि मुख्य विषय श्री सिलसू मंदिर क बार मा लिखण च।

इन्न बुले जांद कि सिलसू गौं ,जू कि बंडिलस्यूं पट्टी  मा च ,भट्ट  लोग द्वि भाई  श्री करणी अर श्री भरणी ते आपर गौं कड़थी क श्री सिलसू बाबा क पूजारि बणाण कुन लैन।

यखम बताण जरा यू भी च कि सिलसू गौं क सिलस्वाल जाति क लोग ही तब प्रसिद्ध  डांडा क नागराजा पुजारी  भी छाई अर अब्बि भी छन पर कुछ अब आपरि जाति सिलस्वाल क जग्गा पर देशवाल लिखण  बैठि गैन पर कड़थी मा वख बिटिक  आयां  लोग अब्बि भी सिलस्वाल ही लिखदान आपरि पूर्वजू क तरां।

कड़थी क सिलस्वाल लोग मीट-मच्छी व अण्डा कुछ भी  नी खांदन। शुद्द शाकाहारी  छन। सिलसू दिवता क कैर च वूं ते। यख तक कि जख भी लड़का ब्यौ क बात चलदी त वी लड़की पर जन्नि रिश्ता क टीक लगदू त स्वतः  ही वीं ते शिकार से घिण ह्वै जांद। हा सिलस्वाल लड़की  जब शादी वैक कै दूसर गौं मा चलि जांद त फिर विंक शिकार खाण क कैर खतम ह्वै जांद.

अब मी आपते सिलसू मंदिर क पुज्यारुं क बारा मा कुछ बतांदु।

त सिलसू गौं बिटिक द्वी भाई कड़थी मा लये गैन साब। पर शर्त या रखै ग्या कि सिलस्वाल लुखुक पधान भी अलग व्हाल अर जमीन भी अलग अच्छी दिये जाव।

त सब्बि शर्त कड़थी गौं क भट्ट  लुखुनु मानी अर वूं मां एक भै पुजारी बणि ग्या अर दूसरू खेतिहर।

तब बिटिक आज तक सिलस्वाल जाति ही श्री सिलसू मंदिर क पुजारी छन. वर्तमान मा पंडित श्री लच्छी राम  सिलस्वाल जी श्री सिलसू मंदिर  क पुजारी  छन.

मंदिर  क पुजारी कुर्सी  पर पंडित क भार सोपणा का अधिकार भी सिर्फ़  भट्ट  पधान परिवार  ते ही च.

बाबा क आदेश पर जब भी नये पंडित  बणदू त पधान परिवार क वंशज मंत्रौचार अर लम्बी पूजा अर्चना क बाद नै पंडित ते मंदिर क भीतर बैठाया जयेंद.

वैसे पैलि गाय क दूध , दही ,शहद , गंगा जल ,गौ मूत्र आदि कत्ती  तरल चीजूं से नै  पंडित ते पांच बेरि नयही जेयेंदु । गौ पूजा करै जांद । तब जैकि पंडित जी  ते कंधा मा उठे कन मंदिर भीतर बैठालि जांदू। हर नै पंडित क बण पर इन्नि पूजा करै जांद। अर मंदिर क पंडित भी पुजारी कुटुम्ब परिवार क बणि सकदू। पैली त हर तीन साल मा सिलसू दिवता मंदिर मा नौ दिन नौ रात क मण्डाण लगदू छाई पर अब  कै खास पूजा पाठ क समै पर ही लगद ।

श्री सिलसू मंदिर,कड़थी क पूजा साल मा द्वि बैर हुंद।

बिखोति (बैशाखी)  खुणि अर दशहरा क दिन। जै मा कि आस पास क सब्बि गौं क लोग  अर देश -प्रदेश व विदेश मं रैण वाल कड़थी क प्रवासी लोक त आंद हि छन पर गौं की  बैणि भाणज, फूफू भी आपर दिवता क चौखट पर आदिंद।

श्री सिलसू नंदिर क टीक- पिठै (तिलक) क भी भौत ही महत्व च। यू टीक गौं की साटी (धान) क पैलि कटीं क चौंल से बणदी। गौं मा जब भी सट्टी कटे जांद छई त पैली सट्टी क पूऽअलि सिलसू दिवता क नाम सव टीक क वास्त रखै जांद छै । अर जब तक दिवता क पूजा नि व्है जांद तब तक क्वी भी एक दाणी भी जीभ मा नि धैर सकदू। अगर कैनि गलति सै भी इन कार त सिलसू बाबा वै त आपर छैल दिखेक खबरदार कैरि दींद।

दूसरी मुख्य बात सिलसू गौं क च कि मंदिर मा आठ गौं क शुद्ध गौड़ी  क दूध चढै जांदू।  बुले जांद कि नजदीक क यूं आठ गौं ,(१) कल्शी-कुठार (२)नैल-रैंश(३)मऽल (૪) दबड़ा (५) गढ बड़ैथ (६) बन्नी (७)कड़थीब(८) जल्ली  क ,दूध  मंदिर मा चढै जांदू । दूध पिजाण वालि व चढाण वाऽल परिवार भी शुद्ध हुण चयेंदि। मतबल वे परिवार मा क्वी सूतिक नि हूण चयेंदु ।

अगर कैनि भी लिस्ट भिस्ट दूध मंदिर  मा चढाण कून द्या त सिलसू बाबा वे दूध ते स्वीकार नि करदू.। दिवता कुण्ड मा जब दूध चढै जांद त कतना भी व्हा वू सब दूध छुटु सी कुण्ड मा समै जांद अगर गंदु दूध व्हाल त वू उमलि कन भैर खतै जांद। कुण्ड मा थूड़ा दूध चढाण क बाद बच्यूं दूध क खीर बणदि अर वू प्रसाद सभी भक्तो ते बटै जांद छाई। अब त गौं मा लैंद भी कम ही रै गैन अर आठ गौं मा लोक भी त कम ही दूध मंदिर मा चढदू।

