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रन्त रैबारः- रन्त रैबार मतलब हूंद अपणी खबर या सन्देश पौंछाण। पैल पहाड़ मा जब बेटी ब्वारी या नौन भैर नौकरी करद  छ्यायी तब उंक घऽरवाळ तै नाता रिश्तेदार या पास पड़ौसी पूछद छ्या कि बाल बच्चों रन्त रैबार भी आयी। पहाड़ बेटी सुसरास मा अपणू मैत्यूं दगड़ी घऽर गौं रंतरैबार पूछदी छे। घसयरी बणू मा डाळ्यूं हवा तै घुघती तै अपणी मैत मा रंत रैबार पौछांदी छे। यनी हम भी रन्त रैबार बिटी उत्तराखण्ड खबर, संस्कृति लोकभाषा, विचार, गढवळी भाषा मा पौछाणा छ्वट सी प्रयास कना छवां। रन्त रैबार बणौणा उद्देश्य छ्या कि आज चकाचैंध मा हमरी लोकभाषा हरचणी छन जौं तै बचाण जरूरी छ। लोकभाषा तब्बी बची सकदी जब हम अपणी लोकभाषा तै बुलला पढला अर लिखला। आज नै छोळी नै छुयीं मा आॅनलाईन पोर्टल बणाण जू हमर उद्देश्य छ उ या छ कि हमर एक पहाड़ त उत्तराखण्ड मा छ जु आज भी वखी रैवास कनू लेकिन वैसे बड़ू पहाड़ हमर उत्तराखण्ड से भैर छन उंतकन रंत रैबार पौछाण बाबत यू पोर्टल बणये ग्यायी ताकि देश परदेश मा रैक भी अपणी संस्कृति अपणी बोली अपणी भाषा तै बोली पढी अर समझ ल्याव। जब हमरू क्वी उत्तराखण्डी भै बैणी परदेश मा रंदीन अर उंतो अपणी बोली भाषा मा बच्याण ह्वाळ मिली जांद तब उतै खुशी दगड़ मा एक अपणयास जुड़ी जांद। आज नै पढवळी अपणी बोलीभाषा संसकृति तै मठु-मठु बिसरदी जाणी जैसे हमरी बोली भाषा हरचण खतरा दिन प्रतिदिन बढणू। अपणी संस्कृति अपणी भाषा बचाण बाबत रंत रैबार कुच्छ उद्देश्य आ सब्यू समणी रखणा छवांः-

1. नै छोळी नै छुयूं बीच अपणी गढवळी मा अपणी बात पौछाण।

2. लोकसंस्कृति अर बोली भाषा तै बचाण अर वैक संरक्षण कन।

3. गढवळी बोली से भाषा बणाणा बाबत एक लिपि तैयार कन प्रयास।

4. गढवळी लोक साहित्य, संव़र्द्धन कन प्रयास।

आप लोग भी आवा अर रंत रैबार दगड़ मा अपणी बोली अपणी भाषा तै अफीक बचाव।