सुमड़ी गौं पंथ्या दादा जैन गौं बचाण खातिर करी आत्म दाह

टिहरी राजा राजधाणी जै बगत श्रीगनर छे वै से कुच्छ मील दूर पण ऐंछ डांण्ड मा सुमाणी गौं जू आज भी छैं च। पंथ्या काला ये गौं रैवासी छ्या। या जगह अपणु सुंदरता खातिर खूब जणे जांद। बुले जांद कि वै बगत श्रीनगर मा एक भोग विलासी राजा राज करदा छ्या। लोगू बुलण छ कि वै बगत उ राजा श्यामशाह छ्या। उंक बाबत येक औखण बुले जांदा कि श्यामशाह की कोलाई सामी तो सामी, बांगी तो बंागी। राजा दरबारी लोग सुमाड़ी गौं क जू प्राकृतिक सुन्दरता अर सम्पन्नता से जळद छ्यां। राज दरबरियूं बहकाण अर छुंयी मा एै कन राजा श्यामशाह न सुमाड़ी गौं तै अपणी राजधाणी बणाण आदेश दे देन।

           अब जब राजा आदेश ह्वेगेन त सबसे पैल दिक्कत या छे कि सुमाड़ी गौं तै कन मा खाली करे जाव। अर वैक उपाय छ्या कि वख लोगू पण बौत बिण्डी राजस्व कर लगये जाव। वै बगत गौं एक नै ज्वान नौन पंथ्या काला येकू विरोध करी, अर होर लोग भी वै दगड़ी शामिल ह्वे गेन। ये खबर सुणी राजा बौळै ग्या अर गुस्सा ह्वेगे। वैन गुस्सा मा आदेश देन कि सुमाड़ी गौं हर एक मनखी तै मृत्यु दण्ड दिये जाव। या सजा ’रोजा’ नौं से बदनाम छे। ये डऽर क लोग सुमाड़ी गौं छोड़ी कखी होर बसी गेन।

          सुमाड़ी गौं मा दुख ही दुख अर शोक ही शोक ह्वे ग्या किलै कि गौं हर रोज एक आदिम तै मौत सजा हूणी छे । पंथ्या काला न अफीक सबसे पैल अपण बलि द्याणै कि ठाणी। वैक दादा भौजी न वै तै बौत समझायी पर उ नी माणी। वैन अपणू ईष्ट देवी पूजी अर गौं ह्वाळ से भिटै कन विदै ल्यायी अरै गौं ऐंछ डांड मा चढ़ी ग्या। वख वैन अफु पण आग लगायी अर गौं खातिर अपणी बलि दे द्या।

         पंथ्या अपणी बलि द्याणा बाद सुमाड़ी गौं लोगू मा जोश अर उत्साह आयी अर उन ब्यखन बगत एक बैठक बुलायी अर वै मा निर्णय ल्यायी। ये निर्णय मा 21 होर आदिम जौ मा चार जननी भी छे कठ्ठी ह्वैक अफु पण आग लगै क आत्मदाह करी।

   बुले जांदा कि ये बड़ू निर्दयी घटना देखी कन प्रकृति भी रूठी ग्या। असमान मा काळ काळ बादळ सरग मा फैल गेन। बिजळी गरजण लगी अर मोटी बरखा शुरू ह्वे ग्या, अर एक दगड़ी भ्यूंचुल भी आण लगी अर भ्यूंचुळ न राजा महल भी डगमगाण लगी ग्या। राजा अपणू सिहांसन बिटी भुयां पड़ी ग्या। राजा तै बुर बुर अर अनिष्टकारी सुपीन हूण लगी गेन। नै ज्वान छ्वारा पंथ्या काला हंत्या अर उंक आत्मा राजा तै डराण अर सताण लगी ग्या। तब बामण अर बक्की सलाह पण राजा तै सुमाड़ी गौं जैकन येकू प्रायश्चित कन पड़ी। जै जगह मा मनख्यूं बलि दिये जांदी छे वख जागर लगये गेन। सब्बी पितृ आत्मा तै शांत करीक उं नौं कू मंदिर बणये ग्या अर उखम गौं देवी मूर्ति धरे ग्या। हर साल उखम जागर लगण लगी गेन।

          अजों तकन सुमाड़ी गौं मा पितरोड़ीधार मा येकू अवशेष छन। हर साल यखम जागर गये जै कर दन अर अपणू उं पुरखु जौन बलिदान दे छ्या उं तै याद करे जांद। यख लोग उंकुण पंथ्या दादा बोली नौं सुमरे कर दन।

येक दगड़ी यख होर द्यो द्यवतों भी पूजे जंदीन। द्यवतों दगड़ी उंक सहायक शक्ति जन भूत प्रेत, परियां आंछरी तै नचये जांद। लोगू विश्वास अर मनण छ कि सब्बी स्थानीय देवी द्यवतों गण छन। कोटगढ़ी देवी, सिद्वबाबा, कालीनाग, बेणीनाग, चाण देवता, बेताल, मोष्टयादेवता, डुगंरीरेत रौवाज, हनुमान, बजैण भूमिया रूणिया, उल्खा देवी, जणी हो द्यवतों तै पूजे अर नचयें जंदीन।

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