मंदिर क मुख्य परसाद  भैलि क गुड़  च. गौं क हर परिवार भिल्ली पूजा क दिन मंदिर मा भिल्ली चढांदन । सर्रा गौं मा वीं भिल्ली क परसाद बटैं जांद। भिल्ली क कुछ टुकड़ा मंदिर म पुजारी जी रखि दिंदान जू समै समै पर जू भी मंदिर क दर्शन खुण आंदन त वूं ते परसाद क रुप मा दिये जांद. अगर केतै भिल्ली नि भी मील त गिंदौड़ा भी कत्ती चढाण छन

 पर सिलसू मंदिर  क असली भेंट भिल्ली ही जन कि कोटद्वार क श्री सिद्दबली मंदिर क.

जब भी आप लोग श्री सिलसू मंदिर क दर्शन कु जैलि त कोटद्वार या ऋषिकेश  बिटिक भिल्ली लिजाण नि भुलिन।

आप श्री सिलसू महादेव मंदिर ,कड़थी क दर्शन क वास्ता  ऋषिकेश  या कोटद्वार  बिटिक बस या जीप-कार लेकि सिलोगी तक जै सकदान । सिलोगीक दूरी ॠषिकेश मान  60कि.मी व कोटद्वार  बिटिक लगभग 65 कि.मी. च । दिल्ली  बिटिक रेलमार्ग द्वारा आप कोटद्वार  व ऋषिकेश  जै सकदि छवा । हवाई यात्रा  स भी े यदि आप जाण चाहंदान तदिल्ली से जौलीग्रांट देहरादून हवाई  अड्डे तक सीधी फ्लाइट  चव। वख हरिद्वार  ,ॠषिकेश खुणि बस व टैक्सी सुविधा आसानी से उपलब्ध  च  । दिल्ली  से हरिद्वार  तक भौत तेज गति की ट्रेन क सुविधा भी च । हरिद्वार  से 25 कि.मी दूरी पर ऋषिकेश तक आराम से बस या टैक्सी किराये पर लेकि जये जा सकेंदु च ।ऐथर क यात्रा  ऋषिकेश – नीलकंठ वाऽली रोड़  पकड़ि कन  घटूघाट-गैण्डखाल बिजनी वह्मैकन  घुमावदार  खूबसूरत पहाड़यूं  क दर्शन करद -करद सिलोगी पहुंचि कन पैदल तीन-से-पाँच किलोमीटर कर मंदिर  तक तीन से पाँच  किलोमीटर  की यात्रा  कना क बाद पहुंची जे सकेंदु।  तीन किलो मीटर क पुराणु  रस्ता जरा लमडण वालु अर  ऊबड़ खाबड़ च  पर  पाँच किलोमीटर  फेर वाल रस्ता जरुर छैं च  पर कच्ची सड़क जन सैण च जू  कि आपते श्री वैष्णो  देवी माता की याद दिले  दींद। गुरौ जन लपट दार ऊबड खाबड़ पगड़ण्ड्यू पर जाण से  ट्रैकिंग करद -करद  भक्त जनों ते मंदिर चौक मा पहुँचि कन   एक  अलग ही शांतिपूर्ण  वातावरण  की अनुभूति मिलदि। आप धर्मशाला  मा  रात्री  विश्राम भी कैरी सकद छवा ।

     यदि आपतें  रात्री विश्राम करण व्हा त हो तो मंदिर मा रैण क सुविधा भी च। स्नानाघर,शौचालय यात्री लुखु क सुविधा क  मंदिर सै भैर  बण्यायूं च। गैस चूल्हा भी च। हाँ खाण पीण क सामग्री आपतें आपरी लिजाण प्वाडलि। मंदिर क भीतर आप क्वी भी चमड़ा व लोहा क चीज नि लिज्ये सकद।  मंदिर दर्शन क बाद आप  आप सिलोगी बिटिक  लैंसडाउन  ह्वैकन की वादियों  की सैर को  सिलोगी -कोटद्वार  सड़क  द्वारा  श्री ताड़केश्वर धाम काआशीर्वाद  प्राप्त  केरिक  दुगड्डा क  दुर्गा देवी मंदिर  व कोटद्वार  क  श्री सिद्दबली धाम की शरण मा ह्वैकन   रेल मार्ग  या सड़क  मार्ग  से दिल्ली   या हौर शहर क यात्रा पर जैकन आपर घार सिलसू मंदिर क कृपा से आराम से पहुंचि सकदान। श्री सिलसू महादेव क जेन भी एक बार दर्शन कैरि आल त वू बार-बार जाण कुन तैयार हुंद किले कि भोले बाबा वेक हर इच्छा पूरी करद।

या सिलसु दिवता कि कृपा च कि कड़थी गौं क हर परिवार क  क्वी न क्वी  नौनु आजाद हिंद फौज क देश आजाद कराण क लड़े से लेकर हिंदुस्तान क  कारगिल त क हर लड़े मा देश क खातिर लड़िन पर सब्बि राजी खुशी आपर मातृभूमि   सिलसू शरण मा वापस सकुशल पहुंचि गैन।

अचगाल सिलसू मंदिर ,कड़थी ,पौड़ी गढवाल  देश मा श्री सिलसू महादेव मंदिर क नाम से कफाी ख्यति प्राप्त कन्नु च ।

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