आखिर हरक्या अर फरक्या दा मा क्या गप्प लगीन तुम भी जाणो (व्यंग )

परसी हत्थ बिरदरी कू सरपंच जी जलमदिन छ्यायी। सरपंच जी जलम बार मा शामिल हूणा खातिर हरक्या अर फरक्या भी जयां छ्या। जिबरी तकन हरया हत्थू पण सब्ब कुच्छ छ्यायी वै बगत वैन कुच्छ कन चायी त वैक दगड़यों न टंगड़ खिचण शुरू करी देन अर जब 2017 मा पधनू चुनौ वै त द्वी जगह बिटी हरक्या तै मिली त मळ भतांग। वनी हाल फरक्या भी ह्वायी। हरक्या अर फरक्या जिबर तकन गद्दी मा बैठ्या रैन द्वी या द्वी एक दूसर तै एक काणू दूसर काणू तै सारी सकदु उनी हाल छयाई । रोज द्वी यूं मा खूब तुड़म तुड़ा हूणै रै। येकू फैदा अज्जू अर बिज्जू उठै। हर्क्या अर फरक्या खाली बैठ्या छन क्वी काम धंधा नी छ बरसती माख मना छन। हरक्या स्वाची की हमरू सबसे बिरैदरी कू सरपंच जलमबार पूज्याणा ही त पकौड़ी खाणा कुणी इखूल क्या जाणै फरक्या भी अजकली खाली छ त वै तै ही बुलै दीदूं। टैम पास भी ह्वे जाल अर छुयीं बत्थ भी अर यन करी जरा अखबरू मा हमरी फोटो भी छप्पी जाली जू बिण्डी दिन बिटीन छप्प भी नेन। यन कारण से अजकली हमरी बिरदरी पधनी बौ अर थोकदार तै भी पता चल जाल कि अजों हम बुढ्या नी हुआं। बिरदरी सरपंच जलम बार मा जाण से पैल हरक्या दा न फरक्या दा कुणी फोन करी दगड़ मा जाणा कुणी ब्वाली। हरक्या अर फरक्या एक तिवरी मा बैठ गेन। तिवरी मा आ बैठ ह्वायी अर हुक्का गुड़गुड़ांद छुयीं बत्थ शुरू ह्वे गेन।

हरक्या दाः- आ रे भुला फरक्या बैठ भै। खूब छेयी। अजकली त हम लोगू मा क्वी काम धंधा छनी त तब्ब कखी काफल खाणा छवां कखी आम खाणा छवां पर भै अजकली खाली छवां त जिदंगी आनन्द आणू। जख मरजी ब्यौ बरती मुंडन मा दाळ भात खाणा कुणी चली जंदों। जिबर पधान रवां दगड़ मा लौ लस्कर चलदी छे त डऽर भी लगदी छे कि कखी खाण बगत दाळ सुलारू मा चूंगी ग्या त मीडिया ह्वाळू क्वी भरोसू नी छ फोटो उनी डाळी द्याल।

फरक्या दा- हरदा बुलणा तुम ठीक छ्याव। अजकली मी भी तुमरी तरां निठल्लू हुयूं छौं त मी भी अजकली बणू डाळ बूट्यू अर अपणू उत्तराखण्ड जंगळी मनख्यूं बीच जाणा छौं अर उंकी खैरी पीड़ा से जू घौ हुयां छन उंते अपणू पितळी गिच्ची न भरणू छौं। म्यार बाद जू पटवरी बण्यूं उ भी हम्म तै पुछणा नी छ। अब्ब अगर हम तै दूध सी माख चुटै द्याल त क्या ह्वाळ हमर। हमरी ज्वा बौ अजकली पलछाल पधान तै हड़काण कुणी बणयी स्या भी बड़ी फुद्यानाथ बणी। वीन बल बांदर भगाण बाना द्वी तीन तै अपणू दगड़ मिलयाली अर हम तै पूछी तकन नी छ। हमर दगड़ मा ज्वा पैल बिटी बांदर भगाणी छे वा खौंखट बणी छ अर गाळी देकन चपट करणी छ। ठीक ह्वे भी हम नी ग्यवां वै नैनीताल नीथर हमर नाम भी खां मुखा मा ऐ जाण छ्या। 

हरक्या दा : – अरे फरक्या बुढ्या बळद भलै ह्वे ग्यवां पर भदवाड़ बाणा कुणी त बु़ढ्या बळद ही चियंदिन। नै बळद या अणपैट कबरी हळ लठयूड़ तोड़ी द्याल या अपणू खुट्ट पर बंदवळ लगै द्याल कुच्छ पता नी चलण्या। बण द्याव वै पटवरी तै अर वीं बौं ते अब्बी  फुद्यानाथ। मी भी जरा दाव दिखणू छौं।

