ये मंदिर क तहखाना मा बंद च बूट चोलाधारी सूर्य भगवान की मूर्ति, क्या च रहस्य तुम भी जाणो

पुरातत्व महत्व कुणी जणे जाण ह्वाळ चमोली जिला मा पौराणिक गोपीनाथ मंदिर क तहखाना मा बंद बूट चोलाधारी सूर्य भगवान उजळ कुणी तरसणा छन। पुरातत्व विभाग की कार्ययोगजना छे कि म्यूजियम बणै कन तहखाना मा रखीं मूर्तियू तै देश-दुन्या की नजर समणी लये जाव, लेकिन केन्द्र सरकार तरफ बटी नै म्यूजियम क निर्माण पर फिलहाल रोक लगये जाण से यी कार्ययोजना फाईल मा दबी कन रै ग्यायी।
चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर मा गोपीनाथ मंदिर उत्तराखण्ड क दूसर सबसे ऊॅच मंदिर च। शिवजी क ये पौराणिक धाम तै पुरातत्व विभाग न वर्ष 1992 मा अपर हत्थ पर लिये छ्यायी। 2004 मा पुरात्व विभाग न मंदिर की पौराणिकता तै बरकार रखी कन मरम्मत काम भी करी। मंदिर मा एक तहखाना भी च, जख बूट ह्वाळ सूर्य भगवान की तीन फीट ऊॅची दुर्लभ मूर्ति समेत कत्ती मूर्ति धर्यां छन। कार्ययोजना छेयी कि मंदिर की जमीन मा म्यूजियम बणै कन यूं मूर्तियूं तै यख रखे जाव, ताकि देश दुन्या ये तै देख सको। यूं मा सबसे ज्यादा खास च बूट चोलाधारी सूर्य भगवान की मूर्ति। ये कारण से पारसी लोग ये तै अपर आराध्या देवता मनदन। अगर म्यूजियम मा या मूर्ति रखे जांद त पक्का छ्यायी कि देश-दुन्या क लोग येक दर्शन कुणी आंद। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल देहरादून न म्यूजियम बणाण की कार्ययोजना तै केन्द्र सरकार कुणी भेजी छेयी लेकिन तीन साल पैल केन्द्र न नै म्यूजियम की स्वीकृति पर रोक लगै दे छेयी। ये आदेश कारण गोपीनाथ मंदिर म्यूजियम समेत उत्तराखण्ड क होर म्यूजियम की कार्ययोजना भी फिलहाल प्रतीक्षा मा रखे ग्यायी।

गोपीनाथ मंदिर तै कत्यूरी राजा लोगू न नवीं से 11वीं सदी क बीच बणवायी। नागर शैली मा बण्यूं गोपीनाथ मंदिर क मत्थी गुंबद जणी आकार च र मंदिर मा 24 दरवज छन। मंदिर चैक मा कत्ती होर मंदिर हूण अवशेष मौजूद छन। ये मंदिर मा ह्यूंदूं क छै महीना चतुर्थ केदार भगवान रूद्रनाथ की भी पूजा हूंद। मान्यता च कि ये जगह मा ही भगवान शिवजी न गोपी क रूप धारण करी कन नाची छ्यायीं। मंदिर परिसर मा भगवान शिवजी क पौराणिक त्रिशूल अर फरसा भी मौजूद च। बतये जांद कि 1191 ई0 मा नेपाल क मल्ल वंश क राजा अशोक मल्ल न ये त्रिशूल तै यख चढै छ्यायी। खास बात या च कि त्रिशूल पर तर्जनी उंगळी लगै कन कमण लग जांद। मंदिर परिसर मा कल्प डाळ भी मौजूद च, जू साल भर हर भरू रै करदू। पारसी समुदायक लोग बूट व चोलाधारी सूर्य की मूर्ति तै अपण आराध्य देव क रूप मा मनै करदन। ये कारण पुरातत्व विभाग गोपीनाथ मंदिर क तहखाना मा मौजूद यूं मूर्ति तै पारसियूं क आराध्य देव की मूति क रूप मा मान्यता द्याणा छन।
लिली धस्मना (अधीक्षण, पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल, देहरादून) क बुलन च कि गोपेश्वर क गोपीनाथ मंदिर मा बूट ह्वाळ सूर्य भगवान समेत कत्ती दुर्लभ मूर्ति सुरक्षित छन। यूं तै म्यूजियम बणै कन सार्वजनिक कन की कार्ययोजना छेयी। प्रस्तावित म्यूजियम पर अजों रोक लगीं। भविष्य मा रोक हटण पर म्यूजियम तै बणाण खातिर स्वीकृति मिल सकद।

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