दक्षिण भारत मा उत्तराखंडी व्यंजन

आज हम तुम तै  उत्तराखंड का यन व्यजन का बार मा बतोला जो उत्तराखंड का साथ साथ दक्षिण भारत को भी एक प्रसिद्ध व्यंजन छे  । येथे एक बार गिच्च  मा धरी जाव तब येकी मिठास कभी नि भूल सकदा। बात हूँणी छे देवभूमि का गढ़वाल मा बनण वालो अरसा की जोकि ब्यो बरातू मा यख की एक ख़ास व्यंजन च।  येथे आप आज खावा या भोळ या मेनू बाद येकू स्वाद एक जनी रेंदू पेली यूं हर सुभ काम मा बणदू छे पर अब ये बनोंन की कला थे हर गढ़वाली भूलणु छे हम येथे सिर्फ गढ़वाली इले बुणा छन किलेकी यूं तुम  उत्तराखंड का गढ़वाल मा ही मिलल।  अब तुम सब्युक  दिमाग  मा या बात घूमणीह्वेली गढ़वाल कू व्यंजन किले बोली जांदू और यूं गढ़वाल मा आई कख बटी। जेथे  तुम उत्तराखंड मा अरसा नाम बटी जाणदा वेथे दक्षिण भारत मा अरसालु बोली जांदू ।

                अब यूं दक्षिण भारत बटी यक  उत्तराखंड कनी आय यूं जानण ह्म्थे जरूरी च ।  ये बात थे धर्म आस्था का माध्यम से जाणी जालू। हमरी ज्वा देवभूमि छे यख मंदिरों कू बणाण   परम्परा सालों से चलणी छे । जब जगतगुरु शंकराचार्य न बदरीनाथअर  केदारनाथ बणायी  अर येकू दगडी होर भी  मंदिरू  बणीन।  यूं मंदिरों मा पूजा अर्चना  दक्षिण भारत का ही पुजारी करदन। बोली जांदू की नवी सदी माँ दक्षिण भारत का यूं पंडित गढ़वाल मा अरसालु लेके आया ची किलेकी यूं बौत दिन तक रखी जांदू जेका वास्ता  बामण यख पोटली भरी की अरसालु यख लांदा छि जो उन यख का स्थानीय लोगू थे भी सिखाई अगर ये बात से देखि जाय तो गढ़वाल मा अरसा ११०० साल बटी एक प्रमुख मिठो व्यंजन का रूप मा जाणी जांदू उत्तराखंड और दक्षिण भारत का अरसा मा एक फर्क भी छे उत्तराखंड मा अरसा गन्ना का गुड बटी बणद अर  कर्नाटक मा खजूर कू गुड कू प्रयोग करी जांदू बस यही फर्क च।  थोडा सा स्वाद मा एका अलावा अरसा तमिलनाडू,केरल,आंध्र,उड़ीसा और बंगाल मा भी पाय जांदू कखी येथे अरसालु बोलदा कखी अनारसा लेकिन अब हम अपणी वर्षो बटी चल्णी ये मिठास से भरी अरसा थे भूल्णा छे जोकी हमारी संस्कृति छे

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