फरक्या दा : यॉ मिल सूणी कि बल पलछाल करों पधनू क दिल्ली बिटी वै पितळू गिच्च ह्वाळ तै योग दिवस पण बुलयूं छ बल यख। यां तुम तै भी बुलयूं उंख। सैद छ कि तुमकुण त कनी अयूं ह्वाल न्यूतू, परारू साल तकन त तुममी छे यख थोकदरी भी अर पधान भी।

हरक्या दा- अरे चुचा जब अपण ही नी पछणना त बिरणू कुणी जी क्या बुन। वख त बस कमल करों कि मवसू कुणी जगहा ह्वे जाव त गनीमत छ। ठैर ज्यादी जरा मी भी दिखणू छौं उंख जंग तंग। जरा उन कुच्छ गड़बड़ सड़बड करी ना अर मी न खौखांट बण जाण। तब्ब त चिटाल लोग की अब्बी बुढया बळद खुरड़ भलै घिस्सी गे ह्वाल पर अजों तकन सिंग पैन ही छन।

फरक्या दा- यार दादा वे बगत जू वाड़ बाने हम मा जरा खटपट ह्वेगे छे अजों तकन रूसयूं त नी छे न। भै बुलण बिगर त में से भी नी रंयाद मी भी वै बगत गिच्च क्याड़ निकाळी दींद छ्यायी। वै बगत बिज्जू , हरकू, फलण पाल अलण पाल, सत्या, उम्मी, सोबी यूं सब्यूंन तेरी भी खूब फिफराफिपोड़ी करी।  अर मीतै भी भड़कै पर मी उंक बखलौण मा नी औं। वै बगत हम्म जरा यीनी एक हुयां रंद त आज हम्म यन माख किलै मरद। खैर छ्वाड़ो पुरणी बात याद करी अपणू घौ मौळण न। यन बतौ दा 2019 मा क्या सुचणू छे। द्वी जगहा बिट्टी वै बगत तुमरी कुनेथ हूंयी रायी अर लोग क्या दुर्गति करी सी तुम जणदी छ्यावा। म्यार बुल्यूं बुरू ना मानी दा। हरद्वार या नैनीताल कख बिटी छ अब्ब डुबकी लगौण विचार।

हरक्या दा- या फरक्या वै बगत मी होरू गोठ बचौणू रौं अर अपणू द्वी नाख नी बचै पायी। अब्ब सुचणू छौं कि हमर सरपंच क्या बुलद दैं तब्ब। अंग्रेजण सूनी बौ जिबर तकन सरपंचयाणी छेयी वै बगत तकन त अपणी खूब घुटदी छे पर उ नै छ्वारा छ सुणद छ कि ना दी। फिर भी यी बगत फिर हरकी पैड़ी बिटी डुबकी लगाणा सुचणू छौं बकै परमात्मा ही जाणो कख कुणी सुंची वैकी। अरे सूण फरक्या म्यार तेकुणी घऽरया आम अर आड़ू पुलम लयां छन। काफळ त तीन चाखी ह्वाळ हैं तब्ब। जरा एक थैली पण अपणू घऽर कुणी भी लिजादी, बौ तै चख दे।

फरक्या दा- सीन त ठीक छ पर यां मी भी जरा मुंगरी लेकन अयूं छौं ब्याळी पुगड़ पण द्वी बीज ब्वे कन औं अर तुमरी बौजी न बिण्डी मुगरा भिगै देन ब्वाणा कुणी। अब्ब उ बची गेन त मील उसयाण डळवे देन। अजकली छ्वारा त उ क्यपणी क्यपणी चीज पर गीज गेन त उं तै यी मुगरा नखर लगदन। मील स्वाची कि जब्ब जाणा ही छौं त जरा तुमकुणी भी ली जांद। ल्याव तब्ब बुखाणा रैन ह्वां।

वैक बाद फरक्या दा अपणू डऽयार मा बौड़ ग्यायी अर इनै उं बिरैदरी मा कबलाट हुयूं कि ब्याळी हरक्या अर फरक्या मा यन क्या छुयीं बत्थ ह्वेन अर क्या खिचड़ी पकी ह्वेली पर अजों तकन हत्थ बिरदरी तै कुच्छ नी सुण मा आयी। अब द्याखो तब्ब क्या हूंद अगन्या।

 यी सिरफ चबोड़ छ ये मा नौ सब्ब काल्पनिक छन अर येकू हकीकत से क्वी लीण दीण नी छ कै तै नखरी लगद त यी तै उ सिंरफ चबोड़ समझीन।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *